सुरेश गांधी-
वाराणसी। श्रावण मास में शिवभक्ति में डूबी काशी इस समय गंगा के उफान से परेशान है। आस्था की नगरी में गंगा का रौद्र रूप श्रद्धा के बीच भय घोल रहा है। मंगलवार रात 8 बजे केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा गंगा का जलस्तर 72.23 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 71.262 मीटर से लगभग एक मीटर ऊपर है। जलस्तर फिलहाल स्थिर है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। घाटों से लेकर निचले मोहल्लों तक पानी का दबाव बना हुआ है।
1978 की विनाशलीला की आशंका
अगर जलस्तर में वृद्धि जारी रही, तो 1978 जैसी भयावह बाढ़ की पुनरावृत्ति हो सकती है, जब गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड 73.901 मीटर तक पहुंच गया था।
घाटों पर अफरा-तफरी, आरती सीमित
मणिकर्णिका, हरिश्चंद्र और दशाश्वमेध जैसे प्रमुख घाटों पर पुलिस और जल पुलिस तैनात है। गंगा आरती अब सीमित स्थान पर आयोजित की जा रही है। घाटों की सीढ़ियां डूब चुकी हैं और आमजन का वहां पहुंचना मुश्किल हो गया है। पहली बार नमो घाट को बंद किया गया है। घाट पर बनी “नमस्ते” संरचना भी डूबने के कगार पर है। शीतला घाट की सड़क तक पानी पहुंच गया है।

शवदाह में मुश्किलें
मणिकर्णिका घाट पर शवों की कतार लगी है। गलियों में नावें चल रही हैं, और शव ले जाने के लिए यात्रियों से 200 से 500 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। अंतिम संस्कार में 5-6 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। लकड़ी का रेट प्रति मन 600-700 से बढ़ाकर 1000-1200 रुपये कर दिया गया है। हरिश्चंद्र घाट पर भी शवदाह अब गलियों में किया जा रहा है।
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के पास तक पानी
बाढ़ का पानी बीएचयू ट्रॉमा सेंटर से मात्र 800 मीटर दूर है। सामने घाट की सड़क तक गंगा पहुंच चुकी है। दशाश्वमेध घाट पर शीतला मंदिर पूरी तरह डूब चुका है और पानी अब सब्जी मंडी तक पहुंच गया है।
प्रशासनिक सतर्कता
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने नमो घाट, सुजाबाद, डोमरी और पड़ाव क्षेत्र का दौरा कर राहत शिविरों की व्यवस्थाएं परखी। डोमरी के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए राहत कैंप में रह रहे लोगों से बातचीत कर सुविधाओं का जायजा लिया गया।
शिक्षा पर असर
अब तक 46 विद्यालयों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे 11,000 से अधिक छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि इन विद्यालयों की कक्षाएं अब ऑनलाइन चलाई जाएंगी।

धार्मिक आस्था बनाम प्रशासनिक चुनौती
श्रावण के अंतिम सोमवार के बाद अब रक्षाबंधन और पंचकोशी यात्रा जैसे आयोजनों के चलते भीड़ और बढ़ेगी। गंगा आरती, घाट पूजन और नाव संचालन जैसी गतिविधियों पर प्रशासन को अब और सतर्क रहना होगा।
डीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया, “गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार है और आपदा प्रबंधन टीमें तैनात कर दी गई हैं।” नगर आयुक्त ने भी नाव और एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
1978 जैसे हालात दोहराने का खतरा
काशी में 1978 की बाढ़ अब तक की सबसे भीषण मानी जाती है, जिसने शहर की एक तिहाई आबादी को प्रभावित किया था। अगर जलस्तर में बढ़ोतरी नहीं थमी, तो ऐसे हालात फिर से उत्पन्न हो सकते हैं।


