देश ने राजनीति में इतनी गिरावट कभी नहीं देखी होगी जितनी अब देखने को मिल रही है। यह दो वीडियो देखिए। आपको पहले और अब की नंगी होती पॉलिटिक्स का फर्क समझ में आ जाएगा।
डॉ मुकेश कुमार-
कांग्रेस के वीडियो पर बीजेपी महाविलाप कर रही थी। कह रही थी कि कांग्रेस ने मोदी और उनकी मां का अपमान किया है।
हालाँकि उसमें अश्लीलता नहीं थी, न भाषा की गंदगी थी और न ही दृश्यों की। कोई द्विअर्थी या ग़लत इशारा भी नहीं था। एक कटाक्ष था, चुभने वाला।
मगर बीजेपी के इस वीडियो को देखिए और तय कीजिए कि इसमें उसके चिंतक-विचारक क्या कहने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इशारे क्या हैं और इससे उनकी कौन सी मानसिकता झलकती है।
बीजेपी चाहती तो शालीनता और भद्रता से जवाब दे सकती थी मगर उसने वही रास्ता चुना जिसके लिए वह जानी जाती है।
पहले लोग कह रहे थे कांग्रेस ने सेल्फ गोल कर लिया मगर प्रतिशोध लेने के अहंकार ने बीजेपी ने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
शीतल पी सिंह-
बिहार कांग्रेस ने यह वीडियो जारी किया है और बीजेपी समर्थक पत्रकार/एंकर/बीजेपी प्रवक्ता/दक्षिणपंथी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर और महाकाय ITcell के असंख्य अकाउंट राहुल गांधी और कांग्रेस पर मोदीजी की माताजी के पुनः अपमान का आरोप लगा रहे हैं।
इस सबसे लगता है कि देश को न चाहकर भी इस मुद्दे पर विमर्श करना ही पड़ेगा। आप भी अपनी राय कमेंट्स में दाखिल कीजिए।
कनुप्रिया-
बीजेपी ने सोनिया गाँधी और राहुल को शर्मिंदा करने के लिये एक वीडियो जारी किया है जिसमे सोनिया गाँधी को बार बाला दिखाए जाने का संकेत है. ख़ैर इस पार्टी से इसी स्तर की उम्मीद है.
मगर आप यदि युरोप जाएँगे तो आपको कई students अपनी pocket money के लिये छोटे मोटे काम करते हुए मिल जाएँगे.
कुछ समय के लिये मैं इटली रही थी, ब्रिंडीसी में, वहाँ भी एक cleaner आती थी हफ्ते में एक बार, वैसे शायद स्टूडेंट थी, आते ही पोशाक बदलती, तुरत फुरत एक प्रोफेशनल की तरह काम निबटाती, कोई बात चीत नही, अपने काम का पैसा लेती और चली जाती. वही शाम को किसी रेस्तरां में पास की टेबल पर खाते पीते मिल जाती.
मैंने तो वहाँ यही पाया कि 18 साल के बाद वहाँ लड़के लड़कियाँ बजाय अपनी फ़ीस और दूसरे खर्चों ले लिए माँ बाप से पैसे लें, वो छोटे मोटे काम करते हैं और किसी काम को करने में कोई शर्म नही, न कोई उन्हें शर्मिंदा करता.
अगर सोनिया गाँधी ने कैम्ब्रिज में अपनी पढ़ाई के वक़्त pocket money के लिये UK में किसी रेस्तरां में काम किया हो तो क्या दिक़्क़त है. (बार मे काम करने की बात अफ़वाह है, और अगर वहाँ भी काम किया होता वेट्रेस का तो कोई बुरी बात नहीं)
ख़ुद स्मृति ईरानी ने भी कभी वेट्रेस और क्लीनर का काम किया है, तो? 35 साल भीख माँगने से तो कोई भी काम करके अपना ख़र्च चलाना लाख बेहतर है.
अजब है कि हमारे यहाँ भीख माँगने वाले पर गर्व किया जाता है और वेट्रेस के काम पर शर्म.


