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सियासत

भारत में दबे पाँव आ चुकी है मंदी!

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-

क्या दबे पांव आ चुकी है मंदी ? मोदी समर्थक नहीं मानते कि देश में कहीं कोई भी आर्थिक दिक्कत है। उनकी नजर में सब कुछ इतना बढ़िया चल रहा है कि अमेरिका, यूरोप वाले भी मोदी जी का लोहा मान चुके हैं। जबकि खुद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दो दिन पहले जो आंकड़े जारी किए हैं, उससे साफ नजर आ रहा है कि देश के आर्थिक हालात गहरे मुश्किल दौर की तरफ बढ़ रहे हैं। आइए देखते हैं कि आरबीआई के आइने में देश की आर्थिक दशा- दिशा कैसी नजर आ रही है:

घट रहा विदेशी मुद्रा भंडार
विदेशी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में 8 अरब डॉलर और गिरकर 580.25 अरब डॉलर हो गया, जो 15 महीनों में सबसे कम है। इससे पिछले हफ्ते में भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 5 अरब डॉलर कम हो गया था और 1 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के बाद से साप्ताहिक गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले एक अप्रैल को भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में 11.17 अरब डॉलर की गिरावट आई थी।

घट रहा स्वर्ण भंडार भी
सोने यानी गोल्ड का भंडार भी पिछले सप्ताह के 40.42 अरब डॉलर से गिरकर 39.19 अरब डॉलर हो गया।

बढ़ रहा आयात- निर्यात गैप
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है और तेल की ऊंची कीमतों ने देश के आयात-निर्यात के गैप को और बढ़ा दिया है।

बढ़ रहा व्यापार घाटा
भारत का व्यापार घाटा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर
डॉलर के मुकाबले रुपये का पतन लगातार जारी है।रुपया गिरकर डॉलर के मुकाबले 80 रुपए तक भी जा चुका है। इसमें हाई रिस्क को देखते हुए निवेशकों ने अपना निवेश रुपये से निकालकर डॉलर में करना शुरू कर दिया है, जिससे रुपया और भी कमजोर हो रहा है। चिंता की बात यह है कि भारत का व्यापार घाटा और आयात निर्यात गैप बढ़ने के कारण रुपया अभी और नीचे आ सकता है।

बढ़ रही है महंगाई
यूक्रेन संकट की वजह से यूरोप पर गंभीर ऊर्जा संकट मंडरा रहा है और सप्लाई चेन में भी रूकावट आ रही है, जिससे दुनियाभर समेत भारत में भी सामानों की कीमत में इजाफा हो रहा है।

क्या भारत में भी आएगी मंदी?
जापानी रेटिंग एजेंसी नोमुरा ने भारत का ग्रोथ रेट अनुमान भी घटा दिया है। नोमुरा के विश्लेषकों ने भारत के 2023 के विकास दर के अनुमान को घटाकर 4.7% कर दिया है, जो भारत के लिहाज से बड़ा झटका है।ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या दुनिया के कई देशों के साथ भारत भी आर्थिक मंदी में फंस सकता है?

नोमुरा ने जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें कहा गया है कि, ‘उच्च मुद्रास्फीति, सख्त मौद्रिक नीति ,बिजली की कमी और वैश्विक विकास मंदी ने मध्यम अवधि के हेडविंड को जन्म दिया है। नतीजतन, हमने अपने 2023 जीडीपी विकास अनुमान को 5.4% से घटाकर 4.7% कर दिया।’

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