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सियासत

मोदी जी पीएम रहेंगे, लेकिन हाथ बंधे रहेंगे!

सुभाष सिंह सुमन-

इस बार मोदी लहर जैसी कोई चीज नहीं थी. खुद मोदी जी को अपनी सीट पर संघर्ष करना पड़ गया. राय साहब ने गजब की टक्कर दी. सवा लाख का मार्जिन बनारस सीट के लिहाज से बहुत कम है.

ये सोचना गलत है कि जनता राम जी के नाम पर बाकी सब बात भूल जाएगी. राम जी के नाम पर काम होता तो अयोध्या वाली सीट (फैजाबाद) कम से कम नहीं हारते.

क्षेत्रीय पार्टियां प्रासंगिक बनी रहेंगी. ममता बनर्जी हों, अखिलेश जी हों या नीतीश जी, दगे कारतूस नहीं हैं. जनता ने बारूद भरकर उन्हें रिचार्ज कर दिया है.

लोकतंत्र में कोई स्थाई राजा नहीं है. न मोदी जी अजेय हैं, न नवीन पटनायक. जनता वाकई में जनार्दन है. कभी भी आसमान से उतारकर धूल में लोटा सकती है.

समय हर किसी का बदलता है. इस कारण बुरे समय में किसी का उपहास मत करिए. चंद्रबाबू 5 साल पहले अपने जीवन के सबसे बुरे दौर में थे. आज राजा आदमी बन गए हैं. आंध्र से लेकर दिल्ली तक भौकाल रहने वाला है.

ये इस चुनाव के 5 मुख्य सबक हैं. मैं कोई चुनावी विशेषज्ञ नहीं हूं तो layman’s pov मान लें. भाजपा और भाजपा वालों के लिए एक्स्ट्रा सबक रहेगा कि वाशिंग मशीन को बंद करना होगा. अन्य पार्टियों से लाए कचरे को जनता ने खास पसंद नहीं किया है. किसी चुनाव में बहुत सीटें मिल जाएं तो हवा में नहीं उड़ना चाहिए. जिस कांग्रेस से भारत को मुक्त कर रहे थे, उसी कांग्रेस से भाजपा भर गई और उधर कांग्रेस की सीटें भी डबल हो गईं.

बाकी बात सरकार की, तो मोदी जी फिलहाल झोला नहीं उठा रहे हैं. पीएम रहेंगे, लेकिन हाथ बंधे रहेंगे. गठबंधन सरकार अर्थव्यवस्था के हिसाब से ठीक नहीं है. पुराने अनुभव यही कहते हैं. आज बाजार इसी कारण ओवर रिएक्ट कर रहा था. बाजार अभी नर्वस ही रहने वाला है, जब तक नई सरकार पर तस्वीर साफ नहीं हो जाती है.

हम और आप जैसे पीपल के हिसाब से कोई खास बदलाव नहीं होने वाला है. राहुल जी पीएम बन जाते, तब भी नहीं होता. आपके जीवन की दशा और दिशा पर सरकारों के बदलने से 1% भी असर नहीं पड़ता है. असर पड़ता है आपके अपने काम करने से. तो जिस भी प्रोफेशन में हैं, लगे रहिए. मेहनत करिए. तरक्की करिए. अर्थव्यवस्था पर भी बहुत खास असर नहीं होना अभी के हालात में. मार्केट हर बात पर ओवर रिएक्ट करता है. कल भी कर रहा था. अर्थ और नीति के हिसाब से ये फर्क जरूर आएगा कि जो बहुत सारी चीजें गुजरात और उत्तर प्रदेश तक सीमित रह जा रही थीं, वो अब बिहार जैसे राज्यों तक बेहतर पहुंचेंगी.

भाजपा समर्थकों के लिए: खिसियाहट में जनता को गरियाने की गलती न करिए. अभी इस जनता ने बहुमत से दूर किया है. कभी विपक्ष में भी बिठा सकती है. आत्मावलोकन करिए. कहां गलतियां हुईं, उस पर चिंतन करिए. जनता न तो 2014 में गलत थी, न ही 2024 में गलत है.

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