
सरकारी टेलीकॉम कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) पर जल्द ही ताला लटकने वाला है. इस कंपनी का पूरा कारोबार भारत संचार निगम लिमिटेड को दे दिया जाएगा. देश में प्राइवेट सेक्टर की टेलीकॉम कंपनियां जियो, एयरटेल और वोडाफोन के साथ यह सरकारी कंपनी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाई. जिसके कारण कंपनी अपने अंत के निकट है.
कभी मुंबई-दिल्ली में डंका बजाने वाली एमटीएनएल के स्वतंत्र ऑपरेशन को सरकार ने बंद करने का फरमान सुना दिया है. यानी अब कोई भी ग्राहक MTNL का रिचार्ज नहीं करा पाएगा. इसका रिचार्ज भी अब बीएसएनएल के जरिए हो सकेगा.
3000 कर्मचारियों का क्या होगा?
एमटीएनएल के कर्मचारियों को सरकार वीआरएस का विकल्प देने की योजना बना रही है. हालांकि, अभी आधिकारिक रूप से इसका एलान नहीं किया गया है. कर्ज के बोझ तले दबी एमटीएनएल के तीस हजार करोड़ रुपये के लोन को पुनर्गठित करने के बाद सरकार इस कंपनी का पूरा संचालन BSNL को हस्तांतरित कर देगी.
आधिकारित सूत्रों का कहना है कि इस कंपनी के केवल संवतंत्र संचालन के अस्तित्व को ही बंद किया जा रहा है लेकिन बीएसएनएल के माध्यम से इसका संचालन जारी रहेगा. कंपनी में अभी लगभग 3000 कर्मचारी काम कर रहे हैं. जिन्हें वीआरएस दी जा सकती है. यदि कर्मचारी ये विकल्प को नहीं स्वीकारते तो उन्हें बीएसएनएल में जाने का रास्ता दिखाया जा सकता है.
इस फैसले के पीछे क्या है?
एमटीएनएल पर बढ़ता कर्ज और बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारम इसका संचालन बीएसएनएल को सौंपने का निर्णय लिया गया है. गौरतलब है कि एमटीएनएल व बीएसएनएल को को सरकार 2019 में राहत पैकेज के रूप में 3.22 लाख करोड़ रुपये दे चुकी है.
एमटीएनएल को बीएसएनएल को सौंपने के बाद सरकार अच्छे रिजल्ट की उम्मीद तो जता रही है लेकिन यह उम्मीद कैसे पूरी होगी जब खुद BSNL अच्छी हालत में नहीं है. जबकि सरकारी टेलीकॉम कंपनियों का टावर इस्तेमाल कर निजी कंपनियां ग्राहकों को बेहतर कॉलिंग और हाई स्पीड इंटरनेट का साधन दे रही हैं. ये दोहरी नीति देर सबेर घातक होगी तो इनके कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए.



Ramesh Chauhan
July 18, 2024 at 12:23 am
Yah khud hi jimmedaar hai iske liye
Muhammad
July 20, 2024 at 7:57 pm
Inke karamchari se sari ki sari di huyi salary wapis le leni chahiye
Itne bade kamchor the ki dubo diya mtnl ko