मुंगेर के वरिष्ठ प्रेस छायाकार दिवंगत सुबोध सागर को प्रेस क्लब की ओर से शनिवार को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। जैन मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार कुमार कृष्णन ने किया। उन्होंने कहा कि सुबोध सागर ने फोटो जर्नलिस्ट रूप में जितनी ख्याति और लोकप्रियता हासिल की, वह बहुत कम लोगों को नसीब हो पाता है। उनकी तस्वीरों में इतनी जीवंतता थी कि वह सब कुछ कहने में समर्थ होती थी। उनकी स्मृति को बनाए रखने के लिए एक स्मारिका के प्रकाशन करने का सुझाव दिया।
इसमें न सिर्फ मुंगेर के पत्रकारों का, बल्कि बाहर के पत्रकारों, संपादकों, साहित्यकारों, समाजसेवियों, अधिकारियों के संस्मरण प्रकाशित किए जाएं। इस प्रस्ताव का समर्थन सभी पत्रकारों ने किया।
समाजसेवी निर्मल जैन ने कहा कि सुबोध सागर जितने अच्छे प्रेस छायाकार रहे, उतने ही अच्छे इंसान थे। कोई भी कार्यक्रम उनके आए बिना शुरू नहीं होता था। पांच दशकों तक अखबार एवं समाज हित में जो उल्लेखनीय कार्य किया उसे भुलाया नहीं जा सकता।
पत्रकार राजेश कुमार ने कहा कि सुबोध सागर के साथ करीब छह-सात वर्षो तक काम करने का मौका मिला। बढ़ती उम्र के बावजूद उन में युवाओं की तरह ऊर्जा थी। उनकी तस्वीरें बोलती थी।
मुंगेर प्रेस क्लब के अध्यक्ष राणा गौरी शंकर ने सुबोध सागर के साथ वर्षो तक किए कार्यो पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने छायाकार रहते हुए समाचार लेखन में मार्गदर्शन किया। उन्होंने पत्रकारिता जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ गये हैं। उनकी स्मृति में हर वर्ष सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा, ताकि उनके संघर्ष से नई पीढ़ी के लोग अवगत हो सकें।
नीलकमल श्रीवास्तव ने कहा कि सुबोध सागर के साथ चालीस वर्ष तक काम करने का मौका मिला। इस दौरान उनसे फोटो ग्राफियों की बारीकी सीखने का मौका मिला।
पत्रकार त्रिपुरारी मिश्र ने कहा कि सुबोध सागर के निधन से मुंगेर को अपूरर्णीय क्षति हुई है। उनकी पुण्यतिथि पर हर वर्ष सम्मान समारोह का आयोजन किया जाना चाहिए, जिससे कि उनकी स्मृति सदैव बनी रहे। संतोष सहाय ने उनके कार्यों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में ये थे मौजूद: श्रद्धाजंलि सभा में पत्रकार नवीन कुमार झा, हैदर, समीर सिन्हा, अमित कुमार, विजय शंकर सिंह, सुनील गुप्ता, राकेश मंडल, सज्जन गर्ग, सुजीत मिश्रा, सोनू झा आदि मौजूद थे।
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