एक बड़े माफिया डॉन ने मुन्ना बजरंगी को जेल में मारने की सुपारी सुनील राठी को दी थी! देखें वीडियो

मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या से योगी सरकार पर भी उठने लगे सवाल….

Girish Malviya : रामराज्य की दूसरी क़िस्त आज रिलीज हो गयी कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी को जेल में 10 गोली मार कर हत्या कर दी गयी है. अपराधी है तो मृतक से किसी को कोई सहानुभूति नहीं है लेकिन फिर भी जेल में इस तरह की हत्या क़ानून व्यवस्था पर गम्भीर प्रश्न खड़े करती है. 10 दिन पहले ही मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने प्रेसकांफ्रेन्स कर उसकी हत्या की आशंका जताई थी.

Navneet Mishra बता रहे हैं प्लानिंग के तहत राठी अपने प्रभाव की बागपत जेल में पहुंचा था, बागपत के टिकरी कस्बे की उसकी मां चेयरमैन रह चुकी हैं। फिर प्लानिंग के तहत उसी की जेल में मुन्ना को भेजा गया। बहाना बागपत कोर्ट में पेशी का था। और, जैसे ही मुन्ना बजरंगी बागपत जेल आया उसे मौत के घाट उतार दिया गया। कहा जा रहा है कि एक बड़े माफिया डॉन के इशारे पर सुनील राठी को जेल के अंदर मुन्ना को मारने की सुपारी दी गई थी। सवाल यह है जेल में जिस हुजूर की साइन से सुनील राठी को शिफ्ट करने का फैसला हुआ था, उन्हें इस काम के लिए कितने मिले? या फिर किसका दबाव था?

स्वप्निल कुमार पाण्डेय : मुन्ना बजरंगी जैसे कुख्यात अपराधी की मौत अच्छी खबर है लेकिन जेल में, कानून के संरक्षण में हत्या, यूपी के मौजूदा कानून व्यवस्था पर तो सवाल खड़ा होना लाजिमी है ही। योगी सरकार चाहे लाख दावा कर ले लेकिन धरातल पर हकीकत यही है कि पुलिस खुलेआम मनमानी कर रही है, हर बात पर चढ़ावा मानों उसके रग में समा गया हो! यूपी में कानून नाम की कोई चीज़ नहीं रह गयी है, भ्रष्टाचार तो अपने उच्चतम बिंदु पर है ही!

Harsh Vardhan Tripathi : मुन्ना बजरंगी की जेल के भीतर हत्या हो गई। प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी पेशेवर हत्यारा था, इसलिए मेरी तरह हर सामान्य व्यक्ति खुश है, होना भी चाहिए। लेकिन, जेल के भीतर मुन्ना बजरंगी को मारी गई गोली, दरअसल योगी आदित्यनाथ की सरकार में कानून व्यवस्था की स्थिति पर लगी गोली की तरह है। इसलिए जश्न मत मनाइए और पता करिए कि, किस बड़े बदमाश को सरकारी संरक्षण मिला है, जिसने जेल में ही मुन्ना बजरंगी को मरवा दिया।

Ashwini Sharma : मुंबई में जब मुन्ना बजरंगी को पकड़ा गया तो वो ऑटो चालक का हुलिया धर मालाड में रह रहा था..माँ की तेरहवीं के समय जेल से असलहों से घिरा जौनपुर पहुंचा था..यही फ़र्क है मुंबई और यूपी में..जेल में ही भून दिया जाता है.. यूपी की जेल में किसी का कत्ल कैसे हो सकता है… अफसरों को सस्पेंड कर के क्या होगा, वे बहाल होकर फिर आ जाएंगे.. सरकारी नौकर हैं..

Dharmendra Pandey इसी तरह एक दशक पहले बनारस सेंट्रल जेल में अन्नू त्रिपाठी मारा गया था। कहा तो यहां तक जाता है कि तत्कालीन प्रदेश सरकार का एक कद्दावर नेता सर्किट हाउस में तब तक बैठा रहा जब तक उसे अधिकारियों द्वारा पूरी तसल्ली दे दी गई कि अन्नू मर गया। अन्नू इसी मुन्ना बजरंगी का दाहिना हाथ माना जाता था।

Ashutosh Ujjwal : बागपत जेल हाई सिक्योरिटी है, जहां मुन्ना बजरंगी को गोली मारी गई वहां कोई CCTV नहीं है. इससे ज्यादा हाई सिक्योरिटी अग्रवाल स्वीट्स में होती है.

वीडियो देखें…

सौजन्य : फेसबुक

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