जेल में मर्डर : उस कैदी को वियाग्रा खिलाकर निपटा दिया गया था!

Yashwant Singh : चूंकि मैं ‘जानेमन जेल’ नामक किताब का लेखक हूं और 68 दिन जेल का नमक खाने का मौका पा चुका हूं इसलिए जेल में मुन्ना बजरंगी के मर्डर के बारे में एक्सपर्ट कमेंट देना अपना कर्तव्य समझता हूं.

जेलों में पहले भी लोग मारे जाते रहे हैं. बात पुरानी है. सेक्स स्कैंडल का एक बड़ा आरोपी जेल में बंद हुआ. उसके हाईप्रोफाइल क्लाइंट्स की लिस्ट में तत्कालीन यूपी सरकार के एक मंत्री भी हुआ करते थे. मंत्री जी को सपने आते थे कि कहीं वह उनका नाम ले लेगा तो बड़ा गड़बड़ होगा. उस आरोपी के पास कुछ ऐसे डाक्यूमेंटस भी थे जिससे सेक्स स्कैंडल में मंत्री जी का नाम जुड़ता.

सो मंत्री जी ने अफसरों के साथ मिलकर एक प्लानिंग रची. सबसे पहले तो आरोपी को जेल में तनहाई में रखा गया. यानि अकेले. फिर उसे खाने में हर रोज चुपचाप थोड़ा-थोड़ा वियाग्रा मिलाकर दिया जाता. रेगुलर वियाग्रा के सेवन के साइड इफेक्ट्स ने असर दिखाना शुरू किया. पल्स रेट और बीपी सब भयानक रूप से बढ़ गया. वह अशांत रहने लगा. एक रोज उसे हार्ट अटैक आया और मर गया. कितनी शांति से उसे निपटा दिया गया.

मुन्ना बजरंगी को शांति से निपटाया जाता तो पोलिटिशिन्यस को वो फायदा न मिलता जो अब मिल रहा है. भूमिहार समुदाय के लोग कृष्णानंद राय के हत्यारे की हत्या पर ‘खून का बदला खून’ कह कर खुश हो रहे हैं और इसके लिए योगी जी को बधाई दे रहे हैं. कृष्णानंद की हत्या का बदला पूर्वांचल में एक बड़ा मुद्दा था. बीजेपी के नेताओं ने खासकर इसे उठाया-भुनाया था.

मुन्ना बजरंगी कुख्यात मुख्तार अंसारी गैंग का आदमी था. सो, यहां हिंदू मुस्लिम एंगल भी है. मुन्ना बजरंगी के धुर विरोधी माफिया बृजेश सिंह और उसके दो-दो परिजन बीजेपी के जनप्रतिनिधि हैं. इसलिए बीजेपी के अपने घर के लोगों की हनक हत्याकांड के बाद से बढ़ गई है.

इस हत्या से सारे वो मुद्दे दब गए जिनको लेकर योगी सरकार की घेरेबंदी हो रही थी. चर्चा सिर्फ और सिर्फ जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या की हो रही है और कई दिनों तक होती रहेगी. योगी जी की टीम को सांस लेने का मौका मिल गया है.

हां, जेल में इस तरह गोली मार कर हत्या की घटना से सात तालों में कैद सुरक्षित जिंदगी के दावे की धज्जियां उड़ गई हैं. जेलों को जेल मैनुवल के हिसाब से संचालित करने की बात कही गई है लेकिन जो हालात अब हैं उसमें लगता है जेल गुंडा बदमाश चला रहे हैं. तभी तो जेल में हथियार की सप्लाई आराम से हो जाती है और उससे मर्डर भी उतने ही आराम से कर दिया जाता है. दो चार अफसर सस्पेंड हुए हैं. फिर बहाल हो जाएंगे और जेलें यूं ही चलती रहेंगी.

भड़ास के फाउंडर और एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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