
उन्नाव। साहित्यकारों व पत्रकारों ने कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनकी कालजयी रचनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने वाला प्रेमचंद का उपन्यास रंगभूमि आज भी प्रासंगिक है। प्रेमचंद के दो उपन्यास रंगभूमि और निर्मला 100वें वर्ष में हैं।
अमर कथाकार और उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की 145वी जयंती के अवसर पर अटल बिहारी इंटर कॉलेज उन्नाव के सभागार में “आज के समय में प्रेमचंद” विषयक गोष्ठी में मुख्य वक्ता अलीगढ़ यूनिवर्सिटी पूर्व विभागाध्यक्ष उर्दू प्रो. सगीर अफराहीम ने कहा कि संपूर्ण भारतीय साहित्य की भाषाओं में जनजीवन को समझने, उनकी रोजमर्रा की दुश्वारियां से रूबरू होने के लिए प्रेमचंद के अलावा कोई दूसरा कहानीकार आज तक नहीं हुआ, उनकी कहानी और उपन्यास आज की सियासत को आईना दिखाती हैं।
आयोजन के विशिष्ट वक्ता के रूप में जन संस्कृति मंच लखनऊ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार कौशल किशोर ने कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद को याद करते हुए कहा कि यह प्रेमचंद जी थे जिन्होंने 100 साल पहले लिखा था कि राष्ट्रीयता की पहली शर्त वर्ण व्यवस्था, ऊंच नीच के भेद और धार्मिक पाखंड की जड़ खोदना है। वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा ने सौ वर्ष पूरे कर चुके रंगभूमि उपन्यास को किसान संघर्ष का प्रामाणिक दस्तावेज बताया।
लखनऊ से आईं कवियत्री जयप्रभा यादव तथा अशोक मिश्रा लखनऊ ने भी विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता सईद नकवी ने की। अतिथियों का स्वागत अटल बिहारी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अजब सिंह यादव ने किया। व्याख्यान का विषय प्रवेश डॉ रामविलास शर्मा शोध सृजन संस्थान के महामंत्री कवि दिनेश प्रियमन तथा प्रस्तुत आधार पत्र का पाठ सुशील कुमार मिश्र ने किया। संचालन प्रगतिशील लेखक संघ के संरक्षक डॉक्टर रामनरेश प्राचार्य ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से श्री नसीर अहमद, आलोक अग्निहोत्री, अखिलेश तिवारी, जब्बार अकरम, संजीव श्रीवास्तव,चंद्रभान चंद्र, पीयूष तिवारी, कमाल दानिश, सरल कुमार, अबरार अहमद, मनीष त्रिपाठी, सौरभ शुक्ला, पीके मिश्रा, सुशील मिश्रा, रघुराज मगन हेमंत नंदन पंत आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे।


