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सुख-दुख

डिजिटल अरेस्ट हुए कवि नरेश सक्सेना ने कविता सुनाकर ठगों को ठगा

नरेश सक्सेना-

ये ज़रूरी पोस्ट शायद मेरी मूर्खता के बारे में है क्योंकि जो बात सबको पता थी उसका शक मुझे नहीं हुआ। फिर भी इस आशंका से कि शायद कोई मेरे जैसा और भी हो।

07 जुलाई 2024 दिन के तीन बजे “अगम बहै दरियाव” के लिए निकलने ही वाला था कि एक वीडियो कॉल आया। पूछा गया- क्या आपका आधार कार्ड खो गया है? चूँकि किसी और ने उसका उपयोग कर मुम्बई में एकाउंट खोल लिया है। और उससे करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है। मुम्बई कोर्ट थाने में अपराध दर्ज है। आपका अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है। मैं सीबीआई इंस्पेक्टर रोहन शर्मा बोल रहा हूँ। आप बुज़ुर्ग हैं। भले आदमी मालूम पड़ते हैं। पिता समान हैं। यदि जाँच में सहयोग करेंगे तो मैं कोशिश करूँगा कि आप जल्दी छूट जाएँ। वरना कई साल हिरासत संभव है।

फिर कहा- आधार कार्ड का वेरिफिकेशन करना है नंबर बताईये? कितने बैंक खाते हैं? कितनी रकम है? सालाना कितना ट्रांजैक्शन करते हैं? कितना इन्वेस्टमेंट है? इनकम कितनी है? इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं कि नहीं? सब की जानकारी चाहिए।

यह जानकर कि मैं कवि हूं। मीर और फैज के शेर सुनाने को कहा। फिर मुझसे अपनी कविताओं को सुनाने के लिए कहा। कहा कि हम जानना चाहते हैं कि आप सच बोल रहे हैं या नहीं।

फिर बहुत देर तक मेरी कविताएं सुनी। बहुत तारीफ की। फिर कहा कि अब सीबीआई के मुंबई के चीफ़ आपसे बात करेंगे। चीफ साहब को भी बताया कि साहब बहुत अच्छे आदमी है और इनसे आप भी कविताएं सुनिए। प्रायोरिटी में इनकी जांच करके इनके खातों का वेरिफिकेशन कर लीजिए। ताकि मनी लॉन्ड्रिंग का शक हट जाए। और इन्हें आप 24 घंटे में मुक्त कर दें।

चीफ साहब ने बताया कि आप चूंकि जांच में सहयोग कर रहे हैं इसलिए मैं 24 घंटे में आपकी रिहाई करवा दूंगा। फिलहाल आप नजर बंद है। कमरे का दरवाजा बंद कर दीजिए। घर वालों को भी यह बात मत बताइए। इसी वीडियो कॉल पर हमारी नजरों के सामने आपको रहना होगा।

फिर कहा- मोबाइल को चार्जिंग पर लगा लीजिए। ताकि 24 घंटे में बैटरी खत्म ना हो और आप हमारी नजरों के सामने रहे। किसी फोन कॉल का जवाब न दे। घर वालों को भी कह दें की 24 घंटे तक आपको डिस्टर्ब ना करें। यह नेशनल सिक्योरिटी का मामला है। इसलिए इतनी सख्ती बरती जा रही है। घर वालों को भी ना बताएं कि मामला क्या है।

जब बहुत देर तक ना मैंने दरवाजा खोला, न कारण बताया तो सब लोग घबरा गए। सबकी एक ही राय थी कि ये फ्रॉड है। इसे फौरन बंद करिये। इस नंबर को ब्लॉक करिये। अपने खाते फ्रीज करिए।

तब उसने धमकी दी कि अब मैं आपके घरवालों को भी गिरफ्तार करवाऊंगा। इंस्पेक्टर माथुर और एसपी राजेश पाण्डे सबको गिरफ्तार करने आ रहे हैं।

तब तक बहू सोनी ने मेरे हाथ से फ़ोन छीन लिया। और उससे कहा जो करना है कर लीजिए। तब वह भद्दी गालियां देने लगा। इस बीच पूर्वा और अस्मित भी लगातार मुझसे कह रहे थे कि यह फ्रॉड है। उन्होंने इस बीच तीस्ता सीतलवाड़ और कुछ वकीलों से भी संपर्क किया। हमारे मित्र अशोक सिंह ने भी कहा नंबर ब्लॉक करिए। सबका यही कहना था कि यह फ्रॉड है। सोनी ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया।

एक आशंका यह भी बताई जा रही है। कि उसने 6 घंटे तक मेरी वीडियो रिकॉर्डिंग की है। वह इसका दुरुपयोग कई तरह से कर सकता है। जैसे कि इसमें एडिट करके अश्लील दृश्य इस तरह डालना कि मैं उसमें शामिल दिखूं अतएव कम से कम वे जो मेरे जैसे हैं। वे सावधान रहें।

मित्रों इस समय जबकि कोई किसी की कविता पढ़ना या सुनना नहीं चाहता। उसने मेरी कविताएं घंटे भर तक सुनी। बहुत तारीफ की। और बताया कि मैं उसी की तरह कविता प्रेमी हूँ। इस बीच उसने मुझसे बाँसुरी भी सुनी।

फ़िलहाल न तो गिरफ़्तारी हुई और न पैसे का नुकसान। उचित समझें तो खबर शेयर कर दें।


वीरेंद्र यादव-

हिंदी कविता की घटती लोकप्रियता के इस समय में कवि ने कविता सुनाकर ठग को ठगा, इससे कविता के नए आयाम का उद्घाटन होता है। हिंदी कविता के आलोचकों को इस पहलू पर गम्भीर विमर्श करना चाहिए।


नलिन रंजन सिंह-

विगत 7 जुलाई को कवि नरेश सक्सेना के साथ जो कुछ हुआ, वह आजकल किसी न किसी के साथ रोज हो रहा है। साइबर क्राइम के लोग लगातार शिकार हो रहे हैं।

पिछले 25 दिनों से मुझे भी स्पैम में दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम डिप्टी कमिश्नर की ओर से एक ईमेल आ रही थी कि ‘आप आपराधिक कृत्यों में शामिल हैं। आप तत्काल नोटिस का जवाब दें अन्यथा 24 घंटे के भीतर आपके खिलाफ लोकल पुलिस को अरेस्ट वारंट भेज दिया जाएगा और आप गिरफ्तार हो जाएँगे।’ खास बात यह रही कि यह धमकी भरी ईमेल रोज आ रही थी। स्पैम आमतौर से रोज कोई खोलता नहीं है। इसलिए करीब 25 दिनों से आए हुए मेल पड़े हुए थे।

एक सी प्रकृति के संलग्नक और मेल देखकर मुझे एहसास तो हो गया कि यह किसी फ्रॉड का दिमाग है, फिर भी मैंने बात आगे बढ़ाई और उत्तर दे दिया कि ‘मैं इस तरह के किसी आपराधिक कृत्य में शामिल नहीं हूँ। इसलिए यह आरोप खारिज किया जाए।’ जवाब देते ही मुझे व्यक्तिगत रूप से संबोधित करते हुए इनबॉक्स में मेल आया कि आप या तो इसको कोर्ट में सेटल करें या व्यक्तिगत रूप से सेटल करने के इच्छुक हों तो आपको ₹85000/ देने होंगे।

मुझे सब कुछ समझ में आ चुका था। मैंने मेल और संलग्नक का स्क्रीनशॉट लिया और दिल्ली पुलिस में ही तैनात अपने एक अनुजवत आईपीएस को भेज दिया। उन्होंने हँसते हुए कहा कि ‘बच गए सर आप। इन जालसाजों की दुनिया बहुत बड़ी है। इनकी रोज शिकायतें आती रहती हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि ‘तमाम पुलिस अधिकारियों के वास्तविक नाम से इन जालसाजों ने आईडी बना रखी है।’

फिलहाल मैंने उस मेल आईडी को ब्लॉक कर दिया है। तमाम केसेज के उदाहरणों और एक अवकाश प्राप्त साइबर क्राइम विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी से इस संबंध में हुई वार्ता से एक ही सुझाव आया कि ‘बचाव ही सुरक्षा है।’ आप इस तरह के किसी फरेब में न फँसें तो बचे रहेंगे। एक बार पैसे अगर चले गए तो उनका वापस आ पाना बहुत मुश्किल होता है। जालसाजों का गिरोह पैसों को ट्रांसफर करता रहता है और आईडी बदलता रहता है।

इसलिए जरूरी है कि किसी भी अननोन नंबर से आई वीडियो कॉल को कतई न उठाएँ। अननोन नंबर से आए व्हाट्सएप कॉल को भी न उठाएँ। मेसेज में भेजी गई किसी तरह की संदेहास्पद लिंक को टच न करें। संदेहास्पद मेल आईडी को ब्लॉक कर दें और आई हुई मेल को डिलीट कर दें। बिना जानकारी के कोई ऐप डाउनलोड न करें। कोई भी कॉल संदेहास्पद लगे तो उसे काट दें और नंबर ब्लॉक कर दें। ध्यान रखें– ‘बचाव ही सुरक्षा है।’

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