एनडीटीवी पर बैन के खिलाफ देश भर से उठने लगी आवाज

DUJ Calls for Protest on NDTV Ban

The Delhi Union of Journalists (DUJ) strongly and unequivocally condemns the one-day ban on NDTV’s Hindi channel, ostensibly for its reporting of the Pathankot airbase attack.  We see no reason for singling out NDTV in this manner when all channels reported the attack in similar fashion.  In a democracy no bureaucratic body such as the Inter-ministerial Committee of the Information & Broadcasting Ministry that issued this order should have such arbitrary powers. Exercise of such power reminds one of the dark days of the Emergency when the media was muzzled and citizens’ freedoms lost.

An emergency extended executive meeting will now be held the DUJ office at 6.30pm preceded by its executive on Monday 7 November, 2016 where its action programme will be finalised , DUJ president SK Pande and general secretary Sujata Madhok announced  today. The statement added :”We commend the Editors Guild for issuing a strong statement protesting the ban and call upon all media bodies and  journalists to unitedly protest this attack on media freedom.  We demand an immediate revocation of this undemocratic order.”

The DUJ called for the widest possible united front to fight this and connected attacks on freedom of the press.

एनडीटीवी पर एक दिन के प्रतिबन्ध का तानाशाही फ़ैसला वापस लो!

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अंतर-मंत्रालयी कमेटी द्वारा एनडीटीवी को एक दिन (९ नवम्बर) के लिए प्रतिबंधित करने का फ़ैसला दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है. एनडीटीवी पर आरोप है कि उसने पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले की रिपोर्टिंग के दौरान ‘रणनीतिक रूप से संवेदनशील ब्योरे’ प्रसारित किये थे. गौरतलब है कि लगभग सभी टेलिविज़न चैनलों ने मिलती-जुलती रिपोर्टिंग की थी. मोदी सरकार द्वारा एनडीटीवी को ख़ास तौर से चुना जाना उसकी मंशाओं को स्पष्ट कर देता है. यह सरकार की सबसे मूलगामी आलोचना करनेवाले चैनल को किसी बहाने से धमकाने और चुप करा देने की कोशिश है. सीधे-सीधे मीडिया की आज़ादी के उसूल का यह उल्लंघन आपातकाल की याद दिलाता है. सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह प्रतिबन्ध जिस दिन लगाया गया, उससे ठीक एक दिन पहले ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के पुरस्कार वितरण समारोह में प्रधानमंत्री ने मीडिया की आज़ादी पर अंकुश लगाए जाने के सन्दर्भ यह कहा था कि “आज निष्पक्ष भाव से आपातकाल की मीमांसा हर पीढी में होती रहनी चाहिए, ताकि इस देश में ऐसा कोई राजपुरुष पैदा न हो जिसको इस तरह के पाप करने की इच्छा तक पैदा हो.” यह इच्छा मोदी सरकार के भीतर गहरे तक धंसी हुई है, यह बात उसके अब तक के कारनामों से वैसे भी ज़ाहिर थी, प्रतिबन्ध के इस फैसले से तो इस ‘पाप करने की इस इच्छा’ को लेकर कोई संदेह नहीं रह गया है. जनवादी लेखक संघ इस फैसले की कठोर शब्दों में निंदा करता है और इसे अविलम्ब वापस लेने की मांग करता है.

मुरली मनोहर प्रसाद सिंह (महासचिव)
संजीव कुमार (उप-महासचिव)
जनवादी लेखक संघ

AINEF OPPOSES NDTV BAN

The All India Newspapers Employees Federation (AINEF) has expressed serious concern at the one day ban on the NDTV and demanded its withdrawal. In a joint statement  issued from the AINEF Delhi Office,  President Mr. SD Thakur, Vice President   SK Pande and general secretary Mr. Balagopalan have called the “ban a selective attempt at targeting NDTV.”

“We express full solidarity with the movement against the ban, which is ominous, unprecedented and an attack on freedom of the press. It is indeed arbitrary and a colorable exercise of power to muzzle the press by the authorities.

SK Pande
Vice President
AINEF

Press release

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Comments on “एनडीटीवी पर बैन के खिलाफ देश भर से उठने लगी आवाज

  • Jitendra Kumar India tv says:

    पिछले दो दिनों में NDTV पर एकदिवसीय प्रतिबंध से संबंधित सैकड़ों पोस्ट पढ़े । ज़्यादातर मीडिया के महापुरुषों ने बैन का विरोध किया है । और इसके लिए सबने अपने-अपने तर्क दिए हैं । उनके तर्कों को आप फेसबुक पर पढ़ लीजिएगा । फिलहाल बात अभी थोड़ी देर पहले देखे एक वीडियो संदेश की । जिसे मीडिया के एक महापुरुष ने पोस्ट किया है । उन्होंने भी बैन की निंदा करते हुए अपने तर्क दिए हैं । और साथ ही सभी संपादकों से बैन के ख़िलाफ एकजुट होने की अपील की है । सर ने तर्क दिया है कि मीडिया को रेगुलेट करने के लिए NBSA (National Broadcasting Standard Authority) नाम की एक संस्था है । जो बहुत ही कड़ाई से कुछ भी ग़लत दिखाने पर चैनल्स के ख़िलाफ एक्शन लेती है । ऐसे में उस संस्था के होते हुए सरकार को किसी चैनल को बैन करने का कोई अधिकार नहीं । सर की बात बहुत हो गई । अब बात अपनी । यहां आप लोगों के लिए ये जान लेना बहुत ज़रूरी है कि NBSA के ज़्यादातर पदों पर मीडिया के महापुरुष ही विराजमान हैं । जिनमें NDTV के भी कई बुद्धिजीवी शामिल हैं । कुल मिलाकर ये समझिए कि बिल्ली को ही दूध की रखवाली सौंप दी गई है । NBSA की और अधिक जानकारी के लिए Google कर लीजिएगा ।

    फिलहाल मैं आगे बढ़ता हूं । 1999 में करगिल युद्ध के दौरान बरखा दत्त समेत कई रिपोर्टर ग्राउंड ज़ीरो से LIVE दे रहे थे । और उस LIVE को देखकर पाकिस्तान की सेना हमारे जवानों को ढेर कर रही थी । उस वक्त NBSA नाम की ये बिल्ली पैदा भी नहीं हुई थी । इसलिए देख ही नहीं पाई कि दूध कौन पी गया । 26/11 यानि मुंबई हमले के दौरान लगभग सभी चैनल्स ने LIVE कवरेज दिखाया । और पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका भारतीय न्यूज़ चैनल्स का LIVE देखकर ‘कसाब एंड कंपनी’ को पल पल की जानकारी दे रहे थे । तब NBSA नाम की ये बिल्ली दूध की रखवाली कर रही थी । और आतंकी उसी दूध से दही और फिर रायता बनाकर फैला रहे थे । अगर वाकई में ये बिल्ली सही तरीके से अपनी ड्यूटी निभा रही होती । तो कायदे से उसी दौरान सभी चैनल्स को काला कर देना चाहिए था । कुछ दिनों के लिए । लेकिन अफसोस तब ना तो NBSA के कान पर जूं रेंगी और ना ही तत्कालीन सरकार के कानों पर । क्योंकि उस सरकार के मुखिया “हज़ार जवाब देने से बेहतर ख़ामोश रहना” पसंद करते थे । माफ करिएगा सर नोटिस भेजने के अलावा आपका NBSA किसी काम का नहीं । और उसके भेजे नोटिस चैनल्स की रद्दी की टोकरी में डाल दिए जाते हैं । इससे ज़्यादा और कुछ औकात नहीं है आपके NBSA की ।

    सांप, बिच्छू, नेवला, अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय, लाल किताब अमृत, निर्मल दरबार, जन्म कुंडली, हकीम उस्मानी, सोना बेल्ट, और सिद्धू का इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स.. ये सब दिखाने के लिए मिलता है न्यूज़ चैनल का लाइसेंस ? अगर नहीं तो फिर क्यों दिखाया जा रहा है ये सब ? और कहां है NBSA ? हक़ीक़त तो ये है सर कि सब मनमानी चल रहा है । जो आपका मन करता है । जिससे आपको TRP मिलती है । आप वही सब दिखा रहे हैं । और दोष मढ़ रहे हैं दर्शकों पर कि दर्शक यही सब देखना चाहते हैं । किसी गांव के मेले में बार बलाओं का डांस हो जाता है । तो आप कहते हैं अश्लीलता परोसी जा रही है । और 5 मिनट के विज़ुअल को Loop पर लगाकर 15 मिनट तक दिखाते रहने को क्या परोसना कहते हैं ? कभी सोचा है आपने ? गांव में बार बलाएं नाचीं तो 100 लोगों ने देखा । आपने टीवी पर 15 मिनट नचाया तो लाखों लोगों ने देखा । अब बताइए अश्लीलता कौन परोस रहा है? गांव वाले? या आप? सड़क पर एक पुलिस वाला पीकर लुढ़क जाए । तो बैक ग्राउंड म्युज़िक के साथ ‘थोड़ी सी जो पी ली है” दिखाते हुए सवाल खड़े करते हैं । और लिखते हैं ख़ाकी हुई शर्मसार । और रात 8 बजे के बाद फिल्म सिटी में जो ‘कार-बार’ सजता है । कभी उसकी भी तस्वीर दिखाई आपने ? और कभी कहा कि देखिए कैसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पीकर लुढ़क रहा है । एक एंकर महोदय तो LIVE बुलेटिन के दौरान पीते हैं । ये क्यों नहीं दिखता आपके NBSA को । कहने का मतलब ये कि सुविधा की पत्रकारिता करते हैं आप? भूल जाइए सर अब नहीं होगा । क्योंकि अब ‘राजा’ और ‘प्रजा’ दोनों ही आप लोगों की हक़ीक़त जान चुके है ।

    NBSA की बात बहुत हो गई । चलिए अब एकजुटता की बात कर ली जाए । सर ने अपने संदेश में कहा कि सभी लोग एकजुट होकर बैन के ख़िलाफ सरकार का विरोध करें । किसे एकजुट होने के लिए कह रहे हैं आप ? इन्टर्न, ट्रेनी, 5 हज़ार से 15 हज़ार पाने वाले युवा पत्रकार, दिनभर आपकी गाली खाने वाले रिपोर्टर और 6-6 महीने तक वेतन ना पाने वाले स्ट्रिंगर से एकजुट होने के लिए कह रहे हैं ? कभी इनके हक़ के लिए भी कोई संदेश दिया आपने? नहीं दिया । क्योंकि आपकी नज़र में इनकी कोई औकात ही नहीं है । कभी सीधे मुंह बात नहीं की मीडिया के महापुरुषों ने इनसे । अच्छा होता यही एकजुटता आप लोगों ने तब भी दिखाई होती । जब IBN7 से 300 से ज़्यादा लोगों को निकाल दिया गया । NDTV को एक दिन के लिए काला किया जा रहा है तो आप छाती पीट रहे हैं । NEWS EXPRESS, P7, महुआ NEWS के मालिकों ने चैनल को हमेशा के लिए काला कर दिया । और हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए । तब आपकी एकजुटता घास चरने चली गई थी ?

    यही नहीं सहारा में महीनों से लोग बिना सैलरी पाए काम कर रहे हैं । वो नहीं दिख रहा है आपको । कुकुरमुत्तों की तरह नए चैनल आते हैं और बंद हो जाते हैं । हज़ारों पत्रकार बेरोज़गार हो जाते हैं । और आप मौन साधे रह जाते हैं । छोटी-छोटी गलतियों पर पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया जाता है । तब चैनल मालिक के ख़िलाफ एकजुटता दिखाने की बजाय आप अपनी कुर्सी से चिपके रह जाते हैं । क्यों सर ये दोहरा चरित्र क्यों? जवाब नहीं देंगे आप । मैं बताता हूं क्यों । क्योंकि जब चैनल मालिक आपसे घाटे का रोना रोते हैं । तब आप उन्हे cost cutting की घुट्टी पिलाते है । 10 पत्रकारों को निकलवाकर 20 का काम 10 से करवाते हैं । और जब तक आपको लात पड़ती है । तब तक दिल्ली-NCR में आपकी 4 कोठियां तन चुकी होती हैं । और वो 15 हज़ार पाने वाला पत्रकार दर-दर की ठोकरें खा रहा होता है । तब आपको चौथा स्तम्भ दम तोड़ते हुए नहीं दिखता है । और आज चौथे स्तंभ को बचाने के लिए आप उन्हीं शोषित पत्रकारों से एकजुट होने की अपील कर रहे हैं । मत सुनिएगा मीडिया के इन महापुरुषों की बात । ये किसी के सगे नहीं है । मैं एक ऐसी युवा पत्रकार को भी जानता हूं । जिसे रवीश कुमार के कहने पर ओम थानवी ने नौकरी से निकलवा दिया था । क्योंकि उसने कश्मीर के मुद्दे पर फेसबुक पर अपने विचार लिख दिए थे । कल को मीडिया के ये महापुरुष आपके साथ भी यही करेंगे । ध्यान रखिएगा । इसलिए लड़ाई लड़नी है तो पहले मीडिया के भीतर की इस बुराई से लड़ाई लड़िए ।

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  • chandan kumar jha says:

    पत्रकारिता में एक बात कही जाती है कि अगर सरकार ने या देश के सबसे मजबूत व्यक्ति ने अगर आपको फटकार या गरियाने लगता है तो आप एक सफल पत्रकार बनने के रास्ते पर सबसे आगे खड़े है . लेकिन सवाल ये उठता है कि वो आप को गरियायेगा क्यों ? इसका सबसे आसान और सस्ता तरीका है कि आप किसी भी व्यक्ति को 2002 से गरियाना सुरु करो और वो व्यक्ति कम से कम किसी राज्य का मुख्यमंत्री होना चाहिये आप उसके गले में अपनी उंगली दाल दो और हाथ कहा डालना है समझ जाओ इस कार्य को निरंतर आप 12 वर्षो तक करते रहो मतलब 2014 तक जब तक की वो मुख्यमंत्री देश का प्रधानमंत्री ना बन जाए फिर आप उन्हें सूचित करो कि साहब हम आप से सवाल पूछ रहे थे और यह तब तक चलता रहेगा जब तक की आप हमें गरियायेंगे नहीं. वो भी प्रधानमंत्री है भाई हाड मांस हड्डियों का बना है ना की कोई रोबोट है 2016 में वो आपको किसी न किसी तरह से आप को आजिज हो कर गरिया ही देगा. बस आप उसी दिन से प्रधानमंत्री बनने के लाइन में खड़े हो जाओगे या कम – से कम केजरीवाल की तरह मुख्यमंत्री तो बन ही जाओगे …… पूरे NDTV और रविश को यही भ्रम हो गया है . इन्हें विरोधियो का इतना फालतू का समर्थन मिल रहा है कि ये सभी ताड़ के झाड पे चढ़ के राई का पहाड़ बना दिया है . भाई यही लोकतंत्र है आप किसी से भी सवाल पूछ सकते हो किसी भी तरीके से चाहे वो तरीका मर्यादित हो या अमर्यादित और जब आप से कोई सवाल आप के ही style में पूछ ले तो हम पत्रकार बिरादरी के लोग सियारों कि तरह हुआ-हुआ करते हुए कह्ते है कि मीडिया पर आपातकाल है , मीडिया के स्वतंत्रता का हनन है आदि – आदि .
    ++++ अब हम जैसे लोगो को भी गाली थोडा सोच-समझ के देना होगा की कही कोई हमारी गाली से विधायक या सांसद ना बन जाए

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  • DUJ, Katju sahab aur na janey kitney… iss ek din ke ban par itna kyon Ro-dho rahey… Inka rona dekh ker to aisa lagta hai, ki iss desh mein ab “Rashtriyata” ka paimana badal gaya hai aur desh ke khilaf bolney, aisi sthiti paida kerney, taki desh ki janta ko gumrah kiya jaa sakey, uska daur chal padaa hai… Main aap sabon ke samaksh kuchh batein rakhna chata hoon, dhyan se padhein aur fir apney dil ki aawaz ki suney. Yadi thodi si bhi Desh ke liye (kuchh gaddar partiyon ke liye nahin) kuchh bachaa ho, to sochein aur tab NDTV ke Paksh me apni aawaz buland karein….
    Prannoy Roy aur Swayamsiddh Kumar Sahab se kuchh sawaal…
    Ek din ke Ban se hi “Asahishnu ho gaye….
    Tumney Ishrat ko Defend kiya…
    Tumney Batla ko Defend kiya…
    Tumney Chara Chor ko Defend kiya…
    Tumney JNU ko Defend kiya….
    Tumney “Akhlaak” ko Defend kiya….
    Tumney “Sena par Prashn” kiya…
    Itna sab par bhi humlog aur Sangheeya Sarkar chup rahi, par ab, jab….
    “Rashtriya Suraksha aur Desh ki Samprabhuta ka prashn hai, Chup rahna bhi to ‘Namardgi’ hi hogi na…. Isliye ekdiwasiya Ban ke karan kya hoga? Tumhara Wichar wa Abhivyakti ke naam par “Randi-Rona” badh jayega, kintu ussey hame kuch nahin karna… Haan, iss mulq (desh) ki janta ne sarkar ko chuna hai, uskey dwara liye gaye nirnay se hum sahmat hain, kyonki iss desh par hamara bhi utna hi adhikar hai, jitna tumsab samajhte ho… Apney neech Wichar ko poorey desh par thopney ki koshish na karo… Apney masley ko wichar wa abhivyakti se jodkar “randi-rona” machaney ke bajai apney “PURANEY EPISODE HI DEKH LO” aur Ek din ka kuchh “Poonya Kaam” hi kar lo….
    Jai Bharat

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