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नेपाल में पत्रकारों और युवाओं का प्रदर्शन, कइयों की मौत के बाद गृह मंत्री का इस्तीफ़ा, सोशल मीडिया से बैन हटा

नेपाल अपेक्षाकृत एक नया जनतंत्र है. वहां डेमोक्रेसी की उम्र ज्यादा नहीं है. पर एक बात के लिए इस नये लोकतंत्र की तारीफ़ करनी होगी कि वहाँ के वरिष्ठ मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफ़ा देते हैं! ऐसा तो यूरोप, आस्ट्रेलिया और कुछेक अन्य मुल्कों में ही देखा जाता है. एक समय अपने देश में भी बड़े-बड़े मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया करते थे. अच्छी बात है अगर हमारे पडोसी और दोस्त-देश नेपाल में लोकतांत्रिक मूल्य स्थापित हो रहे हैं. GenZ प्रदर्शन व हिंसा आदि के बाद नेपाल के गृहमंत्री Ramesh Lekhak ने कल शाम ही इस्तीफ़ा दे दिया! ख़बर है कि सरकार ने बीती रात सोशल मीडिया बैन भी हटा लिया. -उर्मिलेश

काठमांडू [नेपाल]: नेपाल की राजधानी काठमांडू में सरकार द्वारा लगाए गए सोशल मीडिया बैन के खिलाफ पत्रकारों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस विरोध में फेडरेशन ऑफ नेपाली जर्नलिस्ट्स (FNJ) के पूर्व पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। वहीं, जनरेशन-Z ने भी सोमवार (8 सितंबर) को देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है।

नेपाल में हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ पत्रकारों के साथ युवा भी सड़क पर उतर चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक मरने वालों का आंकड़ा 18 हो चुका है। 100 से ज्यादा घायल हुए हैं। एक पत्रकार को गोली भी लगने की सूचना है।

प्रदर्शनकारी पत्रकारों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाए—

  • “NoBan”
  • “Freedom of Expression Is Our Right”
  • “The People’s Voice Cannot Be Silenced”
  • “Democracy Is Being Hacked, Dictatorship Is Coming Back”

सरकार का दावा

नेपाल सरकार का कहना है कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां उसके प्रशासनिक आदेश और पंजीकरण प्रावधान का पालन नहीं कर रही थीं। इसी आधार पर नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण को आदेश दिया गया और सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) को प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बैन करने के निर्देश मिले।

सरकार का तर्क है कि कंपनियां नेपाल में राजस्व तो कमा रही हैं लेकिन देश में आधिकारिक रूप से पंजीकृत नहीं हैं और न ही टैक्स ठीक से दे रही हैं। इसी कारण उन्हें बंद किया गया है। हालांकि, जिस बिल—‘द ऑपरेशन, यूज एंड रेगुलेशन ऑफ सोशल मीडिया इन नेपाल’—का हवाला देकर यह कार्रवाई की गई है, वह संसद से अभी पारित ही नहीं हुआ है।

पत्रकारों का आरोप

फेडरेशन ऑफ नेपाली जर्नलिस्ट्स, ललितपुर शाखा के अध्यक्ष राम हरि कार्की ने कहा—

“यह कदम सोशल मीडिया को नियंत्रित करने का प्रयास है। यह नियमन नहीं बल्कि पूर्ण नियंत्रण की कोशिश है। नेपाल के संविधान-2072 ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी दी है, लेकिन सरकार का यह कदम संविधान की भावना के खिलाफ है।”

मौजूदा स्थिति

  • 4 सितंबर की आधी रात से नेपाल में दो दर्जन से ज्यादा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद कर दिए गए।
  • सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म्स को बार-बार चेतावनी दी गई थी कि वे नेपाल में दफ्तर खोलें और टैक्स अदा करें।
  • फिलहाल Viber, TikTok, Wetalk और Nimbuzz नेपाल में रजिस्टर्ड हैं। Telegram और Global Diary पंजीकरण प्रक्रिया में हैं।
  • लेकिन Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे बड़े और लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स अब भी रजिस्टर्ड नहीं हुए हैं और इन पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

अगला कदम

जनरेशन-Z ने 8 सितंबर को देशभर में आंदोलन की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट और पर्चों के जरिए लोगों से अपील की है कि वे काठमांडू के बानेश्वर (संघीय संसद के पास) एकत्रित होकर सरकार पर दबाव बनाएं कि वह इस बैन को वापस ले।


मनीष शर्मा-

नेपाल सोशल मीडिया बैन प्रोटेस्ट: मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हुई, सैकड़ों घायल…. देश भर में बवाल. क्या आपने कभी सोचा था कि सोशल मीडिया ban होने पर देश भर में बवाल हो सकता है? या फिर लोग इसके लिए मरने मारने पर उतारू हो जाएंगे?

लेकिन यह हो रहा है….. सोशल मीडिया को लोकतंत्र का हिस्सा बना दिया गया है… जहाँ सोशल मीडिया पर कैसा भी नियंत्रण करने की कोशिश होगी… वहां उसे लोकतंत्र की हत्या माना जाएगा. अब यह हाल तो नेपाल का है…. कल को भारत में कोई सोशल मीडिया App बंद हो जाए, या जिस देश की वो app है.. वही बंद कर दे… तो क्या होगा?

क्या हो.. अगर ट्रम्प कह दें कि कल से भारत में Facebook और Youtube बंद कर रहे हैं.. क्यूंकि भारत हमारी बात नहीं मान रहा…. जब तक भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा… अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों के भारत में Availability को खत्म किया जाता है.

अब आप कहेँगे कि ऐसा नहीं हो सकता. जी ऐसा बिलकुल हो सकता है… अमेरिका ने रूस से अचानक से सभी IT कंपनियों, Apps और अन्य Corporates को वापस बुला लिया है…. Visa Mastercard और यहाँ तक कि Swift भी रातों रात बंद कर दिया था.

अगर भारत में भी ऐसा हो जाए…. Facebook Youtube और Instagram बंद हो जाएं… और इसका ठीकरा भारत सरकार पर फोडा जाए. तो क्या होगा? भारत में नेपाल से कहीं बड़ा बवाल होगा…. और हो सकता है सरकार के लिए operate करना बहुत मुश्किल हो जाए.

क्यों? क्यूंकि सोशल मीडिया Apps अब केवल Apps नहीं हैं….. यह लाखो करोड़ों के लिए पैसा कमाने का साधन है….. करोड़ों के लिए अपने दोस्तों से कनेक्ट रहने का माध्यम है…. लाखों लोगों का Business इस पर depend है….. वहीं करोड़ों लोगों का यह अकेलेपन का साथी है.

सोशल मीडिया एक तरह का धीमा जहर है.. जिसकी लत करोड़ों को लग चुकी है….. अब इसे बंद किया तो वह लोग उग्र हो जाएंगे. एक Self Entitlement और Image Obsession से ग्रस्त लोगों के लिए तो सोशल मीडिया hi सब कुछ है ….. जो लोग अकेले में रोते हैं.. वही लोग सोशल मीडिया पर अलग Personality रखते हैं.

वो लोग कहाँ जाएंगे? वह लोग सड़को पर दंगा करेंगे… और हम जैसे भुगतेंगे.


आर के जैन-

नेपाल में भी सरकार गिराने के लिए बांग्लादेशी मॉडल? क्या नेपाल में भी श्रीलंका और बांग्लादेश के मॉडल पर सरकार गिराने की साजिश रची गई है?

ये सवाल इसलिए क्योंकि जिस तरह से प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंकाई संसद और बांग्लादेश की सरकारी इमारतों पर कब्जा कर सरकार को गिराया था, ठीक वैसा ही नेपाल में भी किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने देश की संसद को घेर लिया है और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध हटाने की मांग, अब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे पर आ गई है।

नेपाल के युवा पीएम ओली से इस्तीफा मांग रहे हैं। नेपाल मे अभी तक हिंसक प्रदर्शन में 16 लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट है। प्रदर्शनकारी सरकार पर भ्रष्टाचार करने, सत्तावादी नीतियाँ अपनाने, नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का आरोप लगा रहे हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल की राजधानी काठमांडू में सोमवार को अचानक विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ है, जिसमें 28 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के आने पर पाबंदी है। इसीलिए इसे GenZ प्रदर्शन नाम दिया गया है। 26 साल से कम उम्र के युवा, जिन्हें जेन-जेड कहा जाता है, वो न्यू बनेश्वर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध और सरकारी भ्रष्टाचार के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प के बाद यह आंदोलन हिंसक हो गया, जिसके बाद काठमांडू जिला प्रशासन को न्यू बनेश्वर इलाके और उसके आसपास कर्फ्यू लगाना पड़ा हैं।

नेपाल में छात्रों का हिंसक प्रदर्शन, क्या बांग्लादेश मॉडल है? अधिकारियों और चश्मदीदों ने बताया है कि नेपाली पुलिस ने संसद भवन में घुसने की कोशिश कर रही युवाओं की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाईं।

वहीं नेपाल के रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ गोविंद राज पोखरेल ने लिखा है कि “कोई अगर-मगर नहीं, लेकिन NC को सरकार छोड़नी ही होगी। देश अराजकता की ओर बढ़ रहा है, जनविरोधी ओली सरकार का समर्थन मत करो ! नेपाल में अभी केपी शर्मा ओली की सरकार है, जिसे नेपाल कांग्रेस ने समर्थन दे रखा है। केपी शर्मा ओली, चीन के काफी करीबी रहे हैं।

भारत के जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुशांत शरीन बांग्लादेश और श्रीलंका मॉडल का जिक्र कर रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि “अब नेपाल की बारी है! क्या हमसे कुछ चूक हो गई है कि सड़कों पर गुस्से का ये जबरदस्त विस्फोट हो रहा है? बस एक चिंगारी की जरूरत है।

हमने इसे श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल में देखा है। हम इसे इंडोनेशिया में और म्यांमार में और भी ज्यादा भयावह रूप में देख रहे हैं। हमने इसे किसान आंदोलन (सरकार की निष्क्रियता) और शाहीन बाग के दौरान देखा।

उन्होंने आगे लिखा है कि “क्या सरकारें सड़कों पर बन रहे दबाव को नजरअंदाज कर रही हैं? क्या कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पता ही नहीं है कि क्या हो रहा है? क्या कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इस बात का अंदाजा है कि विश्वविद्यालय परिसरों, अल्पसंख्यक समुदाय के समारोहों, विशेष हित समूहों, राजनीतिक समूहों में क्या हो रहा है।

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