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सुख-दुख

न्यूज़ चैनल की TRP, कोचिंग सेंटर का बेसमेंट और संपादक का जलेबी समोसा

संजय सिन्हा-

मीठा मीठा मेरा, तीता-तीता तेरा… न्यूज़ चैनल के धंधे में हर हफ्ते टीआरपी आती है। जब मैं टीवी न्यूज़ चैनल में था तब की कहानी-

जिस हफ्ते टीआरपी बढ़ जाती, टीआरपी बढ़ने का पूरा क्रेडिट संपादक के नाम होता। जिस हफ्ते चैनल दूसरे या तीसरे नंबर पर होता, टीआरपी गिरने की गाज नीचे वाले पर। संक्षेप में समझें तो मीठा-मीठा संपादक के हिस्से और तीता-तीता (कड़वा-कड़वा) नीचे वालों के। जिस हफ्ते हम नंबर टू या थ्री होते, संपादक उस कड़ी को तलाशता कि जिसके चलते ऐसा हुआ।

आप सोचेंगे कि संजय सिन्हा आज टीआरपी कथा क्यों लिख रहे हैं? बात इतनी-सी है कि दिल्ली के राजेंद्र नगर में आईएएस की कोचिंग कराने वाली इमारत के बेसमेंट में जो लाइब्रेरी थी, उसमें पिछले दिनों अचानक पानी भर गया और तीन भावी आईएएस उसमें डूब कर मर गए।

अपने साथी संजय कुमार सिंह ने अच्छा प्रश्न पूछा था कि मुद्दा ये होना था कि सड़क पर पानी भरा कैसे? लेकिन बहस किस बात पर हो रही है कि बेसमेंट में लाइब्रेरी क्यों थी? बहस इस बात पर हो रही है कि लाइब्रेरी में इलेक्ट्रानिक लॉक वाला दरवाजा क्यों था?

अब एक और दिलचस्प खोज और चल रही है कि किसी गाड़ी ने बैक करते हुए कुछ किया कि बेसमेंट में पानी भर गया। जब टीआरपी कम आती थी तब हम चर्चा करते थे कि आज हो सकता है कि लिफ्ट मैन की शामत आ जाए, क्योंकि टीआरपी कम आने की गाज तो किसी पर फोड़नी ही होगी। हो सकता है लिफ्ट वाला लिफ्ट ठीक से नहीं चलाता, इसलिए टीआरपी कम हुई हो।

टीआरपी का सीधा संबंध विज्ञापन और कमाई से है। जिस दूसरे चैनल की टीआरपी अधिक आती तो हम धीरे-धीरे ये भी फैलाना शुरू कर देते कि उसने पैसे खिला कर (सेटिंग करके) टीआरपी कंपनी को खरीद लिया है। इसी कारण उसकी टीआरपी इस बार बढ़ गई है।

हल्ला ये भी मचता कि जूनियर कर्मचारी किसी काम के नहीं। सभी को निकालना होगा, तभी ठीक होगा। और जब फिर नंबर वन हो गए तो संपादक अपनी पीठ ठोकने लगते, समोसा जलेबी खिलाने लगते – ये है संपादक की योग्यता।

राजेंद्र नगर देश की राजधानी में है। वहां कोचिंग सेंटर में बेसमेंट बिना अनुमति के बना है तो मालिक को फांसी दे दीजिए। लेकिन सवाल तो पूछिए कि सड़क पर पानी भरा क्यों? सीवर सिस्टम में खराबी के लिए दोषी कौन?

जिन पर गाज गिरनी थी उन्होंने एडवांस में अपनी खामियों का ठीकरा फोड़ना शुरू किया है बिल्डिंग वाले पर। कोचिंग वाले पर। इलेक्ट्रानिक दरवाजे पर। और अब उस गाड़ी वाले पर। मीठा मीठा मेरा, तीता तीता तेरा।

नोट- सुना है दोषी गाड़ी वाला मिल भी गया है। उसे फांसी होनी चाहिए।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और विभिन्न न्यूज चैनलों में कार्यरत रहे हैं।

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