चेन्नई | महिला पत्रकारों के समूह ‘नेटवर्क ऑफ वीमेन इन मीडिया, इंडिया (NWMI)’ ने देश भर के समाचार कक्षों (न्यूजरूम्स) में कार्यस्थल की स्थितियों में सुधार लाने के उद्देश्य से कुछ दिशानिर्देश पेश किए हैं. इनमें पत्रकारों, खासकर महिला पत्रकारों को लेकर सुरक्षा और समानता, व्यक्तियों और पेशेवरों दोनों के रूप में उनके अधिकारों की रक्षा के महत्व को मजबूती देने जैसी बातों को तवज्जो दिया गया है.
समूह द्वारा पेश किए गए सेट में, भारत में मीडिया संगठनों द्वारा कर्मचारियों के साथ व्यवहार और श्रम अधिकारों, जाति-लिंग और कामुकता जैसी व्यक्तिगत विशेषताओं पर आधारित अपमानजनक टिप्पणियों, LGBTQIA+ जैसे तमाम मुद्दे रखे गए हैं.
इन दिशानिर्देशों का एक प्रमुख पहलू कानूनी रूप से स्वीकृत घंटों का पालन करना है. व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 के अनुसार, पत्रकारों को लगातार चार सप्ताह तक 144 घंटे से अधिक काम नहीं करना चाहिए, प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन छुट्टी की होनी चाहिए. महिला समूह का दस्तावेज सुझाव देता है कि, इस सीमा से परे किसी भी काम को ओवरटाइम के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए.
दिशानिर्देश, उचित और नियमित वेतन के महत्व पर भी जोर देते हैं. भूमिका के लिए आवश्यक शिक्षा, कौशल और अनुभव को ध्यान में रखते हुए, मीडिया संगठनों से पत्रकारिता की पेशेवर प्रकृति को प्रतिबिंबित करने वाला अपेक्षित मुआवजा देने की सिफारिश भी करता है.
एनडब्ल्यूएमआई द्वारा पेश सेट में, कर्मचारियों को सालाना कम से कम 30 दिनों की सवैतनिक छुट्टी देने पर जोर दिया गया है. मानसिक स्वास्थ्य और मासिक धर्म अवकाश सहित स्वास्थ्य संबंधी अवकाश को भी कवर करते हैं, और मातृत्व, पितृत्व व शिशु देखभाल अवकाश के लिए कानूनी प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने की बात कही गई है.
महिला समूह कहता है कि, स्वतंत्र, पेशेवर मानव संसाधन विभागों की स्थापना पर जोर दिया जाए. ह्यूमन रिसोर्स के कर्मचारियों को अन्य कर्मचारियों की बदमाशी, उत्पीड़न जैसी हरकतों पर हस्तक्षेप करने का प्रशिक्षण देने की जरूरत पर जोर दिया गया है. साथ ही मूल्यांकन, पदोन्नति और वेतन वृद्धि के संबंध में मनमाने निर्णयों को रोकने की मांग की गई है.


