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सुख-दुख

एनडीटीवी का सीईओ मैं होता तो निधि जी को रोक लेता, काहे का रिटायरमेंट? अदानी को दिक्कत होती तो अलग बात है

ऋचा अनिरुद्ध-

पता चला कि कल निधि कुलपति मैम रिटायर हो गई हैं! उफ्फ! कितनी सारी यादें एक साथ ताज़ा हो गईं… टीवी पर उन्हें देखते थे… कभी सोचा नहीं था कि कभी उनसे मिलूंगी.. लेकिन जब न्यूज़ चैनल की पहली नौकरी Zee News में लगी तो मैम से मुलाक़ात हुई।

शुरुआत में उस शो पर काम किया जिसकी इंचार्ज निधि मैम थीं.. World View.. फिर जब एंकरिंग का समय आया तो मैं बचने लगी.. डरती थी…

एंकरिंग चार्ट निधि मैम बनाती थीं.. बहुत प्यार से समझातीं कि डर क्यों रही हो.. भूल जाओ कि लाखों लोग तुम्हें देख रहे हैं.. तुम बस ये सोच कर खबर बताओ जैसे अपनी मां को बता रही हो…

बस वो मंत्र हमेशा साथ रहा इसलिए कभी चीखने चिल्लाने वाली anchoring कर ही नहीं पाई। शायद उनकी नकल करते हुए ही चैनल 7 में मुझे साड़ी पहनाई गई।

जितने gracefully निधि मैम ने अपनी नौकरी की उतने ही gracefully वो retire हो गईं…. लेकिन मैम के साथ कल और आज के सैंकड़ों पत्रकारों की यादें जुड़ी हैं और वो सारी यादें मीठी और अच्छी हैं.. ये बहुत बड़ी बात है!


सौमित्र राय-

कोई 27 साल पुरानी बात है। दिल्ली में भास्कर ब्यूरो में पदस्थ था। जी न्यूज के नोएडा दफ्तर में कुछ दोस्तो से मिलने अक्सर जाना होता था। चाय की चुस्कियां, कहकहे और गॉसिप्स–कौन कहां, किस पोस्ट पर कितनी सैलरी में आया…वगैरह।

उन दिनों एक लड़की चर्चा में थी। नाम निधि कुलपति। टीवी में नई आई थी। दोस्तों के मुताबिक काफी एटीट्यूड वाली थीं। लंदन से पत्रकारिता सीखकर, स्काई न्यूज में ट्रेनिंग लेकर तबेला चैनल में आई लड़की का एटीट्यूड तो वाजिब है।

इससे उलट, दफ्तर के टीवी स्क्रीन पर निधि को जब भी सुना तो एक शांत, स्थिर, गंभीर और समाचारों को मानवीय संवेदना के साथ रखते पाया।

भाषा में भाव झलकते थे। दूरदर्शन का प्रभाव दिखता रहा–जहां ढाई साल मैंने भी बिताए। वह गैर कारोबारी मीडिया था। कोई छिपा एजेंडा नहीं, खबरों की भाषा को तोड़–मरोड़कर मिलावटी रूप से पेश करने की होड़ नहीं।

निधि से कभी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन दोस्तों की समीक्षाओं के विपरीत उन्हें टेलीविजन स्क्रीन पर हमेशा एक सौम्य, शालीन और सुसंस्कृत रूप में पाया।

दूरदर्शन का दौर खत्म हुआ, लेकिन उस दौर की यादें निधि के प्रस्तुतीकरण में हर बार झलकीं।

एनडीटीवी में प्रनॉय के बाद यह छवि निधि में नजर आती थीं। निधि कुलपति का कल आखिरी कार्यक्रम था। कल और आज के बीच एक महीन सी रेखा मिट गई।

कल के आखिरी शो का वीडियो देखें–पता चलेगा कि वह एक सुनहरी रेखा थीं। बेशकीमती। आज लग रहा है कि उस ज़माने की पत्रकारिता, उन मूल्यों, प्रतिबद्धताओं और शब्दों के संतुलन का दौर अब खत्म हुआ।

आज जब माइक पकड़े नौसिखिए युवाओं को चिल्लाते और भाषाई मर्यादा को संवेदनाहीन तरीके से तार–तार करते देखता हूं तो लगता है, पुराना दौर अब शायद ही लौटेगा।


नदीम अख्तर-

निधि कुलपति शोर शराबे से दूर एक शालीन पत्रकार हैं, पर रिटायरमेंट? पत्रकार भी रिटायर होता है कभी? राजदीप सरदेसाई और प्रभु चावला जैसे कई वरिष्ठ पत्रकार अभी सक्रिय हैं। मुझे नहीं पता कि ndtv की नौकरी पूरी करने के बाद निधि यूट्यूब पर सक्रिय होंगी या फिर किसी और रूप में अपनी सक्रियता बरकरार रखेंगी पर पत्रकार, डॉक्टर, वकील, नेता और खिलाड़ी, ये कभी रिटायर नहीं होते।

इनमें से शुरू के तीन लोग नौकरी से मुक्त हो सकते हैं, वो अलग चीज़ है। नेता और खिलाड़ी के लिए अलग कैटेगरी है। वो रिटायर नहीं होते, संन्यास ले लेते हैं। लेकिन संन्यास लेकर जंगल नहीं जाते। कान घुमा के पकड़े रहते हैं। और खिलाड़ी तो संन्यास ले भी लेते हैं। नेता लोग वो भी बहुत मुश्किल से लेते हैं। और जब नहीं ले रहे होते हैं तो उन्हें जबरदस्ती मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया जाता है।

अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक दफा रिटायरमेंट का पुरजोर विरोध करते हुए कहा था – ना टायर्ड, ना रिटायर्ड। इस पे हिंदुस्तान अखबार की प्रधान संपादक रहीं श्रीमती मृणाल पांडे जी ने भी अपने अनुभव बांटे थे। उनके लिखे का स्क्रीनशॉट लगा रहा हूं।

मैं खुशकिस्मत रहा कि हिन्दुस्तान अखबार में काम करते हुए मुझे मृणाल जी का बहुत स्नेह, आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिला। तो शुरुआती बात पे लौटते हैं। ये मत कहिए कि निधि रिटायर हो गईं। उन्होंने ndtv की अपनी नौकरी पूरी कर ली। वैसे ndtv वाले भी अभागे हैं।

आजकल कौन हैं वहां CEO? हां, आजतक वाले राहुल कंवल। अगर मैं सीईओ होता तो निधि को रोक लेता। काहे का रिटायरमेंट? एंकर तो हज़ार मिल जाएंगे लेकिन निधि जैसा पुराना और शालीन चेहरा कहां मिलेगा? हां, अगर निधि के काम करने के तरीके से ndtv के अदानी वाले निजाम को परेशानी हो रही थी या निधि को नए निजाम से परेशानी हो रही थी, तो अलग बात है।

वैसे पुराने ज्यादातर लोग ndtv में टिके हुए हैं। कुछ क्रांतिकारी टाइप लोग भी। पत्रकारिता के अलावा जीवन भी चलाना है। हर कोई नौकरी छोड़ के यूट्यूबर नहीं बन सकता। ये भी एक संयोग है कि नौकरी छोड़कर यूट्यूबर बनने वाले पत्रकारों में सबसे बड़ी तादाद ndtv के पत्रकारों की है।

निधि कुलपति के रिटायरमेंट का वीडियो यहां देखें- निधि कुलपति विदाई

https://www.facebook.com/share/v/1X9c4kEzmE

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