ऑन लाइन बाजार या या झूठ का कारोबार!

वाराणसी : दावा सबसे अच्छा और सबसे सस्ता बेचने का, दावा ग्राहक की इच्छाओं का पूरा ख्याल रखने का और दावा 48 घंटे के अन्दर ग्राहकों की शिकायतों, परेशानियों के निवारण का। दावे इतने  पर हकीकत ये कि इनके झूठ बेहिसाब।

आज की वर्चुअल दुनियां में चमकते विज्ञापनों के सहारे ज्यादा से ज्यादा ग्राहक बटोरने या फिर ग्राहक को ट्रैप कर फंसाने को अगर आन लाइन बाजार कहें तो इसमे कुछ भी गलत नहीं। लगभग एक महीना होने को है, मैं इस आन लाइन बाजार के झूठ के खेल को देख रहा हूं। 

कहते है, आजमाया हुआ नुस्खा कभी बेकार नहीं होता, सो आजमाने के लिए महीने भर पहले बीते 23 मार्च को askmebazar.com पर आर्डर दे मारा। मेरे मेल पर आर्डर का कन्फरमेशन भी आ गया। बताया गया कि मेरा आर्डर संख्या ab1742377 है। एक सप्ताह के बाद मेरे घर पर पैकट भी पहुंच गया। 123 रूपये का बिल चुकाकर पैकेट खोला तो मेरे हाथ में अत्यंत घटिया क्वालिटी का dk sunglass था, a askmebazar.com ने  green avitor sun glass की जगह dh txg black avitor sun glass भेज दिया था। 

वादा खिलाफी की ये पहली किश्त थी। तब से लेकर आज तक दर्जनों झूठ और वादा खिलाफी की अनगिनत किश्ते askmebazar.com की ओर से मुझे मिल रही हैं। कभी मैसेज भेजा गया कि जल्द ही आपकी समस्या का हल हो जायेगा, मेरे मोबाइल पर दर्जनों फोन कम्पनी की ओर से आए। फोन करने वाले ने मुझसे मेरा बैंक एकाउन्ट नंबर मांगा और कहा कि जल्द ही हमारा आदमी आपके घर से पैकट ले जायेगा और दो-तीन दिनों में आपके एकाउन्ट में आपका पैसा भी पहुंच जायेगा। दो-तीन दिन क्या, महीना बीतने को है, इस बीच कम्पनी की ओर से  दर्जनो से ज्यादा एसएमएस मेरे मोबाइल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा कर मुझे आश्वासनों का झूठा घूट पिला रहे हैं। 

48 घंटे में समस्यां के निस्तारण का दावा फुस्स होता भी दिख गया और ये भी समझ में आ गया कि अरबों के इस देश में करोड़ों उपभोक्ताओं से झूठे वायदे कर उन्हें घटिया समान बेच करोड़ों में कमाने का आन लाइन बाजार का धंधा खूब चल निकला है। इस झूठ पर न तो किसी का अंकुश है, और न ही इसका कोई अंत। ले-देकर इसका शिकार उपभोक्ता को होना है, और रोना भी है। हाथ मल-मल कर पछताना है, ठग लिए जाने पर खुद को ये कहकर समझाना है, जो हुआ सो हुआ। क्यों कि सामने वाला अदृश्य है। रंज इस बात को लेकर है कि उपभोक्ता आज भी लाचार और बेबस है और उपभोक्ताओं को लूटने वाली डाट काम कंपनिया अपने काम को बेखौफ अंजाम देती जा रही हैं। … इस पर अंकुश कैसे और कौन लगायेगा, इसका जबाव फिलहाल शून्य में है। फिलहाल एक छोटे से प्रयोग से ये तो समझ में आ गया कि कैसे आम आदमी के अधिकारों की लूट की छूट का सर्वाधिकार को बाजार ने अपने नाम पेंटेट करा लिया है। सावधान रहकर या फिर जागरूक बनकर इस लूट से उपभोक्ता लड़ें कैसे, यही मेरा सवाल है? जवाब की खोज में हूं। मदद किजिए…….।

वराणसी के युवा पत्रकार एवं लेखक भास्कर गुहा नियोगी से मोबाइल संपर्क : 9415354828

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं
  • भड़ास तक कोई भी खबर पहुंचाने के लिए इस मेल का इस्तेमाल करें- bhadas4media@gmail.com

Comments on “ऑन लाइन बाजार या या झूठ का कारोबार!

  • aap sabhi jo online samaan kharid rehe ho ………aap sabhi lallu ho…..!!!
    jis online e commerce market mai indian gus gaya weha baimani aur jaalsaaji shuru hai….kuch ka kuch milega….
    isliye sabhi ka shubhchintak ho kar mai yeh vinti kerta hu ki online market mai sirf aur sirf videshi website se samaan kharide payment protection plus satisfaction dono milenge….. ebay to apka paisa apne pass rekhti hai aur jab tak aap samman ka satisfaction report ebay per nahi doge….VENDER KO PAYMENT RELEASE HI NAHI HOGA….SAMJHEbecoz videsi companiya kanoon ke darr se and apne naam ko leker sensitive hai…..indian e commerce companies like snapdeal.com, askmebazaar.com, flipcart.com etc.!!! sochti hai ki unka kuch nahi bigedega…..!!
    research kariye sabse jyada shikyat apko indian e commerce comanies ki hi milengi…
    try amazon.com and ebay.com….and you will never be disspointed…….

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *