प्रेस क्लब ऑफ इंडिया से बड़ी खबर है. पीसीआई के सदस्य रहे पंकज यादव की सदस्यता बहाल कर दी गई है. सदस्यता बहाल करने का ऑर्डर अदालत से आया है. बोलने की आजादी छीनने के खिलाफ पंकज जी ने बड़ी लड़ाई जीती है.

भ्रष्ट और तानाशाह प्रेस क्लब प्रबंधन और क्लब पर काबिज माफिया एक और लड़ाई हार चुके हैं. पंकज यादव की सदस्यता कोर्ट द्वारा तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया गया है. कहा जा रहा है कि अब पीसीआई में व्याप्त भ्रष्टाचार और तानाशाही का पतन शुरू हो चुका है. पत्रकारिता अभी ज़िंदा है.
इस मसले पर द हिंदू के पूर्व वरिष्ठ पत्रकार निर्निमेष कुमार भड़ास से हुई बातचीत में कहते हैं कि, ‘ये उस संस्था के खिलाफ बोलने की बड़ी जीत है जो संस्था बोलने की आजादी की अगुवाई करती है. पिछले 12 साल से बोलने पर पाबंदी लगाई जा रही है. सवाल उठाने पर तानाशाही दिखाई जा रही है. क्वेश्चन पूछने वालों का गला घोट दिया जाता है. उनकी सदस्यता खत्म कर दी जाती है.
सवाल पूछने पर मुझे खुद क्लब की सदस्यता से बाहर कर दिया गया. भड़ास4मीडिया के संस्थापक-संपादक यशवंत सिंह को सवाल उठाने के चलते PCI से बाहर कर दिया गया.
पंकज यादव, ट्रेजर सुदीप कुमार सेन, चंदन यादव इत्यादि कई पत्रकारों को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने का खामियाजा भुगतना पड़ा है.
आज जो पंकज यादव की जीत हुई है, वह बोलने की आज़ादी के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जाना चाहिए. आज की जीत तानाशाही, भ्रष्टाचार के गाल पर जोरदार तमाचे के रूप में याद करना चाहिए.
हम बोलने और सवाल पूछने के लिए आज़ाद हैं. वो सरकार हो या सरकार का अन्य कोई अंग. हमारी आज़ादी कोई नहीं छीन सकता! और सबसे बड़ी बात ज़ो आज़ादी के अधिकार के पैरोकार बनकर बैठे हैं वही लोग बोलने की आज़ादी और कलम पर पहरा लगाएंगे तो फिर उम्मीद किससे रखी जाएगी? और क्यों रखी जाएगी?’
हालांकि, इस सिलसिले में पंकज यादव जी ने कुछ भी टिप्पणी करने से फिलहाल मना किया है. उन्होंने कहा कि, ‘अभी कोर्ट का ऑर्डर आया है. देखते हैं आगे क्या होता है.. बाद में आपसे विस्तार से चर्चा की जाएगी.’ अदालत में पंकज यादव की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर यादव ने उनका पक्ष रखा था.
बता दे कि, पंकज यादव बनाम प्रेस क्लब ऑफ इंडिया व अन्य के नाम से दाखिल इस केस नंबर 56730/2026 में सीजे-01, एमएम/पीएचसी, अमरदीप कौर की अदालत ने पत्रकार पंकड यादव के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी PCI सदस्यता तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया है.
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