भोपाल। मलेशिया में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के पत्रकार अंकित पचौरी बतौर फेलो शामिल हुए। दुनिया के 135 देशों से आए 1500 से अधिक खोजी पत्रकारों के बीच अंकित की उपस्थिति जनसरोकार आधारित पत्रकारिता के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
अंकित पचौरी मध्य प्रदेश के ऐसे पत्रकार हैं, जिन्होंने अपने 12 वर्षों के पेशेवर करियर में दलित, आदिवासी, सामाजिक न्याय, जलवायु और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर लगातार, संवेदनशील और साहसिक रिपोर्टिंग की है। वे भास्कर, नई दुनिया, पत्रिका और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। वर्तमान में वे द मूकनायक में उप संपादक हैं।
अंकित पचौरी की चर्चित पुस्तक ‘आदिवासी रिपोर्टिंग’ आदिवासी मुद्दों पर कार्यरत युवा रिपोर्टरों और मीडिया विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक मानी जाती है। यह किताब उनकी वर्षों की जमीनी रिपोर्टिंग और अनुभव का दस्तावेज है, जिसकी देशभर में खूब सराहना हुई है।
अंकित की कई महत्वपूर्ण रिपोर्टें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चित रही हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित प्रकाशन ‘निमन रिपोर्ट्स’ में उनकी दो महत्त्वपूर्ण स्टोरीज़ को प्रमुखता से स्थान मिला, एक दलित महिला की लिव-इन रिलेशनशिप में जन्मी बेटी के शिक्षा अधिकार पर उनकी रिपोर्ट दूसरी आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर आधारित रिपोर्ट इन रिपोर्टों ने उन्हें सामाजिक न्याय और मानवाधिकार पत्रकारिता की प्रमुख आवाज़ के रूप में स्थापित किया है।
दुनियाभर के खोजी पत्रकारों के सम्मेलन में फेलो के तौर पर चयन होना अंकित पचौरी के पेशेवर कौशल, जमीनी अनुभव और जनहितकारी पत्रकारिता के प्रति समर्पण की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है।
अंकित पचौरी का कहना है, “GIJC25 मेरे पत्रकारिता जीवन का एक ऐतिहासिक अवसर रहा। दुनिया भर के खोजी पत्रकारों के साथ सीखने, विचार साझा करने और नई तकनीकों को समझने का यह अनुभव मेरी रिपोर्टिंग को नई दिशा देगा।”
मध्य प्रदेश में दलित और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों पर लगातार और गहराई से रिपोर्टिंग करने के कारण अंकित पचौरी को एक विश्वसनीय और जनपक्षधर पत्रकार माना जाता है। उनकी पत्रकारिता हमेशा संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और हाशिये पर खड़े समुदायों के अधिकारों को केंद्र में रखती है।
जीआइजेसी में उनकी सहभागिता न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी मुद्दों को वैश्विक मंच पर ध्यान में लाने का अवसर भी, जिन पर अंकित पचौरी वर्षों से लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं।



