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सियासत

पत्रकार अजीत अंजुम और सूर्य प्रताप सिंह के बीच ट्विटर पर लात-जूता जैसी नौबत क्यों आ गई?

जीत अंजुम ने ट्वीट कर लिखा कि, “मिस्टर सूर्य प्रताप सिंह, आप जैसे लीचड़ आदमी के लिए मैं कुछ लिखना नहीं चाहता था लेकिन अब आपने ये सब लिख दिया तो जवाब देना जरूरी हो गया है.

आप वही आदमी हैं न, जिसके मैसेज का मैं जवाब नहीं देता था तो दुखी होकर मुझे DM करता था.
आपकी मेमोरी लॉस हो गई हो तो आपके मैसेज का स्क्रीन शॉट लगा रहा हूं. आपको मेरी तरफ से भाव नहीं मिलने की तकलीफ इस मैसेज में दिख रही हैं. आप भी पढ़ें और जनता भी पढ़े.

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आपको लिफ्ट नहीं देता था या आपको जवाब नहीं देता था तो कितने दुखी होते थे. मुझे अंदाजा था कि आप भले ही ऊंचे पदों पर रहे लेकिन आदमी आप लीचड़ हैं. आपकी पूंछ कहीं दबी है तो खूब भक्ति कीजिए. मैं पहले भी यही था. आगे भी यही रहूंगा.

आपने जितनी चाटुकारिता अखिलेश और विपक्ष की है और ‘बाबा तो गयो’ के नाम पर जो नौटंकी की है, सब हमने देखा है. रही बात इस वीडियो की, तो आसाराम के चेलों ने फर्जी केस कर रखा है, उसका जवाब कोर्ट में दिया जा रहा है.

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रही बात इस वीडियो की, तो कोई पत्रकार नहीं हैं. सब आसाराम के चेलों के साथ आते हैं ताकि तमाशा करके कुछ वायरल कर सकें. अब आप लिखिए और मैं आपको कायदे से जवाब दूंगा.”

ये पूरी बात शुरू हुई अजीत अंजुम के उस वीडियो से जिसमें उन्हें कुछ हुड़दंगी ट्रोल कर रहे हैं. इस वीडियो पर सूर्य प्रताप ने लिखा, “स्थानीय पत्रकार ने चाय पकौड़ी खाने को रुके, नफरती यूट्यूबर की हुर्र हुर्र कर दी, दुखती रग पर हाथ रख दिया..

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“कितना पैसा मिला था, लड़की (बेटी) को बदनाम करने के लिए?” नफ़रत बोओगे तो नफ़रत ही तो मिलेगी, मेरे भाई. लेकिन अफ़सोस है, इतना नहीं रपटाना चाहिए था, चाय पकौड़ी तो खा लेने देते, मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ.

इनकी मजबूरी भी समझना चाहिए, यूट्यूब के टुकड़ों व मोदी नफ़रत से ही तो परिवार का पेट भरता है.”

कुछ और लोग भी इस बहस में कूद चुके हैं..

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अशोक कुमार पांडेय-
“आज ajitanjum भाई को छेड़कर अंधेरा प्रताप सिंह ने अच्छा नहीं किया. मतलब इनबॉक्स में छिछियाना भी खुलकर सामने आ गया। आत्मा का सौदा करने वालों को थोड़ा कंट्रोल करना चाहिये. हाँ, थोड़ी पब्लिसिटी ज़रूर मिल जाएगी, दरबार में औक़ात बढ़ाने की कोशिश में काम आएगी. ख़ैर”

श्याम मीरा सिंह-
“आप पत्रकार अजीत अंजुम जी की विचारधारा, वीडियोज की आलोचना कर सकते हैं. मगर मैंने निजी तौर पर उन्हें एक खुद्दार इंसान के तौर पर पाया है. थोड़े से दबाव और पैसे से बिक जाने वाले सूर्या प्रताप सिंह जैसे बिकाऊ लोग उनके पैरों की धूल नहीं हैं. मुझे ये पहले ही ब्लॉक कर गये. इन्हें मैंने कभी बदतमीज़ी से बात नहीं की थी. सिर्फ़ बिकाऊ बोल दिया था. बिकाऊ को बिकाऊ ही कहा जाएगा.”

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इससे आगे कुछ और जानना हो तो अजीत अंजुम के एक्स अकाउंट पर जाकर देख सकते हैं… आज वे ट्रेंड भी कर रहे हैं.

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