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उत्तर प्रदेश

स्वतंत्र पत्रकार सत्यप्रकाश भारती की थाने में पिटाई, लखनऊ पुलिस पर लगे गंभीर आरोप

खनऊ के गोमतीनगर में भारी बरसात के बीच चर्चा में आया छेड़छाड़ कांड को लेकर लखनऊ पुलिस ने कुछ युवकों को आरोपी बनाया था. घटना 31 जुलाई की थी. इनमें से एक आरोपी पवन यादव का दावा है कि वह बेगुनाह हैं. इस मामले की रिपोर्टिंग करने के दौरान एक स्वतंत्र पत्रकार ने पुलिस पर मारपीट करने का आरोप लगाया है.

दरअसल, डिजिटल आउटलेट द मूकनायक के पूर्व पत्रकार सत्यप्रकाश भारती ने आरोपी युवकों से मुलाकात की थी. मुलाकात में कई युवकों ने पत्रकार को बताया कि पुलिस ने उन्हें बेवजह जेल भेज दिया है.

एक अन्य आउटलेट के लिए ये स्टोरी कवर करने भारती, कुछ युवकों की पेशी वाले दिन डीसीपी ऑफिस पहुंचे थे. पत्रकार का कहना है कि वह पुलिस से इजाजत लेकर डीसीपी के कमरे के अंदर गए थे.

पत्रकार भारती का कहना है कि, “मैंने पवन यादव और अरबाज का नाम लेकर उन्हें बेगुनाह कहा तो पुलिस अधिकारी भड़क गए. उन्होंने मुझसे कहा तुम खबर का पोस्टमार्टम क्यों कर रहे हो. पुलिस की कार्रवाई पर सवाल क्यों उठा रहे हो, तुम एजेंडा चलाने वाले पत्रकार हो. तुम समाजवादी पार्टी के लिए काम करते हो.”

वहीं, इस मामले में लखनऊ पुलिस ने भी एक बयान जारी किया है. जिसमें कहा गया है कि, 17 अगस्त को कार्यालय में जन सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति (सत्यप्रकाश भारती) चोरी चुपके से अपने मोबाइल से स्टिंग ऑपरेशन करते हुए बातचीत को अवैध तरीके से रिकार्ड कर रहा था, तभी वहां उपस्थित लोगों द्वारा आपत्ति हुई. भारती खुद को पत्रकार बताते हुए आक्रामक हो गए. नीचे पढ़ें पुलिस का बयान..

इसके बाद जनसुनवाई बाधित होने की बात कहकर पुलिस ने भारती पर बीएनएस की धारा 170/126 व 135 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत कर लिया. पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि पत्रकार के साथ किसी भी तरह की मारपीट व गाली गलौज नहीं किया गया है.

जबकि पत्रकार ने आरोप लगाया है, “डीसीपी ऑफिस में कैमरा लगा है, ऐसे में लखनऊ पुलिस द्वारा स्टिंग की बात कहना मूर्खता से कम नहीं है. डीसीपी ने मेरा मोबाइल पीआरओ से लिया, उसे फार्मेट करने को बोला. मेरा चश्मा निकाल लिया और पीटने को बोला गया लेकिन बुजुर्ग बैठे थे इसलिए वहां हाथ नहीं लगाया. पहले क्राइम टीम को बुलवाया गया. जब वे नहीं आए तो थाना गोमतीनगर से पुलिस बुलाई गई. थानेदार, राजेश त्रिपाठी मुझे धक्के मारते हुए डीसीपी कार्यालय से बाहर लाए और गाड़ी में पीछे बैठाकर पेट, मुंह और जबड़े पर घूसा मारा. फिर रास्ते भर पीटते हुए थाने ले गए.”

पत्रकार का आरोप है कि पिटाई के बाद रात में जब अचानक थाने में भारती की तबियत बिगड़ गई तो पुलिस ने घबराकर उन्हें छोड़ दिया, जिसके बाद भारती अस्पताल में एडमिट हैं.

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