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आर्थिक संकट से जूझ रहे पर्ल्स ग्रुप के सभी चैनल ठप, गबन के आरोपी निदेशक की वापसी से कर्मचारियों में नाराज़गी

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कहते है डूबती नाव को बचाना बहुत ही मुश्किल होता है और कुछ ऐसा ही इनदिनों हो रहा है पर्ल्स ग्रुप के साथ। पर्ल्स ग्रुप की शुक्रवार और बिंदिया जैसी नामी मैगज़ीन बंद होने के बाद अब पी7 की बारी है। चैनल इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहा है क्योंकि सेबी के चाबुक के बाद पर्ल्स ग्रुप को निवेशकों का 50000 करोड़ रुपये की रकम चुकानी है। चैनल के कर्मचारियों ने बगावती सुर अपनाते हुए जुलाई से सैलरी न मिलने पर मामले को लेकर लेबर कमिश्नर का दरवाज़ा खटखटाया है और अब सैलरी टाइम से न मिलने पर चैनल के कर्मचारियों ने चैनल के काम-काज को ठप करते हुए चैनल को फ्रिज कर दिया।

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कहते है डूबती नाव को बचाना बहुत ही मुश्किल होता है और कुछ ऐसा ही इनदिनों हो रहा है पर्ल्स ग्रुप के साथ। पर्ल्स ग्रुप की शुक्रवार और बिंदिया जैसी नामी मैगज़ीन बंद होने के बाद अब पी7 की बारी है। चैनल इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहा है क्योंकि सेबी के चाबुक के बाद पर्ल्स ग्रुप को निवेशकों का 50000 करोड़ रुपये की रकम चुकानी है। चैनल के कर्मचारियों ने बगावती सुर अपनाते हुए जुलाई से सैलरी न मिलने पर मामले को लेकर लेबर कमिश्नर का दरवाज़ा खटखटाया है और अब सैलरी टाइम से न मिलने पर चैनल के कर्मचारियों ने चैनल के काम-काज को ठप करते हुए चैनल को फ्रिज कर दिया।

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पर्ल्स ग्रुप के तीन चैनल है पी7, पर्ल्स हरयाणा और पर्ल्स एमपी सीजी यह सब बंद पड़े है। इस तरह से चैनल के मैनेजमेंट ने हालांकि कर्मचारियों को सैलरी का आश्वासन दिया लेकिन कोई भी नहीं माना। हालत ये है की तीनों चैनल बंद है और ऑफ एयर है। गौरतलब है पर्ल्स ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू ने चैनल का कामकाज़ देख रहे निदेशक केसर सिंह को चैनल के कामकाज से अलग कर दिया था लेकिन चार दिन बाद ही केसर सिंह और शरद दत्त फिर से वापिस आ गए इसी बात को लेकर कर्मचारियों के बीच नाराज़गी है। बताया ये भी जाता है की केसर सिंह के ऊपर करोड़ों रुपये के गबन का भी आरोप लगा है जिसके बाद केसर सिंह को चलता कर दिया गया था लेकिन वफादारी की दुहाई और मालिकों के पैर पड़ने के बाद केसर वापिस आ गए और अब हालात ये है की चैनल के अन्दर बगावती तेवर दिखाई देने लगे है।

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एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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