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उत्तर प्रदेश

पीलीभीत कलेक्ट्रेट में बाबू की खुली रंगदारी, डीएम दफ्तर बना वसूली का अड्डा

प्रशांत वर्मा-

पीलीभीत- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के सबसे संवेदनशील दफ्तर – कलेक्ट्रेट में तैनात वरिष्ठ लिपिक वीरेंद्र सिंह पर गंभीर आरोपों ने प्रशासन की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत में दावा किया गया है कि चपरासी से बाबू बने वीरेंद्र ने डीएम चैंबर के बगल में ही भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग का अड्डा बना रखा है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कर कर कार्रवाई करने को कहा है। डीएम ने जांच एडीएम (एफआर) को दे दी लेकिन अब तक कोई कार्रवाई होना तो दूर बल्कि जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी यानि शिकायत ठंडे बस्ते में है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक—

  • हैसियत और चरित्र प्रमाणपत्र पर 2% कमीशन तय।
  • खाद्य टीम से छापे डलवाकर व्यापारियों से मोटी रकम वसूली।
  • पटल पर किसी और कर्मचारी को टिकने नहीं देते, फर्जी शिकायत कर हटवाते।
  • सहयोगी ब्रह्मप्रकाश के जरिए रिश्वत का लेन-देन।

इन आरोपों ने न केवल वीरेंद्र सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं बल्कि जिलाधिकारी की कार्यप्रणाली और ईमानदारी की छवि पर भी गहरा धब्बा लगा दिया है।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि—

  • किसी मजिस्ट्रेट से वीरेंद्र सिंह की पत्रावली और प्रमोशन की गहन जांच कराई जाए।
  • तत्काल प्रभाव से उन्हें महत्वपूर्ण पटल से हटाकर निलंबित किया जाए।

❝सभी आरोप झूठे हैं❞ – वीरेंद्र सिंह

वीरेंद्र सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि वह शिकायतकर्ता को पहचानते तक नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। “लंबे समय से तबादले की मांग कर रहा हूँ, लेकिन इस तरह की झूठी शिकायतें केवल मेरी छवि धूमिल करने के लिए की जा रही हैं।”

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1 Comment

1 Comment

  1. Richa

    September 25, 2025 at 10:57 am

    Jisne bhi yeh complaint ki hai bilkul sahi hai humne haisiyat banbai 35lakh ki inhone humse 25000rs. Liye aur jabki hamari property par loan bhi registry bank me jama hai tab bhi haisiyat bana di viderndra babu ne paise lekar

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