यूपी के गाजियाबाद में एबीपी न्यूज़ के पत्रकार शक्ति सिंह ने बीते दिनों पुलिस कमिश्नर से जान का खतरा बताया था. अब पुलिस ने उक्त पत्रकार पर एर होटल से खाना खाने और बिल न चुकाने का आरोप लगाया है. जिसका पत्रकार ने भी जवाब दिया है. पहले पढ़ें पुलिस का आरोप और उसके बाद पत्रकार शक्ति सिंह ने कहा लिखा है उसे भी देखें….
उक्त ट्वीटकर्ता के विरूद्ध होटल आर0के0 रेजीडैन्सी प्रहलादगढी इन्दिरापुरम गाजियाबाद के मालिक द्वारा आरोप लगाये गये कि इनके द्वारा होटल में आकर खाना खाया गया। ट्वीटकर्ता खाने के उपरान्त बिल का भुगतान करने को तैयार नहीं हुए। मैनेजर के कहने के उपरान्त बिल का भुगतान कर दिया गया। इससे क्रोधित होकर ट्वीट कर्ता द्वारा स्थानीय चौकी प्रभारी से सम्पर्क किया गया। चौकी प्रभारी द्वारा होटल मैनेजर को तत्काल पकड़कर थाने पर ले जाया गया और होटल मालिक पर बिल के पैसे वापिस करने का दवाब बनाया गया।
जिसके फलस्वरुप होटल मालिक ने पेटीएम के माध्यम से बिल के पैसे अगले दिन वापस कर दिए।
इन आरोपों की जाँच की गयी तो दौराने जाँच आरोप सत्य पाये गये। जिसकी पुष्टि होटल में लगे सी0सी0टी0वी0 कैमरे की फुटेज, पेटीएम पेमेंट हिस्ट्री तथा होटल में मौजूद स्टाफ के कथन तथा थाने के अभिलेखों से हुई। जाँच में चौकी प्रभारी प्रहलादगढी थाना-इन्दिरापुरम गाजियाबाद दोषी पाये गये तथा चौकी प्रभारी के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही अमल में लायी गयी।
क्योंकि ट्वीटकर्ता द्वारा ‘बेबाक खबर बेबाक अन्दाज’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप चलाया जाता है जिसमें अनेक अधिकारी और कर्मचारी जुड़े हुए हैं। इस व्हाट्सएप ग्रुप पर इन अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी का फायदा उठाकर ट्वीटकर्ता आम नागरिकको एवं व्यवसायिकों पर दबाव बनाकर कार्य कराता है। इसीलिए पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को ट्वीटकर्ता के व्हाट्सएप ग्रुप को तत्काल छोड़ने के निर्देश दिए गए।
शक्ति सिंह-
गाजियाबाद पुलिस का झूठ। एक्स पर अपना बचाव। दो महीने पहले की झूठी कहानी सच बनाने की कोशिश…
एक युवक अपने घर से लापता हो जाता है रात्रि में 3 बजे अपनी माता को कॉल कर कहता है कि मम्मी आजके बाद में आपको नहीं मिलूँगा उसके बाद अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लेता है।
सुबह उसकी मम्मी का फ़ोन मेरे पास आता है बेटा रात से लक्की ग़ायब है और मुझे अब डर लग रहा है।
में एसएचओ साहिबाबाद के पास जाता हूँ की रात से ये बालक ग़ायब है, शायद एसएचओ ने उसी दिन चार्ज लिया था उसने कहा कि मुझे उसका नंबर दे दो मैं पता करता हूँ।
फिर शाम तक मालूम चला कि वो एक होटल में है मैं उसे लेने गया कि तू अपने घर चल कुछ शर्म कर उसने होटल के सभी पैसे दिये हुए थे मैनेजर उसके साथ बदतमीज़ी कर रहा था, हमने ये बात पुलिस को बताई कि इस तरह से मैनेजर बदतमीज़ी कर रहा है, और उनका उल्टा सीधा बिल देकर अपने घर चले गये।
बाद में मालूम चला कि चौकी इंचार्ज ने आकर उनका रजिस्टर चेक किया तो कुछ बांग्लादेशी उस होटल में ठहरे हुए थे, बिना पुलिस को बताये। चौकी इंचार्ज शायद मैनेजर को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गया।
अगले दिन लक्की के पास होटल मालिक का फ़ोन आया कि हमारे मैनेजर ने तुमसे जो बदतमीजी की है उसके लिये सॉरी और जबरन कुछ पैसे पेटीएम कर दिये शायद वो पैसे जो उन्होंने लक्की से जबरन वसूली किए थे क्योंकि वो अपने घर से छिपा हुआ था, तो शायद इन लोगो ने फ़ालतू लिए थे।
हम योगी आदित्यनाथ जी से अपील करते है कि जो हम लिख रहे है इस कथन की जाँच किसी उच्चस्तरीय अधिकारी से करवायें।
क्या किसी जानने वाले को ढूँढने के लिए दर-दर भटकना अपराध है।
ट्विटर पर ये मनगढ़ंत कहानी उल्टे रूप में डाल अपना बचाव करने वाली गाजियाबाद पुलिस को मैं ये भी बताना चाहता हूँ की मेरे पास वो एप्लिकेशन भी है जो आप लोगो ने उस चोकी इंचार्ज के ख़िलाफ़ ली थी।
ये बताओ कि इतने दिन पुरानी कहानी अब कैसे याद आई। दिन में शराब पीने पिलाने वाले साहब को भी एक बार पढ़वा दीजिए ये कहानी।
इसकी जाँच अब मुख्यमंत्री जी को ही स्वयं करनी चाहिए।
मैंने पहले ही लिखा था कि गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर की नीयत मेरे प्रति ठीक नहीं और वो मुझे किसी भी षड्यंत्र में फँसा सकते है।
पुलिस अधिकारी की सोच इस स्तर तक गिर सकती है ये हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
कृपा कर डीजीपी यूपी साहब पुलिस ने जो आरोप लगाये है उसकी निष्पक्षता से आप जाँच करें हमें आप पर पूर्ण भरोसा है।


