काम बोलता है : चार घंटे तक इमरजेंसी में कराहती रही बूढ़ी मां, बेटे को जबरन थाने में बिठाये रखा

वाराणसी। यूपी में चल रहे चुनावी दंगल में भले ही ‘काम बोलता है’ का धुन आम मानुष के लिए सुशासन होने का दावा भर रहा हो पर जमीन पर थानों में वर्दी की दबंगई के आगे आम आदमी का गूंगापन और लाचारी बोल रहा है। बीते रविवार यही नजारा देखने को मिला जब अपनी 92 वर्षीय बूढ़ी मां माया देवी को उन्हीं की बहू कंचन और उसके मामा मंगला प्रसाद ने मार-पीट कर घायल कर दिया। बेटा घनश्याम जायसवाल ने तत्काल इसकी सूचना 100 नम्बर पर डायल कर दी और पुलिस से मदद मांगी तो मौके पर पहुंची पुलिस ने समझौते की बेशकीमती सलाह देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। 

घबराया बेटा जब एम्बुलेंस में चोटिल मां को लेकर कबीरचौरा स्थित मण्डलीय चिकित्सालय पहुंचा तो वहां मौजूद डाक्टर ने मामले को पुलिस केस बताकर पहले एफआईआर करने की सलाह दी। परेशान घनश्याम मां को वहां इमरजेंसी वार्ड में तन्हां छोड़कर सिगरा थाने पहुंचा तो उल्टे माताकुण्ड चौकी इंचार्ज लक्ष्मण यादव ने घनश्याम को थाने में रात 9 बजे तक बिठाये रखा। इस दौरान लगातार उस पर समझौता करने के लिए दबाव बनाया जाता रहा। उधर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पड़ी बूढ़ी घायल मां घंटो दर्द से कराहती रही।

घटना की जानकारी मिलने पर वहां पहुंचे चंद पत्रकारों ने जब डाक्टर से इस बारे में बात की तब कही जाकर उनका इलाज शुरू हुआ। असंवेदनशील तंत्र यहां किस तरह आम जन की जिदंगी से खेल रहा है, ये उसकी एक बानगी है।

घटना की जानकारी लेने थाने पहुंचे पत्रकारों के सामने एसओ सिगरा ने जब चौकी इंचार्ज से घटना के बारे में पूछा तो वहां भी चौकी इंजार्च मामले की लीपा-पोती करने में लगे रहे। चार घंटे तक फरियादी को थाने में क्यों रोके रखा, इस सवाल पर चौकी इंचार्ज महोदय के पास कोई जवाब नहीं था। फरियादी घनश्याम जायसवाल के तहरीर को भी चौकी इंचार्ज ने अपने पास दबा कर रख लिया। बाद में एसओ महोदय की फटकार के बाद चौकी इंचार्ज ने तहरीर उन्हें दिया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसओ ने फौरन बहू कंचन और उसके मामा के खिलाफ मुकदमा कायम करने के साथ चौकी इंचार्ज को अस्पताल जाकर चोटिल माया देवी का बयान लेने का आदेश दिया। फिलहाल 92 साल की बूढ़ी माया देवी मण्डलीय अस्पताल के आर्थोपेडिक वार्ड के वार्ड न. 6 के बेड न. 10 पर जिस्मानी दर्द से ज्यादा समय के साथ अर्थहीन होते जा रहे रिश्तों और असंवेदनशील प्रशासन के दर्द से ज्यादा दुःखी है, जहां काम नारों और विज्ञापनों में बोल रहा है।

सोमवार को जब इस मामले में एसओ सिगरा से मोाबाइल पर बात की गई तो उनका जवाब था कि एफ.आई.आर दर्ज कर ली गई है, धाराओं के बारे में थाने से जानकारी लें। सिगरा थाने पर फोन करने पर दूसरी तरफ से आवाज आयी यह नम्बर इस समय काम नहीं कर रहा है। खबर लिखे जाने तक पीड़िता का मेडिकल मुआयना तक नहीं हुआ था।

वाराणसी के पत्रकार भाष्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.



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