शीतल पी सिंह-
जेट लैग… वाक़ई होता है, जब घड़ी उलटी खड़ी हो जाय! दिन को रात और रात को दिन। जब 24/25th को पिछले महीने दिल्ली से उड़कर एम्सटरडम में जहाज़ बदलकर फ्लोरिडा के टेंपा हवाई अड्डे पर उतरा था, जेट लैग तब भी था और होटल पहुँच कर मैं तो लगभग बेहोश सो गया था।
कल जब अमरीका से लंदन में विमान बदलते हुए दिल्ली वापस आया और फिर क़रीब नौ घंटे की ड्राइव के बाद गाँव के अपने बिस्तर पर गिरा तो अब जाकर सुबह हुई है और आँखों में अभी भी भारीपन है।
मित्रों की टिप्पणियों और संदेशों के अलावा अनगिनत फ़ोन भी जगा रहे थे और भले ही सायलेंट मोड था स्वप्निल स्मृतियों में वे दस्तक देते रहे और आँख खुल गई।
दिल्ली में जहाज़ से उतरते ही गर्मी ने बताया कि हम सात समंदर पार कर वापस लौट चुके हैं और बे आफ़ कैलिफ़ोर्निया या शिकागो की विशाल जलराशियों से गुज़र कर वातावरण को 9 डिग्री सेल्सियस से 22 डिग्री सेल्सियस में डोलाती हवाएं पीछे छूट गई हैं। दिल्ली में हम दिन के समय उतरे लेकिन आसमान के धुँधलेपन ने पिछले बाइस दिनों के प्रदूषण रहित स्वप्न में नीला आसमान देखने की आदत पर क्रूर विराम लगा दिया।
परिवार के कर्तव्यों और व्यापारिक गतिविधियों में जीवन के लगभग दो दशक झोंकने के क्रम में मुझे पहले भी अमरीका, युरोप, पूर्वी एशिया और एशिया मध्यपूर्व के देशों में जाने का मौक़ा मिला था। व्यावसायिक गतिविधियों को तिलांजलि देने के बाद मित्र मंडली के साथ मैं अफ़्रीका के केन्या स्थित मसाईमारा के जंगलों में भी घूम आया लेकिन यह यात्रा अविस्मरणीय और एकदम अलग थी।

शुरुआत हुई फ़्लोरिडा के Poynter Institute से। अटलांटिक महासागर के सबसे ख़ूबसूरत और मशहूर समुद्री तटों के बीच बसे सेंट पीटर्सबर्ग शहर में स्थित है यह संस्थान। दुनिया भर के Factcheck करने वाले मीडिया के लगभग सभी बड़े नाम किसी न किसी रूप में इस संस्था से जुड़े हुए हैं। एक अमेरिकी पत्रकार/ प्रकाशक/ अख़बार के मालिक Nelson Poynter ने यह संस्था शुरू की थी और उनके निधन के बाद इसे उन्हीं के नाम पर इसका नामकरण परिवर्तित कर दिया गया।
अब यह संस्थान अमरीका के मशहूर कोलंबिया विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गया है और प्रख्यात पुलित्जर पुरस्कार देने वाली समिति में शामिल है।


