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प्रेमानंद भी पड़े लड़कियों के पीछे!

शंभु दयाल बाजपेई-

प्रेमानंद का यह समाचार अमर उजाला में देखा। यह कथित “संत” का कथित कथन है। इस स्थापना का आधार क्या है, यह प्रेमानंद ने स्पष्ट नहीं किया। पवित्र होने का उनका मानक क्या है, यह भी नहीं। लड़कियों के बारे में जानकारी या अध्ययन उन्हें है तो “पवित्र ” लड़कों की संख्या – प्रतिशत भी का उन्हें भान होगा ही।

“लड़के तो ऐसे ही होते हैं” मान कर उन्हें छोड़ दिया हो।

ये तथाकथित संत, कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देश- समाज को किस ओर ले जा रहे हैं, विचारणीय है। धर्म- अध्यात्म का व्यवसाय भीड़, शक्ति-संपदा का केन्द्र तो बनाता है, लेकिन देश को सबसे ज्यादा पीछे ले जाने का कारक भी बनता है।


प्रभाकर कुमार मिश्रा-

कैमरे के सामने कही हुई बात, अपना भाव बदल लेती है! प्रेमानंद जी की बात कड़वी है लेकिन सच है! उन्होंने केवल लड़कियों के बारे में नहीं कहा है, लड़कों के बारे में भी कहा है! लेकिन सुभाषित में कहते हैं न कि – न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्!

कैमरे के सामने उन्होंने ये बात कह दी, यही ग़लत हो गया! कैमरे के सामने कही हुई बात, अपना भाव बदल लेती है! अख़बार ने उनके बयान को केवल लड़कियों के बारे में बताकर अपराध किया है।

कुछ तर्क वितर्क और नीचे प्रेमानंद ने जो कहा उसका वीडियो देखें….

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1 Comment

1 Comment

  1. अभिषेक शुक्ला

    August 1, 2025 at 8:15 am

    ए सभू दयाल बाजपेयी को तमीज नहीं है क्या बात करने की, जब तक कोई जूते न मारे तब तक नहीं सुधरोगे

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