उमाकांत लखेड़ा-
उत्तराखण्ड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को चाहिए कि सड़कों पर दिन दहाड़े आम नागरिकों से मारपीट के अभ्यस्त, इस शांत राज्य में असामाजिक वैमनस्यता फैलाकर शांति भंग करने, ऋषिकेश में शराब माफिया को संरक्षण देने व पत्रकारों को धमकाने और पिटवाने के आरोपों में घिरे मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की कारगुज़ारियों का गंभीरता से संज्ञान लें। लोगों की मांग है कि यमकेश्वर क्षेत्र में संरक्षित वन क्षेत्र को अवैध, आपराधिक ढंग से तबाह कर पांच सितारा रिजॉर्ट और होटल बनाने वाले सत्ता के कारोबारी इस मंत्री को तत्काल पद से बर्खास्त करें।
चूंकि भाजपा के लिए यह व्यक्ति बड़े काम का है इसलिए जरूरी है कि राज्य के बारे में बुनियादी ज्ञान बढ़ाने के लिए इन्हें 1994 से 2000 तक लखनऊ विधानसभा और संसद के दोनों सदनों में उत्तराखंड राज्य के विधेयक पर कई बार घंटों की लंबी बहस को पढ़ने के लिए भेजना चाहिए ताकि इस व्यक्ति को पता लग सके कि उत्तराखंड राज्य किनके लिए और किसलिए बनाया गया था। चूंकि राज्य भाजपा के अधिकांश मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की आंखों में गुलामी की पट्टियां बंधी हैं इसलिए आम जनता उनसे किसी तरह के प्रायश्चित की उम्मीद न करे।
बेशुमार दौलत और सत्ता के अहंकार में डूबा यह ऐसा पहला मंत्री है जिसने प्रेस कांफ्रेंस करके दो साल पहले न केवल अंकिता भंडारी के असली हत्यारे वीआईपी का बचाव किया बल्कि उस लड़की के साथ हुई हैवानियत पर पर्दा डालने की शर्मनाक कोशिश की।
प्रेमचंद अग्रवाल पर कई गंभीर आरोप हैं! इसलिए इनकी और इनके परिवार की समस्त संपत्ति की जांच के लिए हाईकोर्ट के मौजूदा जज की अध्यक्षता में निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है। देहरादून में राजनीतिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं और आम नागरिकों ने शुक्रवार को शहीद स्थल देहरादून पर मोमबत्ती जलाकर प्रदर्शन कर इस विवादास्पद मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठन अरसे से सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आम लोग सवाल उठा रहे हैं कि मंत्री के आतंक पर मुख्यमंत्री क्यों तमाशबीन बने हुए हैं? सवाल आखिर में घूम फिर वहीं अटक जाता है कि जो भाजपा अंकिता भंडारी के हत्यारे वीआईपी को राज्य से हटा नहीं सकी, क्या वह इस मंत्री को हटाने की हिम्मत जुटा कैसे सकेगी?
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