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आते या जाते वक्त पंचिंग में हुई गड़बड़ी तो कट जाती है पूरे दिन की सेलरी!

अमर उजाला अब डिजिटल की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस डिजिटल का एक रूप कर्मचारियों की हाजिरी ने भी ले लिया है। यहीं से शुरू होता है शोषण। हालांकि 12-13 साल पहले ही हाजिरी का ये चलन शुरू हो गया था, लेकिन आज इसका रूप बिगड़ गया है। इस हाजिरी के सिस्टम को ही वेतन कटौती का जरिया बना लिया गया है। इसका कारण संस्थान से जुड़े शोषणकर्ता हैं जो मालिकों को पर्दे में रखकर कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं।

ये पंचिंग सिस्टम भी शोषण का एक रूप बनता जा रहा है। प्रबंधन ने मिस पंच होने पर वेतन काटने का सिस्टम बना लिया है। कर्मियों का कहना है कि ऐसा लगता है कि अमर उजाला को 75 साल की वर्षगांठ के खर्च की पूर्ति कर्मचारियों के वेतन से करनी है।

यदि कोई कर्मचारी ऑफिस आता है तो उसे पंच करना होता है। यही पंच जाते समय करना होता है। यदि इसमें से एक भी पंच छूट जाता है तो शुरू होता है उसका शोषण। उसे वेतन से हाथ धोना पड़ता है। इस मामले में कोई सुनवाई नहीं है। यूं तो ये चलन काफी समय से चला आ रहा है, लेकिन इस बार इस कटौती की चपेट में आने वलो लोगों की संख्या बहुत है, यानी इस बार अमर उजाला की कमाई में इजाफा होने वाला है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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