सत्येंद्र पीएस-
Rahul Gandhi के लिए कुछ सुझाव…
- यूपी बिहार आपका हाथ पसारे खड़ा है, उस पर ध्यान दीजिए। सपा के कार्यकर्ता अभी से उन लोगों की बहिनिया महतरिया एक करना शुरू कर चुके होंगे, जिन्होंने उनको छप्परफाड़ जिताया है। बिहार में नीतीश कुमार की चली चला की वेला है, उनका वोटर भी लावारिस होकर कांग्रेस की तरफ़ देख रहा है।
- स्पस्ट पॉलिसी रखिए। जिसको पार्टी से भगाना हो, उसको भगा दीजिए। भूपेश बघेल हो, डीके शिवकुमार हों या कोई भी। एक झटके में निकाल फेंकिए, अगर वह पसन्द नहीं हैं। बार्गेनिग करके राज्यों में तमाम पावर सेंटर न खड़े करिये। पावर सेंटर खड़े करने से नेता अपने ही दल के एक दूसरे के प्रत्याशी हराते हैं, जिससे कि उनका जलवा ज्यादा रहे। यह बहुत पुराना फार्मूला है।
- ढोंग नहीं चलेगा। पहले तो आप दलित और ओबीसी में अंतर समझिए। यह जानिए कि बढ़ई ओबीसी होता है और पासी दलित या कहें एससी। आपके बूढ़े बूढ़े कांग्रेसियों को नहीं पता होता है क्योंकि उन्होंने कभी जातिवाद किया ही नहीं है। आप यह जानिए कि अम्बेडकरअम्बेडकर करने से दलित खुश होता है,ओबीसी नहीं। आप लोग ओबीसी को प्रतिनिधित्व दीजिए, जिला लेवल पर उनको से संगठन में लाइये।
- कांग्रेस को उन राज्यों में मजबूत कीजिए, जहां वह भाजपा से सीधे मुकाबले में है। आप यह पॉलिसी छोड़ दीजिए कि लोग भाजपा से नाराज होंगे तो कांग्रेस को चुन लेंगे। एमपी और गुजरात मे लगातार पिट रहे हैं, जनता आपके कर्मों की वजह से दशकों से आपसे दूरी बनाए हुए है।
- मध्य मार्ग अपनाइए। कम्युनिस्टों से दूरी बनाइये, वह भारत मे नहीं चलेगा। कम्युनिस्ट मुअउवा टाइप हो गए हैं और उनको सत्ता में आने के बाद या पहले भी दरबारी की भूमिका में रखिए, ड्राइविंग सीट पर नहीं। नेहरूवियन मॉडल, मिक्स इकोनॉमी, या कहें मध्य मार्ग ही भारत के लिए मुफ़ीद है!
Narendra Modi के लिए कुछ सुझाव…
- हेलो मोदी जी, कैसा फील कर रहे हैं? अबकी बार 400 पार के सदमे से उबरने में वक्त तो लगेगा, लेकिन उम्मीद है कि उबर जाएंगे। आपकी कुशल बुद्धि का सम्मान करता हूँ। दो चरण में ही आपको समझ मे आ गया कि यूपी में आपको नुकसान होने जा रहा है। आपने संविधान, ओबीसी का मसला पकड़ लिया। लेकिन समझ तो रहे ही होंगे कि यूपी में क्यों पिटे हैं? कब तक धर्मेंद्र प्रधान से संसद में कहलवाकर बचेंगे कि मैं कुर्मी हूँ? तो आप हवाबाजी बंद करिये। भगवान राम को कोई मनुष्य नहीं लाता, भगवान राम मनुष्यों को लाते हैं। ऐसी पब्लिक की धारणा है।
2.आपके पास 5 साल हैं। 10 साल आपने व्यर्थ गंवा दिया। आप सीएम के रूप में जनांकिकीय लाभांश की बात करते थे और पीएम बनते ही युवाओं को सम्मानजनक काम देने की जगह ठेके की नौकरियां दी, पकौड़ा रोजगार दिया। आपने औपचारिक नौकरियों के सृजन के बजाय औपचारिक नौकरियों को ठेके पर डालने का काम किया। लोग 5 साल के शासन में इतिहास बना देते हैं, आपके पास 5 साल फिर मौका है। सरकारी कम्पनियों को बेचने और सेठों का हाथ मजबूत करने के बजाय युवा आबादी को देश के निर्माण में लगाइए। उनके हाथ से मोबाइल और सोशल मीडिया का गाली गलौज छीनकर उनकी एनर्जी देश की प्रगति में लगाइए। - जातीय, धार्मिक घृणा फैलाने से दूरी बनाइये। अपने को महामानव समझना बन्द कीजिए। 75 साल पार कर चुके हैं। ईश्वर ने आपको 22 साल सत्ता दी। अब और क्या चाहिए? खुद भी बुद्ध के मध्य मार्ग पर चलिए और अपने भक्तों को भी उधर ले जाइए। भारत की पहचान बुद्ध हैं। आप भी पहचानिए।
- प्रधानमंत्री बनने के बाद अगले राष्ट्रपति चुनाव में कोशिश करिए कि राष्ट्रपति बन जाइये। इससे नेहरू का रिकॉर्ड भी टूट जाएगा, क्योंकि वह राष्ट्रपति नहीं बन पाए थे। साथ ही आपको संविधान का संरक्षण भी मिल जाएगा। लेकिन मेरी इच्छा यह है कि इस 5 साल के कार्यकाल में अपने सद्कर्मो से खुद को पापमुक्त कर लीजिए।
- मेडिटेशन करिये। आपमें व्याकुलता बहुत है। थोड़ा सा में उद्देलित हो जाते है। ईश्वर/प्रकृति अभी भी आपके साथ है।अगर वह साथ न होता तो आप सत्ता के करीब नहीं पहुँचते। अटलजी को सत्ता नहीं मिली तो कोमा में चले गए, उसके बाद फिर कभी होश में नहीं आए। प्रभु आपको क्रमिक रूप से सत्ता से बाहर ला रहे हैं, जिससे अटल टाइप झटका न लगे। आपने ढाई दशक की सत्ता में इतनी नेगेटिविटी अपने अंदर भर ली, जनता के अंदर इतनी नेगेटिविटी भर दी कि चारों तरफ़ अशांति ही अशांति है। अगर आप मेडिटेशन करते हैं तो आपका चित्त शांत होगा। यह अनुभव कर पाएंगे कि कितनी अनित्यता है। जिसे आप अपना समझते हैं, वह आपका नहीं है। आपका अस्तित्व प्रतीत्यसमुत्पाद से है। आप मौजूदा रूप में जो हैं, वह बनने में हजारों लोगों का हजारों वर्षों का, तमाम जीव जंतुओं का योगदान है। सबके प्रति थैंकफुल होइए। इससे आपका चित्त शांत होगा और निर्वाण की प्राप्ति होगी, यानी सुकून से रह और मर सकेंगे।


