
राजीव तिवारी बाबा-
अपनों से अपनी बात…सभी वरिष्ठों, मित्रों को सादर प्रणाम और अनुजों को हार्दिक स्नेह।
जैसा कि हम सब जानते हैं उ.प्र. राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का कल शनिवार को चुनाव होना है। अच्छी बात है कि थोड़े विलंब से ही सही मगर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव हो रहे हैं। इसमें मैं राजीव तिवारी “बाबा” (9) भी उपाध्यक्ष पद का प्रत्याशी प्रत्याशी हूं।
विभिन्न पदों के सभी उम्मीदवार मित्र अपने-अपने तरीके, क्षमता और योग्यता मुताबिक अपना प्रचार कर रहे हैं। मैंने भी अपनी पूरी कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल लूं या फोन पर बात कर लूं फिर भी बहुत से ऐसे लोग छूट जा रहे हैं जिनसे व्यक्तिगत तौर पर न मिल पाया न बात हो पाई। इसके लिए मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूं। हो सकता है कि उन तक मेरे मित्रों और शुभचिंतकों द्वारा मेरी उम्मीदवारी पहुंची हो। जिनके पास न पहुंची हो वे कृपया इस पत्र को ही मेरी उपस्थिति मानकर मेरी उम्मीदवारी पर विचार जरूर करें।
थोड़ा सा अपने बारे में बता दूं कि जीवन के लगभग ढाई दशक मैंने सक्रिय पत्रकारिता में बिताए हैं। कुबेर टाइम्स से शुरू हुआ ये सफर टाइम्स ऑफ इंडिया, अमर उजाला, दैनिक जागरण, सहारा समय और राष्ट्रीय सहारा से होते हुए अब स्वतंत्र पत्रकारिता पर चल रहा है। इस दौरान लखनऊ के अलावा कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ, नोएडा, जालंधर व अमृतसर आदि शहरों में भी विभिन्न पदों पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस बात का सुकून है कि पत्रकारिता के शानदार सफर के दौरान कई खट्टे मीठे अनुभव के बावजूद अभी तक मुझ पर कोई उंगली नहीं उठने पाई। पत्रकारिता को समर्पित मेरा सफर बेदाग रहा।
जैसा कि आप सब जानते हैं कि ये मेरा दूसरा चुनाव है। पिछली बार मैं पहली बार चुनाव मैदान में था और समय काफी कम मिला था फिर भी आप लोगों का बहुत प्यार मिला और चंद वोटों से पीछे रह गया था।
मैं चुनाव क्यों लड़ रहा हूं? के सवाल पर मेरा मानना है कि जब तक मुख्य धारा में था तब तक नौकरी से इतनी फुर्सत ही नहीं थी कि चुनाव लड़ने के बारे में सोचता। तब तक मैं भी सिर्फ एक मतदाता के रूप में चुनाव में अपनी भागीदारी करता था। अब राष्ट्रीय सहारा के बाद बतौर स्वतंत्र पत्रकार कहीं नौकरी नहीं कर रहा हूं तो मेरे पास किसी मोर्चे पर आने-जाने की आजादी है। और इस बात के लिए भी स्वतंत्र हूं कि अपने पत्रकार समाज के लिए कुछ कर सकता हूं।
सत्रह उम्मीदवारों के बीच मुझे ही वोट क्यों दें? के जवाब में सिर्फ इतना ही कहना है- पत्रकार हूं इसमें अब पूरे परिचय के बाद किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए। पत्रकारों का चुनाव है पत्रकारिता ही जीतनी चाहिए। उपाध्यक्ष पद पर और जो प्रत्याशी मित्र मैदान में हैं उनमें से जो लोग इसी पद या अलग-अलग पदों पर दो बार मौका पा चुके हैं तो इस बार हम जैसे नये चेहरों को मौका मिलना चाहिए। पिछली बार चुनाव में चंद मतों से पीछे रह जाने के बाद भी अन्य जीते व हारे प्रत्याशियों की तरह मैं सीन से गायब नहीं रहा। अपने साथियों के लगभग हर सुख दुःख पर पहली सूचना पर ही उपस्थित रहा। यथासंभव मदद करता रहा। सभी से संवाद बनाये रहा। मिलता-जुलता रहा। इस बार के दो चुनाव की आशंकाओं के बीच एक समिति एक चुनाव कराने में यथासंभव अपनी सीमित भूमिका मजबूती से निभाई। ऐसा नहीं है कि चुनाव घोषित हुए और अचानक मैं सामने आ गया कि भाई साहब मैंने भी परचा भर दिया है, मुझे भी मौका दीजिए।
मौका मिला और उम्मीद पर खरा न उतरा तो अगली बार मुझे भी अपने मतों द्वारा हटा दीजिएगा।
जीत गया तो क्या करूंगा? के सवाल पर बस इतना ही कहना है कि ये कोई सरकार बनाने का चुनाव तो है नहीं कि सरकार बनाने के लिए लंबा चौड़ा चुनाव घोषणापत्र जारी किया जाए और जीतने के बाद उसे लागू किया जाए। पत्रकारों के लिए जो भी करना है वर्तमान या भविष्य की राज्य सरकारों को ही करना है। हां, इतना भरोसा जरूर दिलाता हूं कि बतौर पत्रकार सवाल करता आया हूं, सवाल करता रहुंगा, पत्रकार हितों को लेकर बेधड़क, बेहिचक न सिर्फ शासन सत्ता से बल्कि अपनी समिति के अगले अध्यक्ष और सचिव से भी। मैं उपाध्यक्ष बना तो अब तक के अन्य पदाधिकारियों की तरह मुंह में दही जमाकर सन्नाटा मार कर बैठा नहीं रहुंगा। चुनाव जीतने के बाद पहला मुद्दा होगा वरिष्ठ पत्रकारों के लिए देश के अन्य राज्यों की भांति पेंशन योजना लागू करवाने के लिए लड़ना। इसके बाद अन्य के लिए प्रयास जारी रहेगा….लगता है पत्र बहुत लंबा खिंच गया। माफी चाहता हूं।
अंत में एक बार फिर निवेदन करूंगा कि पत्रकारों का चुनाव है पत्रकारों को मौका दें और परिवर्तन प्रकृति का नियम है तो नये चेहरे को मौका दें। पूरी कोशिश करुंगा कि उम्मीद पर खरा उतरूं..
लेखक राजीव तिवारी बाबा वरिष्ठ पत्रकार हैं और उ.प्र. राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता चुनाव में उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी है.



राजीव तिवारी बाबा
August 30, 2024 at 4:55 pm
बाबा की जय हो
मनोज मणि
August 31, 2024 at 8:05 pm
अद्भुत, अप्रतीम एवम् सेवाभाव सोच …