चंदौली: यूपी के चंदौली में एक बड़े मेडिकल लापरवाही और धन उगाही के आरोप का मामला सामने आया है। आयुष हेल्थ केयर, अलीनगर से जुड़े डॉक्टर और संस्थान प्रबंधक डॉ. ए.के. सिंह की तहरीर पर पत्रकार राजेश गोस्वामी और उनके सहयोगियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है।
तहरीर के अनुसार, 23 अगस्त 2025 को बिहार निवासी मनीष कुमार अपनी 17 वर्षीय बहन को गंभीर हालत में अस्पताल लेकर गए थे, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने हरसंभव प्रयास किया, लेकिन 25 अगस्त को सुबह लगभग 7 बजे उनकी मौत हो गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि मरीज की मृत्यु के बाद पत्रकार राजेश गोस्वामी अपने सहयोगियों के साथ अस्पताल पहुंचे और प्रबंधन पर दबाव बनाने की कोशिश की। आरोप है कि गोस्वामी ने कहा कि यदि अस्पताल प्रबंधन उनकी “मांगें” नहीं मानेगा तो वह चैनलों और सोशल मीडिया पर अस्पताल के खिलाफ नकारात्मक खबरें चलाएंगे।
तहरीर में यह भी उल्लेख है कि पत्रकार ने अस्पताल की छवि धूमिल करने और बदनाम करने की कोशिश की तथा मृतक के परिजनों को भड़काकर अवैध रूप से धन ऐंठने का प्रयास किया।
अस्पताल प्रशासन ने इस घटना की शिकायत पुलिस में की, जिसके आधार पर थाना अलीनगर पुलिस ने पत्रकार राजेश गोस्वामी, मनमोहन और दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने बताया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। यदि अवैध धन उगाही और दबाव बनाने के सबूत मिलते हैं तो आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
पढ़ें इस प्रकरण का दूसरा पक्ष-
मानवता को झकझोरने वाली घटना: निजी अस्पताल की करतूत उजागर करने वाले पत्रकारों पर ही मुकदमा
चंदौली। अलीनगर थाना क्षेत्र स्थित आयुष हेल्थ केयर में 25 अगस्त की रात इलाज के दौरान बिहार कैमूर निवासी 17 वर्षीय किशोरी प्रियांशी कुमारी की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव को रोककर परिजनों से ₹44,000 की वसूली की शर्मनाक हरकत की। पीड़ित परिवार की गुहार और मीडिया के हस्तक्षेप से मामला सामने आया, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि अस्पताल की करतूत उजागर करने वाले पत्रकारों पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान वे 25 अगस्त तक ₹35,000 का भुगतान कर चुके थे, लेकिन मौत के बाद अस्पताल ने बकाया रकम के नाम पर शव रोक लिया। पत्रकारों ने मौके पर पहुंचकर न केवल पीड़ित परिवार की बात उठाई बल्कि भुगतान की रसीदों और डिजिटल लेन-देन के सबूत भी उजागर किए। बताया जा रहा है कि इसके बाद अस्पताल संचालक एके सिंह ने पुलिस व कुछ अन्य लोगों की मदद से गरीब परिजनों पर दबाव बनाकर जबरन लिखित समझौता कराया।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजनों ने मजबूरी में शर्तें मानीं, जिसके बाद ही शव सौंपा गया। प्रियांशी का पार्थिव शरीर परिजन पैतृक गांव, कैमूर (बिहार) ले गए।
घटना के उजागर होते ही अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ा, मगर हैरानी की बात यह रही कि 27 अगस्त को अस्पताल संचालक ने उलटे दो पत्रकारों के खिलाफ अलीनगर थाने में झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। यह कदम साफ संकेत देता है कि अस्पताल की मनमानी को दबाने और आवाज़ उठाने वालों को डराने का प्रयास हो रहा है।
पत्रकारों ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि पूंजी और सत्ता के गठजोड़ से पनप रही ऐसी अमानवीय हरकतों को सामने लाना उनका कर्तव्य है और किसी भी दबाव के बावजूद यह जिम्मेदारी निभाई जाती रहेगी।
एफआईआर की प्रति देखें…






