यशवंत सिंह-
आठ साल पहले 23 अगस्त 2015 की बात है. एक लेडी जसलीन कौर एक फ़ेसबुक पोस्ट डालती है। जिसमें वो लिखती है कि-
“आज तिलकनगर की रेड लाइट पर सर्वजीत सिंह अपनी बुलेट पर रेडलाइट पार कर रहा था। जिसे मैने मना किया। जब मैंने कहा मैं तेरे फोटो लेकर पुलिस में कंप्लेंट करूँगी तो उसने कहा- जो कर सकती है कर ले, कंप्लेंट करके देख फिर मैं क्या करता हूँ।”
आगे वो लिखती है कि “मुझे सर्वजीत के कमेंट्स से उतना दुख नहीं हुआ जितना वहाँ खड़े 20 लोगो के “कुछ ना करने” से हुआ। किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया, किसी एक ने भी नही। आज उसने ये मेरे साथ किया अगर ये बच गया तो कल ये आपके साथ क्या करेगा सोच लो। इसलिये इस कीड़े की पहचान उजागर करने के लिये ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें।”
वो पोस्ट जानीमानी फेमिनिस्टो ने शेयर करनी स्टार्ट की व उसी दिन एक लाख से ज़्यादा बार शेयर हुई। दिल्ली के नये नये बने जोशीले CM ने tweet करके जसलीन को शाबाशी देकर समर्थन किया। अरविंद केजरीवाल की पुरानी साथी रही स्वाति मालीवाल दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के नाते बीच में कूद पड़ी। सोनाक्षी सिन्हा जैसी हेरोइन ने tweet किए। पुलिसिये DCP कैसे पीछे रहते। उन्होंने उस औरत को कैश इनाम दिया।
सोशल मीडिया से उठे तूफ़ान से मेन मीडिया द्वारा ट्रायल स्टार्ट हो चुका था। सर्वजीत सिंह को “दिल्ली का दरिंदा” से लेकर “राष्ट्रीय कामान्ध”, “पोटेंशियल बलात्कारी” कहा गया। चौबीस घंटे में सरदार सर्वजीत को जेल में डाल दिया गया। उसकी कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया। उसे कोई दूसरा रोज़गार नहीं मिला। मगर होनी को कुछ और मंज़ूर था।
दिल्ली में पत्रकार कम तो है नहीं लिहाज़ा सारा तिलक नगर कैमरा/OB वैन से भर गया। केस जसलीन की उम्मीद से ज़्यादा ही उछल गया। मीडिया ने आई विटनेस ढूँढ निकाले। जसलीन कैरियर ओरिएंटेड थी, उसने नयी नयी राजनीति जॉइन की थी। वो केस के तीसरे दिन TV स्टूडियो में दो आई विटनेस से भिड़ गई। बाद में रेड-लाइट पर लगे कैमरे, मौक़े पर हाज़िर कई गवाहों व जसलीन की मित्र ने जसलीन का चिट्ठा खोल दिया।
उसने ये सारा काम AAP में अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिये, प्रसिद्धि पाने के लिये किया था। उसका विक्टिम बनकर सहानुभूति लेने का खेल खुल गया। बाद में कोर्ट ने सर्वजीत को बाइज्जत बरी किया।
पर कुछ सवाल अधूरे ही है
-जिन लाख से ज़्यादा ट्रोल्स ने वो पोस्ट शेयर करके कंगारू कोर्ट लगाया क्या उन्होंने सच पता किया या “मैं भी जज बनूँगी/बनूँगा” की फीलिंग में सर्वजीत का जीवन बर्बाद करने में योगदान दिया
-क्या अरविंद केजरीवाल, स्वाति मालीवाल, फेमिनिस्ट दीदियों आदि ने अपनी गलती मानी ?
-क्या उन्होंने जाना की जसलीन भांडा फूटने के बाद कोर्ट प्रोसीडिंग्स में भी नहीं आयी व एजुकेशन के बहाने कनाडा भाग गई।
-क्या स्त्रियों को सपोर्ट करने को लालायित पुरुषों ने जाना की जिस मीडिया से वो भड़भड़ा उठते है उस Times Now जैसे मीडिया हाउस तक पर इस केस में झूठ फैलाने का फाइन हुआ?
(हाल फ़िलहाल राजीव नयन बहुगुणा जी तथा उनकी पोस्ट पर रियेक्ट करने वाले लोगों के साथ हुए सोशल मीडिया ट्रायल से याद आया क़िस्सा)


