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राजनाथ सिंह के सामने वायुसेना प्रमुख ने हथियार खरीद को लेकर दागे सवाल, देखें वीडियो

पुष्प रंजन-

ज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शर्मशार तो हुए होंगे? गुरुवार को CII वार्षिक आम बैठक और व्यापार शिखर सम्मेलन 2025 में सन्नाटा छा गया, जब भारत के एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने प्रमुख रक्षा खरीद परियोजनाओं, खास तौर पर स्वदेशी विनिर्माण से जुड़ी परियोजनाओं में हो रही देरी की आलोचना की। सामने बैठे थे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह।

वायुसेना प्रमुख ने डिलीवरी शेड्यूल को पूरा करने में लगातार विफलता पर निराशा व्यक्त की। वायु सेना प्रमुख बोले – “सिर्फ तेजस ही नहीं, एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, कावेरी जेट इंजन, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर भी फंसे हैं. कई बार, अनुबंध पर हस्ताक्षर करते समय हम जानते हैं कि वे सिस्टम कभी नहीं आएंगे। समयसीमा एक बड़ा मुद्दा है। मैं एक भी परियोजना के बारे में नहीं सोच सकता जो समय पर पूरी हो। हम ऐसा वादा क्यों करें जो पूरा नहीं हो सकता?”

देखें वीडियो-

https://x.com/supriyashrinate/status/1928297912502735159?s=46

उन्होंने क्षमता निर्माण और सशस्त्र बलों की व्यापक रणनीतिक स्थिति पर देरी के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डाला। भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा, “तेजस Mk1 की डिलीवरी में देरी हो रही है। तेजस Mk2 का प्रोटोटाइप अभी तक रोल आउट नहीं हुआ है। स्टील्थ AMCA फाइटर का अभी तक कोई प्रोटोटाइप नहीं है।”

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा, “हमें आज जो चाहिए, वह हमें आज चाहिए। हमें जल्दी से जल्दी अपने काम को एक साथ करने की जरूरत है। युद्ध हमारी सेनाओं को सशक्त बनाकर जीते जाते हैं।” सिंह ने कहा कि देरी ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्रभावित किया है, जिसमें तेजस Mk1A लड़ाकू विमान और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) कार्यक्रम शामिल हैं।

तेजस एमके1ए लड़ाकू विमान की डिलीवरी, जो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 48,000 करोड़ रुपये के अनुबंध का हिस्सा है, और जिस पर फरवरी 2021 में हस्ताक्षर किए गए थे, अभी भी रुकी हुई है। ऑर्डर किए गए 83 विमानों में से एक भी विमान की डिलीवरी नहीं हुई है। डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होने वाली थी। उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए), कावेरी जेट इंजन, एलयूएच (लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर) में इतनी देरी हुई है कि भारतीय सेना ने हाल के वर्षों में रूस से केए226 हासिल करने की असफल कोशिश की,”

नाम न बताने की शर्त पर एक सुरक्षा निर्यातक ने बताया। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की अक्षमताएं जगजाहिर हैं। 22 दिसंबर, 2014 को संसद में प्रस्तुत रक्षा पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट ने कई कार्यक्रमों को निष्पादित करने में देरी के लिए डीआरडीओ की आलोचना की थी।

समिति ने कहा कि “परियोजनाओं को उनके निर्धारित समय के अनुसार निष्पादित नहीं किया जाता है, और लगभग सभी परियोजनाओं के निष्पादन में अत्यधिक देरी होना आम बात है”।

हिंदुस्तान टाइम्स ने 2015 में बताया था, कि लगभग 10 परियोजनाएं, जिनकी स्वीकृत लागत औसतन 1,686 करोड़ रुपये है, औसतन 5 साल से विलंबित हैं। और यह समस्या केवल भारतीय वायुसेना तक ही सीमित नहीं है।

मार्च 2012 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी थी, कि भारतीय सेना के टैंकों में गोला-बारूद खत्म हो गया है, और कमियों को दूर करने तथा सेना को युद्ध स्तर पर लाने की ज़रूरत है। सिंह ने लगभग 97 प्रतिशत वायु रक्षा को अप्रचलित बताया, और कहा कि विशेष बलों के पास हथियारों की कमी है।

जनरल वी.के. सिंह, मार्च 2014 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वे 2014 में लोकसभा सांसद बने, और उन्हें मंत्री बनाया गया। सिंह ने अपने पत्र में दावा किया था, कि उन्हें ‘घटिया’ खरीद आदेश को मंजूरी देने के लिए 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी।

विदेशी कंपनियों के साथ भारत के रक्षा अनुबंध अक्सर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ है, और सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में बाधा उत्पन्न हुई है। दुखद यह है, कि जनरल वी.के. सिंह सरकार में आकर भी उस बीमारी का इलाज नहीं कर पाए, जिसकी शिकायत पिछली सरकार से की थी.

देखें वीडियो…

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