देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में एक बार फिर प्रशासनिक टकराव की गूंज सुनाई दी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) रायपुर के निदेशक राम कुमार ककानी ने इस्तीफा दे दिया है। यह पिछले पांच वर्षों में तीसरे IIM निदेशक हैं जिन्होंने बोर्ड से मतभेद के चलते पद छोड़ा है। ककानी ने केंद्र सरकार को भेजे अपने पत्र में लिखा कि संस्थान की स्वायत्तता दबाव में है। बताया जा रहा है कि उनका इस्तीफा उस अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े विवाद के बाद आया, जिसे अदालत ने इस साल अप्रैल में रद्द कर दिया था।
इस प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह जी ने लिखा है-
बनाया एक भी नहीं लेकिन जो कुछ पहले का है उसको बरबाद करने का कोई मौक़ा चूकेंगे नहीं!
आईआईएम रायपुर के निदेशक राम कुमार काकनी ने प्रशासनिक स्वायत्तता और संचालन की अखंडता को लेकर चिंता जताने के बाद इस्तीफा दे दिया है। वह 2021 से अब तक तीसरे आईआईएम निदेशक हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल से पहले इस्तीफा दिया है, इससे पहले आईआईएम कोलकाता के दो निदेशकों ने राजनीतिक रूप से नियुक्त बोर्डों के हस्तक्षेप के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
काकनी ने अपने इस्तीफे में कहा कि आईआईएम अधिनियम, 2017 की भावना और आईआईएम रायपुर में प्रचलित एचआर नीतियों के बीच असंगति के कारण उनके पेशेवर कार्यक्षेत्र को सीमित किया जा रहा था, जिससे संस्थागत शासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता पर असर पड़ रहा था।
यह घटना भारत के शीर्ष उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती है। आईआईएम अधिनियम, 2017 को संस्थानों को अधिक स्वायत्तता और जवाबदेही देने के लिए लागू किया गया था, लेकिन हाल के वर्षों में निदेशकों और बोर्ड अध्यक्षों के बीच प्रशासनिक अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं।
काकनी के इस्तीफे से पहले, आईआईएम कोलकाता के निदेशक अंजू सेठ (2021) और उत्तम कुमार सरकार (2023) ने भी इसी कारण इस्तीफा दिया था। यह घटनाएं भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर गंभीर चिंता पैदा करती हैं ।


