यशवंत सिंह-
पुलिस में रामबदन सिंह जिस इलाक़े के बॉस बना दिये जायें वहाँ के पुराने से पुराने रोग जड़ से ठीक कर दिये जाते हैं। नोएडा में इस वक़्त इन्हें एक इलाक़े का डीसीपी का चार्ज मिला हुआ है। रोज़ अख़बार में कुछ न कुछ खुलासा पढ़ता रहता हूँ।


कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सिर्फ़ जुबान पर आने भर से आश्वस्ति भर देते हैं। रामबदन सिंह ऐसे ही हैं।

वे विशुद्ध सैलरीजीवी आदमी हैं। तनख़्वाह के अलावा एक पैसा छूना गुनाह। यही कारण है कि वे मेरिट पर काम करते हैं। वे आदमी का चेहरा नहीं, उसका प्रार्थनापत्र देखते हैं। आरोपी चाहें जितना बड़ा हो, एक्शन लेने और उसे औक़ात में लाने में चूकेंगे नहीं। उनके स्पष्ट और बेबाक़ स्वभाव के कारण उनका फ्रेंड सर्किल बहुत छोटा है।
कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को राम बदन सिंह पर एतबार है, काम करने को फ्री हैंड दिया हुआ है, ये साबित करता है कि नोएडा में जनपक्षधर पुलिसिंग का काम इन दिनों पूरे तेवर में है।
ज्ञात हो रामबदन सिंह पूरे जीवन एसटीएफ़, ईडी, सीबीआई में कार्य किए। दर्जनों कुख्यात आतंकियों को पकड़ा, कोर्ट में मज़बूत ट्रायल को लीड किया और सजा दिलवाई। बहुत सारे आतंकी देश प्रदेश के कई जेलों में अब भी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। वे दिन रात रामबदन सिंह का नाम रटते हैं जिसने उनके मंसूबे फेल कर सलाख़ों के पीछे पहुँचाया।
मेरे पास वक़्त होता है तो मैं राम बदन सिंह जी के पास पहुँच जाता हूँ और उनके करियर के केसों-क़िस्सों को सुनता रहता हूँ। कुछ वक्त तक नोएडा में उन्हें साइडलाइन रखा गया। पुलिस लाइन वाले एक एसीपी के ऑफिस में बिठा दिये गये थे। मुझे कष्ट हुआ था तब। लेकिन वे निर्विकार थे।
थाने चौकियों के लोग वही करते हैं जो उनके अफ़सर कहते हैं। रामबदन सिंह जैसे ऑफिसर अगर टीम को वैचारिक नेतृत्व देते हों तो थाने चौकियों की यही सुस्त और सोती हुई टीम धड़ाधड़ गुडवर्क करती है।
और हाँ, सीपी लक्ष्मी जी को विशेष कर बधाई, गड़बड़ पुलिस वालों पर सख़्त एक्शन लेने के लिए! लूट की एक घटना के आरोपी ट्रेनी दरोग़ा और सिपाही को बर्खास्त कर दिया, चौकी इंचार्ज, एसएचओ, डीसीपी को पदमुक्त कर दिया। ये घटना और ये एक्शन नोएडा में चर्चा का विषय बना हुआ है।


