राष्ट्रीय सहारा वाराणसी के स्ट्रिंगरो पर काम का बोझ अधिक लेकिन वेतन कम, विरोध करने पर किया जा रहा परेशान

सर जी, आपको अवगत करना चाहते है की राष्ट्रीय सहारा, वाराणसी यूनिट को शुरु हुए चार साल होने जा रहे हैं लेकिन यहां काम करने वाले स्ट्रिंगरों का वेतन एक रुपया भी नहीं बढ़ा है। सहारा श्री के जेल जाने से पहले तक अधिकारी सभी को परमानेंट कर देने का आश्वासन दे रहे थे। अब इस संबंध में बात भी करो तो अधिकारी नौकरी छोड़ देने की बाते करते हैं। स्ट्रिंगरो का वेतन यहाँ 36सौ रुपये से शुरु है जो अधिकतम 9 हजार तक है।

यहाँ पर परमानेंट लोगों का काम बेहद सिमटा हुआ है। वे अपने निर्धारित काम के अलावा दूसरा काम नहीं करते जबकि स्ट्रिंगर चाहे वो पेज बनाते हो या सबएडिटर हों सभी से जबरदस्त काम लिया जाता है। खैर, काम तो स्ट्रिंगर अपने बेहतर भविष्य की आशा में अधिक करते हैं लेकिन अब जब चार साल बाद स्ट्रिंगरों ने विरोध करना शुरु किया है तो उन्हें परेशान करने का काम जा रहा है।

यहाँ पर जिनके माई-बाप हैं वो न के बराबर काम करते हैं और अधिकारियों की बटरिंग कर अधिक वेतन ले रहे हैं। कुल मिला के यदि कहा जाये तो, जो समर्पित भाव से काम करने वाले स्ट्रिंगर हैं उनके काम का इनाम देने वाला यहाँ कोई अधिकारी या इंचार्ज नजर नहीं आता है। 

यहाँ के परमानेंट कर्मचारियों का चार साल में अब तक पांच बार वेतन में इंक्रीमेंट लगा है। ऐसे में सर, आप ही बतायें कि इतने कम वेतन में स्ट्रिंगर अपना घर कैसे चलाएंगे। सर, आप अपनी वेबसाइट पर हम जैसे स्ट्रिंगरों के दुख-दर्द के बारे में लिखे ताकि राष्ट्रीय सहारा, वाराणसी के स्ट्रिंगरों की स्थिति से संस्थान के मालिकान वाकिफ हो सकें।

 

एक पत्राकार द्वारा भेजा गया पत्र।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Comments on “राष्ट्रीय सहारा वाराणसी के स्ट्रिंगरो पर काम का बोझ अधिक लेकिन वेतन कम, विरोध करने पर किया जा रहा परेशान

  • anmol singh says:

    bhai hum logo ki dil ki baat hai, ap ne jo comment kiya hai vha kabile tarif hai..ap ne jo likha hai vo rashtriya sahara officer ydi sagyan me le to kuch baat bane……………………………………………………………………………………………….thnx.all friends press

    Reply
  • 4 saal me ek rupey nahi badhan ye to bahut hi sarmnaak baat hai. aakhir aadmi kaam kis chiz ke liye karta hai. yadi sansathan stringaro ka paisa nahi barana chahti to use niukti ke samay hi sabhi sarte clear kar deni chahiye. waise bhi sahara me suna gaya hai ki yaha par kaam karna ho to unchi pahuch honi chahiye. itne labe samay tak kaam ka inaam na milna ye to dum marne wali baat hai bhai.

    Reply
  • 4 salo me ek rupay na bhadna ye to bahut sarm ki baat hai kisi bhi sansathan ke liye, karm chariyo ke haq ko na dena to in akbhar walo ki fitrat ban gayi hai. kaam karne walo ki waise bhi sahara me kadr nahi hai bhai ye to puri media me jag jahir hai yaha wahi log kaam karte hai jinke mai-baap uppar baithe ho.

    Reply
  • insaf india says:

    Swarthi Editor aur kuchh varishtha prabandhak sahara ko garta me girane par tule huye hai. Yeh kewal varanasi ki hi pida nahi hai bandhu. Sare unit me bhedia baithe hai. Patna me toh vampantha ka chadar odhkar Editor khulkar apne chamcho ko sandh banye huye hai. khulkar bhumihari chal rahi hai. Vidhayak ke chamcho se mar khane ke baad itne saham gaye hai ki vidhayak ke bhai reporter ko kuchha bhi nahi bolte. JO YOGYA HAI USE NOTICE THAM KAR GARVA MAHSHUS KAR RAHE HAIN. SANTOSH, bRAJESH, rAMESH, KAUSHALENDRA AUR KRISHNA KO KHULI CHHUT HAI. KOYI NIYAM KANUN NAHI. YE LOG ISLIYE PALE JA RAHE HAIN KI JANCH HONE PAR SAMPADAK KA SATH DENGE. YE GAWAH BANEGE SAMPADAK KI. SAHARA KO DUBONE ME PATNA KE EDITOR KI BADI BHUMIKA HOGI.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *