Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

राजस्थान

राजस्थान की RGHS स्कीम में बड़ा खेल: रिपोर्टर को बिना बीमारी 7 दिन भर्ती कर कमाए लाखों

जयपुर। राजस्थान में कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए लागू राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में भारी घोटाले का खुलासा हुआ है। एक रिपोर्टर जब महज़ सीने में दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास गया, तो उसे दो अलग-अलग अस्पतालों ने भर्ती कर लिया और स्कीम के नाम पर 28 टेस्ट कर डाले। हैरानी की बात यह रही कि सभी जांचों में रिपोर्ट नॉर्मल आई, इसके बावजूद रिपोर्टर को 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा गया।

कैसे हुआ खेल?

जयपुर के दीपसिया अस्पताल और उमंग अस्पताल ने RGHS स्कीम का गलत इस्तेमाल करते हुए रिपोर्टर को मरीज घोषित कर दिया।

पहले दिन ही 28 टेस्ट करा दिए गए—इसी में ईसीजी, एक्स-रे, थायराइड टेस्ट, कोलेस्ट्रॉल, विटामिन D और अन्य महंगे टेस्ट शामिल थे। सभी रिपोर्ट सामान्य आने के बाद भी अस्पताल ने कहा कि “दिल का रिस्क है” और रिपोर्टर को भर्ती कर लिया।

गलत दवाओं का असर

अस्पताल ने रिपोर्टर को अनावश्यक दवाइयाँ दीं, जिसके कारण वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा और उसके सिर में चोट आ गई। रिपोर्टर को भर्ती करने के लिए घर का एक कमरा ICU घोषित कर दिया गया और उसके लिए रोज़ाना 2,800 रुपये का किराया बिल में जोड़ा गया।

डॉक्टरों पर सवाल

दीपसिया अस्पताल के डॉ. अभिषेक शर्मा और उमंग अस्पताल के डॉ. संजीव गुप्ता ने बिना किसी ठोस वजह के रिपोर्टर को गंभीर मरीज बताकर भर्ती रखा।

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर अनावश्यक टेस्ट और दवाइयाँ देना मेडिकल एथिक्स का सीधा उल्लंघन है।

बड़ी तस्वीर – RGHS घोटाला

बीते 4 साल में राजस्थान सरकार पर RGHS स्कीम के तहत 3,744 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया गया। डॉक्टर और अस्पताल फर्जी तरीके से मरीजों को भर्ती कर इलाज का बिल सरकार को भेज रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पतालों ने रिपोर्टर जैसे कई मरीजों को ‘बिना बीमारी बीमार’ बना दिया और स्कीम का फायदा उठाकर करोड़ों कमा लिए।

एक्सपर्ट की राय

चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सतीश कासलीवाल ने कहा— “टेस्ट सामान्य आने पर मरीज को तुरंत डिस्चार्ज कर देना चाहिए। सात दिन भर्ती करना और गलत दवाइयाँ देना मेडिकल साइंस और कानून दोनों के खिलाफ है।”

यह मामला सिर्फ एक रिपोर्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे RGHS स्कीम में चल रहे ‘गबन’ और फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। दावे हैं कि इसी तरह हजारों कर्मचारियों और पेंशनर्स को अनावश्यक टेस्ट व भर्ती के नाम पर लूटा गया है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन