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सदगुरू पर बनी श्याम मीरा सिंह की वीडियो को गूगल, मेटा और एक्स से हटाने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह द्वारा ईशा फाउंडेशन और इसके संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर बनाए गए हालिया यूट्यूब वीडियो को हटाने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने गूगल, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स को उक्त वीडियो को अपने प्लेटफ़ॉर्म्स से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही, सिंह को इस वीडियो को प्रकाशित या साझा करने से भी रोका गया है।

यह आदेश ईशा फाउंडेशन द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे के तहत जारी किया गया है, जिसमें दावा किया गया था कि सिंह का वीडियो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है। कोर्ट ने पाया कि सिंह ने “पूरी तरह से असत्यापित सामग्री” के आधार पर वीडियो बनाया है, जिसका शीर्षक “क्लिकबेट” के रूप में जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए रखा गया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वीडियो की सामग्री प्रत्यक्ष रूप से फाउंडेशन की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती है और समाज में अस्वीकार्य प्रथाओं का पालन करने का आरोप लगाती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। अदालत ने पाया कि वीडियो का प्रत्यक्ष प्रभाव फाउंडेशन के संस्थापक की प्रतिष्ठा पर पड़ता है।

यह मामला अब 9 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जबकि अंतरिम राहत याचिका पर अगली सुनवाई 9 मई को होगी।


हाई कोर्ट के आदेश के बाद श्याम मीरा सिंह के अधिवक्ता मयंक यादव द्वारा जारी किया गया बयान पढ़ें….

“दिल्ली हाई कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन (जग्गी वासुदेव) द्वारा दायर एक मानहानि मामले में श्याम मीरा सिंह के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए एक वीडियो को हटाने का अस्थायी आदेश (ad-interim order) दिया है। यह आदेश एकतरफा (ex parte) रूप से दिया गया, यानी बिना श्याम मीरा सिंह को सुनवाई का मौका दिए।

श्याम मीरा सिंह को इस मामले की जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से मिली और उन्हें मुकदमे की कॉपी तभी मिली जब कोर्ट ने आदेश पारित कर दिया।

बयान में कहा गया है कि यह आदेश प्रथम दृष्टया मनमाना और कानून के अनुरूप नहीं प्रतीत होता है। इसलिए श्याम मीरा सिंह इस आदेश के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जांच कर रहे हैं।”


नीरज झा-

क्या श्याम मीरा सिंह को इस केस के बारे में नोटिफाई किया गया?

क्या श्याम मीरा सिंह का पक्ष सुना गया? क्या वीडियो में लगे आरोपों की जांच की गई?

राम रहीम और आसाराम का केस हम सब देख चुके हैं। ऐसे में किस चीज़ का इंतज़ार है?

हद है!!! वीडियो डाउन कर दो। सच बताने वालों की आवाज़ डाउन कर दो!!!

जबकि डाउन केवल एक चीज़ होनी चाहिए – तानाशाही!!!

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