सहारा कर्मियों की तकलीफ को ‘आउटलुक’ मैग्जीन ने भी दी आवाज, पढ़िए भाषा सिंह की रिपोर्ट

आमतौर पर मीडिया वालों की पीड़ा को दूसरे मीडिया हाउस तवज्जो नहीं देते. सहारा मीडिया के कर्मियों की तकलीफ को मुख्य धारा के मीडिया हाउस नहीं उठा रहे क्योंकि हर किसी के यहां कर्मियों का किसी न किसी रूप में शोषण-उत्पीड़न है. यही वजह है कि दैनिक जागरण के सैकड़ों कर्मियों की बर्खास्तगी और उन कर्मियों का आंदोलन किसी मीडिया हाउस के लिए खबर नहीं है.

यही कारण है कि मजीठिया वेज बोर्ड का लागू न करके सुप्रीम कोर्ट को ठेंगा दिखाना किसी के लिए खबर नहीं है. फिर भी अपने अंतरविरोधों के कारण कुछ मीडिया हाउस दूसरे मीडिया वालों की निगेटिव खबरें छापते / दिखाते हैं. आजतक के रिपोर्टर द्वारा दारू का पैसा देकर मनमाफिक खबर गढ़ने का वीडियो जी न्यूज ने जोरशोर से दिखाया क्योंकि जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी के ब्लैकमेलिंग प्रकरण व जेल जाने के प्रकरण को सारे दूसरे न्यूज चैनलों से प्रमुखता से प्रसारित किया था, इसलिए जी न्यूज को जब मौका मिलता है, दूसरे मीडिया हाउसों को नंगा करने से नहीं चूकता.

इस आपसी लड़ाई से फायदा अंतत: दर्शकों / पाठकों को मिलता है क्योंकि उन्हें इसी बहाने मीडिया के अंदर की सच्चाई पता चल पाती है. इसलिए हम लोग दुआ करते रहें कि बड़े मीडिया हाउस वाले आपस में लड़ते रहें ताकि हम सब उनकी नंगई से अवगत रहें. ताजा घटनाक्रम सहारा मीडिया के कर्मियों की पीड़ा को आउटलुक मैग्जीन द्वारा उठाना है. आउटलुक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने इस संकट पर एक रिपोर्ट फाइल की है जिसे आउटलुक की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जा चुका है. आउटलुक से साभार लेकर वह स्टोरी अगले पेज पर प्रकाशित की जा रही है.

-यशवंत
एडिटर, भड़ास4मीडिया
yashwant@bhadas4media.com

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