
सहारा समूह में बतौर विशेष संवाददाता कई वर्षों तक कार्यरत रहे कमल दुबे को लेकर सूचना है कि वह समूह से अलग हो गए हैं. हालांकि, बताया जा रहा है कि संस्थान ने उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया है, लेकिन भड़ास द्वारा, छोड़ा या हटाए गए के सवाल पर वह चुप्पी साध गए.

बताया जा रहा है कि कमल दुबे लम्बे समय से राष्ट्रीय सहारा में बतौर संवाददाता कार्य कर रहे थे, लेकिन 2014-15 में वह एक्जिट प्लान के तहत सहारा छोडकर चले गये थे। हिंदी दैनिक पायनियर समेत कई अखबारों में कार्य करने के बाद उन्हें लगा कि अन्य सभी हिंदी अखबारों में सहारा कहीं न कहीं बेहतर है। इसलिए वह 2021 में दोबारा राष्ट्रीय सहारा में यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और तत्कालीन स्थानीय संपादक रहे विकास शुक्ला की सिफारिश पर दोबारा बतौर विशेष संवाददाता वापस आए और काम करने लगे। लेकिन कुछ दिनों के बाद जैसे ही विकास शुक्ला सहारा छोडकर गये, उसके बाद उनकी किसी वरिष्ठ से बनी नहीं।
सूत्रों की माने तो पहले वह तत्कालीन स्थानीय संपादक रहे कलानिधि, समाचार संपादक अभयानंद शुक्ला फिर मनमोहन अग्रवाल, कमल तिवारी और यूनिट हेड अजीत बाजपेई आदि की शिकायत करते रहे। वर्तमान में उनकी कार्य प्रणाली को देखते हुए सहारा प्रबंधन ने उनका एक्सटेंशन आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है।

भड़ास से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि लोकमत समूह के साथ नई पारी शुरू कर दी है। ऊपर देखें कमल दुबे का 23 अगस्त 2024 को किया गया ट्वीट.
सहारा से दूसरी खबर मनमोहन अग्रवाल को लेकर है. मनमोहन जी सहारा से कार्यमुक्त हो गए हैं. उन्होंने संस्थान को 32 साल दिए. यहां उन्होंने रिपोर्टर से शुरूआत कर स्थानीय संपादक तक का सफर तय किया.
सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कार्य के दौरान तमाम खट्टे मीठे अनुभवों को याद किया. मनमहन अग्रवाल लिखते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भविष्य की नई दिखाओं की तरफ कदम बढ़ाए जाएंगे.

बता दें कि सहारा से मनमोहन अग्रवाल जी तीन सितंबर को कार्यमुक्त हो गए थे.


