लखनऊ। सहारा समूह के दिवंगत प्रमुख सुब्रत रॉय के निधन के बाद अब लखनऊ में उनके साम्राज्य पर बड़ा एक्शन शुरू हो गया है। नगर निगम ने गोमती नगर स्थित 130 एकड़ में फैली लग्जरी ‘सुब्रतो कोठी’ को सील करने की तैयारी कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लाइसेंस डीड की शर्तों के उल्लंघन के कारण उठाया जा रहा है। सीलिंग की प्रक्रिया अगले दो दिनों में पूरी की जाएगी।
क्या है सुब्रतो कोठी?
इस परिसर में संगमरमर से बना महलनुमा बंगला, आधुनिक दफ़्तर, स्टेडियम, ऑडिटोरियम, हेलीपैड, स्विमिंग पूल, झील, क्लब और अस्पताल जैसी तमाम आलीशान सुविधाएँ मौजूद हैं। इसे सहारा समूह की शानो-शौकत और राजनीतिक रसूख का प्रतीक माना जाता रहा है।
जमीन आवंटन और नियमों का उल्लंघन
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि 1994-95 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने सहारा समूह को नगर निगम के माध्यम से लखनऊ में 170 एकड़ जमीन आवंटित की थी। इसमें से 130 एकड़ जमीन लाइसेंस डीड के तहत आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए दी गई थी।
लेकिन नियमों का पालन करने के बजाय इस जमीन पर भव्य ‘सुब्रतो कोठी’ का निर्माण कर दिया गया। यहाँ गोल्ड क्लास थिएटर से लेकर 5,000 लोगों की क्षमता वाला सभागार जैसी लग्जरी सुविधाएँ बनाई गईं। नगर निगम का आरोप है कि यह निर्माण आवंटन की शर्तों के खिलाफ है।
नोटिस, जवाब और निगम की तैयारी
नगर निगम ने सहारा समूह को नोटिस जारी कर जवाब माँगा था। समूह की ओर से जवाब दाखिल भी किया गया, लेकिन उसे निगम ने असंतोषजनक मानकर खारिज कर दिया। इसके बाद तय समय सीमा खत्म होते ही अब निगम सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर रहा है।
सीलिंग की प्रक्रिया
- निगम की योजना के अनुसार,
- सबसे पहले परिसर को खाली कराया जाएगा। यहाँ रह रहे कर्मचारियों, सुरक्षा गार्डों और केयर टेकर को जगह खाली करने का निर्देश दिया जाएगा।
- इसके बाद सभी गेट बंद कर दिए जाएँगे। शुरुआत में एक गेट से सीमित आवाजाही की अनुमति होगी, लेकिन अंततः मुख्य गेट भी बंद कर निगम पूरी तरह कब्ज़ा ले लेगा।
- सीलिंग के बाद नगर निगम अपनी सुरक्षा व्यवस्था तैनात करेगा।
कोर्ट में कैविएट
नगर आयुक्त ने कहा कि नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट भी दाखिल किया है। इसका मतलब है कि अगर सहारा समूह इस मामले को कोर्ट में चुनौती देता है, तो पहले निगम का पक्ष सुना जाएगा।
सहारा साम्राज्य और राजनीतिक चमक
कभी यह परिसर सहारा समूह की शक्ति और रुतबे की पहचान हुआ करता था। यहाँ बॉलीवुड से लेकर राजनीति की बड़ी हस्तियाँ आती थीं। अमिताभ बच्चन और मुलायम सिंह यादव समेत कई नामी चेहरे इस कोठी में देखे जाते रहे हैं।
लेकिन सुब्रत रॉय के निधन के बाद समूह की संपत्तियों पर सरकारी दबाव तेज़ हो गया है। अब तक नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) करीब 270 एकड़ जमीन पर कब्ज़ा कर चुके हैं।


