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उत्तर प्रदेश

सहारा कर्मियों के धरने का 51वां दिन-प्रशासन भी नहीं सुलझा सका सैलरी का मुद्दा

लेबर कमिश्नर ने काटा 48 लाख 58 हजार 430 रुपए का चालान

“सिंहासन खाली करो कि …” प्रसिद्ध कवि दिनकर की यह पंक्ति अत्याचार, शोषण और तानाशाही के खिलाफ जनता के उदय को दर्शाती है…दिनकर ने अपनी कविता के जरिए शासकों को चेतावनी दी थी कि जनता अब जाग चुकी है वे अब अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे लेकिन सहारा प्रबंधन ने इसको भी झुठला दिया है। कर्मचारियों पर झूठी एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश से नाकाम होने के बाद बुधवार को नई चाल चली।

50 दिनों से सैलरी की मांग को लेकर धरना दे रहे सहारा कर्मचारियों को सहारा प्रबंधन ने पहली बार बातचीत का न्योता दिया लेकिन कर्मचारी जब बातचीत के लिए पहुंचे तो प्रबंधन की मंशा जानकर दंग रह गए। खास बात है कि एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह, हरिदर्शन थाना का प्रभारी राहुल और सेक्टर 24 थाना के एसएचओ विद्युत गोयल मौजूद थे। मकसद था सैलरी की मांग कर रहे कर्मचारियों और सहारा प्रबंधन के बीच समझौता कराना था।

बैठक जब शुरू हुई तो सैलरी का मुद्दा गौन हो गया। प्रबंधन की तरफ से कहा गया कि सीईओ सुमित रॉय के दफ्तर आने के लिए मुख्य गेट को खोला जाए जिससे कि वह गाड़ी समेत कार्यालय आ सके। कर्मचारियों की तरफ से इसका विरोध किया गया और सैलरी का मुद्दा उठाया गया लेकिन प्रबंधन कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुआ। आखिरकार एसीपी स्वतंत्र कुमार ने हस्तक्षेप किया और तय हुआ कि कंपनी के वरिष्ठ और बुजुर्ग अधिकारी मधुकर ही गाड़ी समेत मुख्य गेट से अंदर आ जा सकेंगे जबकि सीईओ सुमित रॉय को दूसरे गेट से ही आना होगा। इस तरह करीब डेढ़ घंटे चली बैठक सैलरी के मुद्दे पर चर्चा के बगैर खत्म हुई। कुल मिलाकर नतीजा कुछ भी नहीं निकला। प्रबंधन की तरफ से संपादक संजय मिश्र मुद्दे को भटकाने में लगे रहे और कर्मचारियों की सैलरी को लेकर जिक्र ही नहीं किया।

बुधवार की बैठक को लेकर अब इस बात की चर्चा जोरों पर है कि इतना कुछ हो जाने के बाद भी कैसे सहारा प्रबंधन पुलिस अधिकारियों के समय का दुरुपयोग कर रहा है। सिर्फ सीईओ की एंट्री को लेकर अपने संपर्क का सहारा लेकर पुलिस अधिकारियों की भी परेड करा रहा है। कर्मचारियों ने तय किया है कि सैलरी के मुद्दे के अलावे अब किसी मुद्दे पर प्रबंधन से बातचीत नहीं की जाएगी साथ ही अब जिलाधिकारी से रिकवरी चालान को लेकर बातचीत किया जाएगा।

इस बीच गुरुवार को लेबर कमिश्नर ने एक और रिकवरी चालान काटा है जिसमें सहारा प्रबंधन को 15 दिनों के अंदर 48 लाख 58 हजार 630 रुपए 15 दिनों के अंदर जमा करने कहा गया है अन्यथा दंडात्मक कारवाई की चेतावनी दी गई है। सहारा प्रबंधन को चालान भेज दिया गया है।

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