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‘सब्जेक्ट मंथन’ का साहित्य समग्र विशेषांक लोकार्पित, ‘धर्मयुग’ के दिए साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्कार पर हुई चर्चा


मुंबई। डॉ. धर्मवीर भारती ने ‘अभ्युदय’ के संपादक पद्मकान्त मालवीय और ‘संगम’ के संपादक इलाचंद्र जोशी से पत्रकारिता के गुर सीखे थे। उनकी यही सीख ‘धर्मयुग’ में प्रतिबिम्बित हुई, जिसके वे संपादक थे। ये विचार प्रख्यात लेखिका पुष्पा भारती ने साप्ताहिक ‘सब्जेक्ट मंथन’ (संपादक: महेश अग्रवाल) के ‘साहित्य समग्र’ विशेषांक का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किए।

इस विशेषांक के अतिथि संपादक वरिष्ठ पत्रकार विमल मिश्र हैं। पुष्पा भारती बांद्रा के उत्तर भारतीय संघ के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में हुए सत्कार समारोह में बोल रही थीं। समारोह में ‘धर्मयुग’ के वरिष्ठ पत्रकार व कलाविद मनमोहन सरल और इस पत्रिका के संपादक रहे विश्वनाथ सचदेव का भी सम्मान किया गया। इससे पहले एक अन्य समारोह में पत्रिका का विमोचन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किया।

आयोजन में ‘धर्मयुग: यादें बाकी हैं’ विषय पर विशद चर्चा हुई। पत्रिका की यह आवरण कथा ‘धर्मयुग’ से जुड़ी रहीं वरिष्ठ पत्रकार सुदर्शना द्विवेदी ने लिखी है। आयोजन में ‘धर्मयुग’ से जुड़े रहे लगभग 20 लोगों ने अपने – अपने हिस्से के ‘धर्मयुग’ को याद किया। दिग्गज कथाकार सूर्यबाला ने कहा, ‘धर्मयुग ने हमें न केवल साहित्यिक, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने के भी संस्कार दिए जो जीवन में बहुत काम आए।’ कथाकार,पत्रकार हरीश पाठक ने कहा, ‘धर्मवीर भारती का लिखा शब्द-शब्द इतिहास है।’ सुदर्शना द्विवेदी ने कहा, ‘धर्मयुग कालांतर तक तमाम मनों और दिलों में धड़कता रहेगा।’

डॉ. शोमा घोष, अनुराग चतुर्वेदी, हरि मृदुल, अनुराग त्रिपाठी, सुनील मेहरोत्रा, डॉ. शीतला प्रसाद दुबे, कमलेश पाठक, आदि ने ‘धर्मयुग’ को लेकर अपने अनुभव साझा किए। इस आत्मीय उत्सव का संयोजन वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश सिंह व संचालन ओमप्रकाश तिवारी ने किया। इस अवसर पर ‘धर्मयुग’ से जुड़े विनीत शर्मा, ऊषा मखीजा, शहनाज राजन, मंगला कुंडेटकर, शहनाज राजन, वसंत नाफड़े, आदि के साथ राधेश्याम तिवारी, शुभंकर घोष, हूबनाथ पांडेय, चित्रा देसाई, अनुराधा सिंह, विनोद दास, ओमा शर्मा, गंगाशरण सिंह, डॉ. दयानंद तिवारी, देवमणि पांडेय, विजय सिंह,अभय मिश्र, अनिल गलगली, हरगोविंद विश्वकर्मा, राजकुमार सिंह, विजय सिंह, अनिल गलगली,जगदीश अग्रवाल, अभय मिश्र आदि साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, फिल्म और रंगमंच से जुड़े लोग मौजूद थे।

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