यशवंत सिंह-
ये वाला पूरा प्रकरण ही फ़र्ज़ी था। चार लोगों ने मिलकर एक काल्पनिक लड़की को जन्म दिया और उस लड़की के माध्यम से सारे आरोप लगवाए गए। जब लड़की असल में है ही नहीं तो वो पुलिस को कैसे मिलती!
NHRC के 2 बार डायरेक्शन पर दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने केस फॉलो किया, जरूरी इंक्वायरी की और हर संबंधित व्यक्ति को अप्रोच किया। कंप्लेंट और Complainant को वेरिफाई करने की भी कोशिश की। आज 3 महीने हो गए हैं। कोई नहीं मिला।
3 पेज के एनोनिमस पोस्ट में कोई दिन तारीख समय क्यों नहीं है? क्योंकि सब काल्पनिक और मनगढ़ंत है ताकि बदनाम किया जा सके। जिस उमर को आरोपी बनाया गया वो अब पीड़ित के रूप में सामने है। एक महिला सहयोगी ने साजिशन स्टोरी प्लांट कर साफ साफ बदनाम करने के लिए उकसाया है। इस साजिश में कई लोग शामिल हैं। पूरी पोस्ट का सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है।
The most important point is that the post and the fake ID were made from the phone of a man.
एक Serial accuser लड़की ने अपने तीन मित्रों के सहयोग से उमर को राइट विंग फोर्सेज से मोब लिंच कराने के लिए पूरा षड्यंत्र रचा और पोस्ट किया!
उमर की नौकरी गई, जान बचाने के लिए भागा-भागा रहना पड़ा, बहुत सारी जांचों की प्रताड़ना झेली, समाज में और मीडिया में गुनहगार के रूप में स्थापित किया गया, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि ये मुस्लिम हैं और अपने पत्रकारीय कर्म में दक्ष थे! जलन में तपे दो महिलाओं और दो पुरुषों वाले हिंदू गैंग ने इन्हें हिंदू मुस्लिम साज़िश के प्लॉट पर लव जिहाद टाइप कहानी बनाकर जमींदोज़ करा दिया।
मुझे जब सच्चाई पता चली तो सबसे पहले भड़ास पर प्रकाशित दोनों ख़बरों को डिलीट कर दिया और उमर से अपनी तरफ़ से क्षमा माँग रहा हूँ, अनजाने में साजिश को भड़ास पर स्थान देने के लिए!
(अगर इस प्रकरण में आरोप लगाने वाली पीड़िता की तरफ़ से नए तथ्य प्रमाण सुबूत सामने लाए जाते हैं तो उसे भी स्थान दिया जाएगा। हमारी कोशिश दोनों पक्षों की बातें सामने लाने की है। सही ग़लत कौन है, इसका आख़िरी फ़ैसला कोर्ट को करना है।)


