अमिताभ श्रीवास्तव-
बीजेपी अपने हर मक़सद को पूरा करने के लिए और हर विरोध को कुचलने के लिए किस क़दर ख़ूँख़ार तरीके से ऑपरेट करती है। उपराष्ट्रपति पद पर चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सी पी राधाकृष्णन को जीतने में कोई दिक्कत होगी ऐसा संख्या बल के आधार पर नहीं लग रहा है लेकिन फिर भी बीजेपी जिस तरह आक्रामक होकर चौतरफ़ा गोलबंदी कर रही है, उससे साउथ बनाम साउथ के इस मुकाबले में शायद विपक्ष के तेवरों से सत्तापक्ष में थोड़ी घबराहट भी दिख रही है।
विपक्ष के उम्मीदवार पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी सुदर्शन रेड्डी को पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद का समर्थक बताकर उन पर हमला किया। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कुछ रिटायर्ड जजों ने अमित शाह की टिप्पणी की आलोचना की और इसे न्यायपालिका की आजादी पर प्रहार कहा। तिलमिलाई बीजेपी ने रविशंकर प्रसाद के जरिये न सिर्फ खुद एक पार्टी के तौर पर जजों के साझा बयान पर तुरंत जवाबी हमला किया बल्कि नक्सली हिंसा के शिकार हुए लोगों से भी सुदर्शन रेड्डी के विरोध में बयान जारी करवा दिया।
इतने पर भी संतोष नहीं हुआ तो अब रेड्डी समर्थक जजों के जवाब में बीजेपी की तरफ से बैटिंग करने के लिए 56 पूर्व जजों को मैदान में उतार दिया गया है जो कह रहे हैं कि 18 ‘ब्रदर’ जज बी सुदर्शन रेड्डी का समर्थन कर ही क्यों रहे हैं।

इन 56 लोगों में पूर्व चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई भी शामिल हैं। वही रंजन गोगोई जिन्होंने पहले सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक क्रांतिकारी प्रेस कॉंफ़्रेंस में न्यायपालिका की आजादी पर ख़तरे की आवाज़ बुलंद की और बाद में चीफ़ जस्टिस के पद से रिटायर होने पर राज्यसभा सांसद बन गये, यह दावा करते हुए कि उनका इरादा दरअसल न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच पुल बनाना हैं। अब यह सबको दिख चुका है कि शातिर गोगोई सिर्फ अपने लिए पुल बना रहे थे। रिंद के रिंद रहे, हाथ से जन्नत न गई।
सुदीप ठाकुर-
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए विपक्षी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी पर नक्सल समर्थक होने का आरोप लगाकर बड़ा हमला किया है। दिलचस्प यह है कि जिस सलवा जुड़ूम (Salwa Judum) को लेकर शाह ने जस्टिस सुदर्शन रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, उसका विरोध करने वालों में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी थे!
हरिवंश 2006 को बस्तर में सलवा जुड़ूम के कारण उपजी हिंसा का जायजा लेने गए एक इंडिपेंडेंट सिटीजन इनिसिएटिव का हिस्सा थे। इस दल ने दक्षिण बस्तर के गांवों के जमीनी हालात को देखने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की थी।
हरिवंश तब प्रभात खबर के संपादक थे। उनके साथ इस दल में जाने माने इतिहासकार रामचंद्र गुहा, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता फरहा नकवी, पूर्व नौकरशाह ई ए एस सरमा, प्रोफेसर नंदिनी सुंदर और हिंदुस्तान टाइम्स तथा इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों के पूर्व संपादक बी जी वर्गीज शामिल थे।
रामचंद्र गुहा ने thelens से पुष्टि की है कि हरिवंश उनके साथ इस दल में शामिल थे। क्या भाजपा अब हरिवंश से इस्तीफा लेगी?




Alok Shukla
August 28, 2025 at 6:54 am
बंधु, 60 अन्य जजों ने विरोध को जायज़ बताया है कि रिटायर्ड होने के बाद जैसे ही आप राजनीति में आते हैं, खूद को आलोचनाओ के लिए प्रस्तुत कर देते हैँ । ये महोदय न्यायपालिका का हिस्सा थे , अब ये उसका हिस्सा नहीं है। जज कोई भगवान नहीं होता है कि उसका हर किया गया कार्य अंतिम लकीर हो। दूसरी बात न्यायपालिका के किसी फैसले की आलोचना हमेशा से विपक्ष करता आ रहा है तो ये हक़ पक्ष को भी होगा न ? जनतंत्र में केवल एक को ही हर बात कहने का हक़ उसका अपमान है जिसे आप तो कर ही रहे हैं ।