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साहित्य

मैंने अभी-अभी मृत्यु को देखा है, वह मुझ पर क्रोधित है!

गीत चतुर्वेदी-

एक महान सेनापति चौराहे से गुज़र रहा था कि उसे एक स्त्री दिखाई दी. वह लगातार उसे घूरे जा रही थी. उसे देख सेनापति बुरी तरह डर गया.

सेनापति दौड़ा-दौड़ा राजा के पास गया. बोला, ‘मैंने अभी-अभी मृत्यु को देखा है. वह मुझ पर क्रोधित है. लगता है, मेरे पीछे पड़ी है. वह मेरे घर का पता जान गई है. मैं अगर घर गया, तो वह मुझे मार डालेगी. राज्य का सबसे तेज़ घोड़ा दीजिए, मैं समरकंद जाकर छुप जाऊंगा. उसे पता नहीं चलेगा.’

उसने घोड़ा लिया और सरपट दौड़ा दिया.

राजा ने अपने सिपाहियों को भेज चौराहे से उस स्त्री को बुलवाया और पूछा, ‘क्यों डरा रही हो उसे?’

स्त्री ने कहा, ‘मैं उसे डरा नहीं रही थी, बल्कि उसे देख हैरान हो रही थी. कल की तारीख़ में मेरी समरकंद में उससे मुलाक़ात तय है. उसे यहां देख मैं सोच रही थी कि वह इतनी जल्दी समरकंद कैसे पहुंच पाएगा.’

‘समरकंद में मृत्यु’ शीर्षक से यह बहुत प्रसिद्ध कथा है. इसे कई दार्शनिकों ने अपनी-अपनी तरह से पढ़ा है. इसमें कई सारे इशारे हैं, लेकिन एक बात बहुत स्पष्ट है कि जीवन में कुछ चीज़ों से भयभीत होकर हम उनसे दूर भागते हैं, तब यह भूल जाते हैं कि जीवन एक वृत्त है. किसी एक बिंदु से हम जितना भी दूर भागेंगे, दूसरी तरफ़ से वह बिंदु हमारे उतना ही क़रीब आता जाएगा.

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