
मनोज सिंह-
छत्तीसगढ़ का चर्चित कोयला लेवी घोटाला मामले में जेल में बंद आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई है. ईडी द्वारा दर्ज मनि लांड्रिंग केस में ये आरोपी अधिकारी पहले से ही जेल में हैं, ऊपर से आज IAS रानू साहू की सेंट्रल जेल से रिहाई रुक गई.
हुआ यूं कि, आईएएस रानू साहू को जैसे ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. फौरन इओडब्ल्यू ने आईएएस रानू साहू, आईएएस समीर बिश्नोई और पूर्व मुख्यमंत्री सचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का नया केस दर्ज कर लिया. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुए इस नए केस के बाद सभी अफसरों के सलाखों से बाहर निकलने का रास्ता बंद नजर आने लगा है. तीनों ही अफसर दो साल से अधिक समय से सेंट्रल जेल रायपुर में बंद हैं.
इओडब्ल्यू के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री सचिव सौम्या चौरसिया और उनके परिवार के नाम 9 करोड़ 20 लाख रुपए की 29 अचल संपत्ति मिली है. आईएएस रानू साहू व उनके परिजनों के नाम से 4 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति मिली है. आईएएस समीर विशनोई की पत्नी प्रीति गोधरा के नाम से पांच करोड़ रुपए की संपत्ति मिली है. तीनों अफसर सूर्यकान्त तिवारी के माध्यम से कोयला व्यापारियों से प्रति टन 25 रुपए की होने वाली अवैध वसूली में लिप्त थे. कोयला कारोबारियों से रोज करीब 15 से 20 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की जाती थी. तीनों अफसरों के खिलाफ नए कानून बीएनएस की धारा 173 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया है.
बकौल इओडब्ल्यू, आईएएस रानू साहू साल 2010 की भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं, जो छत्तीसगढ़ के जिलों में सीईओ, नगर पालिक निगम बिलासपुर, कलेक्टर बालोद, कलेक्टर कोरबा और कलेक्टर रायगढ़ के पद पर पदस्थ रहीं हैं. रानू साहू जुलाई 2021 से जुलाई 2022 तक कलेक्टर कोरबा के रूप में पदस्थ रहीं. इस दौरान सूर्यकांत तिवारी और उसके सिंडीकेट के सदस्यों के साथ मिलकर उन्होंने ने कोयला ट्रांसपोर्टरों से डीओ व टीप परमिट जारी के एवज में 25 रूपए प्रतिटन की अवैध वसूली कीं. रानू साहू ने अपने व परिवार के सदस्यों के नाम पर साल 2015 से अक्टुबर 2022 तक रायपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद और राजनांद गावं में 3 करोड़ 93 लाख 91 हजार 949 रूपए की जमीन खरीदीं. जबकि रानू साहू को अप्रेल 2011 से 31 अक्टूबर 2022 तक वेतन के रूप में लगभग 92 लाख रॉय सरकार से मिले हैं. इस स्रोत से आय की तुलना में उन्होंने लगभग 3 करोड़ 93 लाख 91 हजार 949 रुपय अचल संपत्ति में निवेश किया है. साथ ही रानू साहू ने अन्य अचल संपत्ति, बीमा, शेयर, एसआईपी में भी निवेश किया है.
इओडब्ल्यू के मुताबिक सौम्या चौरसिया तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार में डिप्टी सेक्रेटरी मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ रहते हुए कोयला घोटाले के अवैध सिंडिकेट का हिस्सा रही हैं. सौम्या चौरसिया राज्य प्रशासनिक सेवा साल 2008 बैच की अफसर हैं. जो नगर निगम बिलासपुर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पाटन एवं अन्य शासकीय पदों पर कार्यरत रहीं हैं. दिसम्बर 2019 से नवम्बर 2022 तक मुख्यमंत्री कार्यालय उप सचिव के पद पर पदस्थ थीं. इस दौरान उन्होंने ने रायगढ़, रायपुर, धमधा जिला दुर्ग समेत अन्य जिलों में 2 करोड़ 27 लाख रूपए की जमीं और फ़्लैट खरीदीं. इसके अलावा सौम्या चौरसिया ने अपने परिजनों के नाम पर 5,38,69,500 रुपए. और परिचितों के नाम पर लगभग 3,83,20,000 रुपए की बेनामी अचल संपत्ति खरीदी हैं. उन्होंने ने अपने पारिवारिक सदस्यों एवं परिचितों के नाम पर 29 अचल संपत्तियां खरीदीं हैं. इस संपत्ति को सौम्या चौरसिया ने जुलाई 2021 से जून 2022 तक एक साल में 9,21,89,500 रूपए को खरीदीं हैं. जबकि सौम्या चौरसिया 31 अक्टूबर 2022 तक वेतन एवं अन्य भत्तों से प्राप्त आय लगभग 85 लाख 50 हजार रूपए है.
EOW के मुताबिक समीर बिश्नोई की बात की जाए तो उनके पास साल 2010 से 2022 तक का कुल वेतन 93 लाख रुपए सरकार से मिला है. इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी प्रीति गोधरा के नाम से 5 करोड़ रुपए की कई अचल संपत्ति खरीदी. जो समपत्ति उनके सरकारी वेतन से 500 गुना ज्यादा है.
इओडब्ल्यू ने दावा किया है कि अवैध कोल लेवी वसूली का मामला ईडी की रेड में पकड़ा गया था. कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था. इसके लिए खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक रहे IAS समीर बिश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को आदेश जारी किया था.राज्य सरकार के इशारे पर सिंडिकेट बनाकर वसूली की जाती थी. पूरे मामले का मास्टरमाइंड कोल व्यापारी सूर्यकांत तिवारी है. सूर्यकांत तिवारी व्यापारियों से 25 रुपए प्रति टन के हिसाब से अवैध रकम वसूलता था. और पैसे को अफसरों से नेताओं तक को उनका हिस्सा पहुँचता था.
बता दें कि छत्तीसगढ़ में साल 2019 से 2023 तक शराब. कोयला, महादेव बेटिंग ऐप समेत पांच से अधिक जालसाजियां हुईं. अफसरों और नेताओं ने जमकर पैसे बनाये. कुछ ने बेनामी संपत्ति राज्य में ख़रीदीं तो कुछ ने विदेशों में पैसे को खपाया. ईडी ने दो आईएएस अफसर, प्रशासनिक अफसर और एक केंद्रीय दूर संचार विभाग के अफसर समेत करीब 20 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा है. इन आरोपियों में किसी भी आरोपी को जमानत मिलती है तो एक नया केस दर्ज होता है. इससे साफ है की भ्रष्टाचारी अफसरों को सरकार जेल से बाहर आने देना नहीं चाहती है.
रायपुर से वरिष्ठ पत्रकार मनोज सिंह की रिपोर्ट..


