दिल्ली सरकार के एक स्कूल में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला जा रहा!

केजरीवाल जी, आप बता दो, क्या मैडम की जांच होगी और गरीबों को न्याय मिलेगा?

राजधानी दिल्ली के विवेक विहार में राम मंदिर के आगे पार्क के पास एक दिल्ली सरकार का स्कूल है जहाँ भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला जा रहा है. गरीबों के बच्चों का एडमिशन मना कर दिया जाता है और पीछे से जिसका जुगाड़ पार्षद तक है उसी के बच्‍चे का एडमिशन होता है। इस बात का जीता जागता सबूत है कि एक दिन एक पत्रकार बंधु एडमिशन कराने के लिए प्रिंसिपल महोदया के पास गए तो उन्होंने साफ़ कह दिया कि सीटें तो फुल हैं लेकिन पार्षद कहेंगी तो एडमिशन होगा। 

कल्पना कीजिये कि जिस गरीब आदमी कि पहुँच पार्षद तक न हो उसके बच्चों का एडमिशन कैसे होगा? स्कूल के गेट के बाहर आने पर सारी पोल और खुल गई। तमाम लोग गेट पर खड़े थे। उन्हें अंदर नहीं आने दिया जा रहा था जबकि वो लोग एडमिशन के लिए परेशान थे। कुछ तो टीसी के लिए परेशान दिखे। लेकिन इन्हें अंदर ही नहीं आने दिया जाता है।

आम आदमी के बच्‍चों का एडमिशन मैडम की तानाशाही के कारण नहीं हो रहा है। जिनका जुगाड है वह लोग तो एडमिशन करवा ले रहे हैं मगर आम आदमी जो पढा लिखा नहीं है वही अब भ्रष्‍टाचार का शिकार हो रहा है जिसकी सुनवाई दिल्‍ली सरकार भी नहीं कर रही है। अब यह लोग अपने बच्‍चों को क्‍या पढाएंगे, यह तो केजरीवाल साहब बताएंगे।   

प्रिंसिपल मैडम बहुत कानून जानती हैं लेकिन शायद शिक्षा विभाग के मंत्री जी और डायरेक्टर साहब ने शायद उन्हें शिक्षा का अधिकार कानून नहीं पढ़ाया है कि एडमिशन के लिए मना नहीं कर सकती हैं लेकिन पार्षद का आशीर्वाद है तो मनमानी खूब चल रही है। मैडम कहती हैं कि हम किसी विधायक या मंत्री को नहीं जानते हैं। जबकि स्कूल की अगर ठीक तरीके से ऑडिट करा ली जाए तो बहुत गोलमाल मिलेगा। कंप्यूटर लैब में तो खूब गोल माल हुआ है। सेटअप असेंबल किया हुआ लगाया लगता है। इसका बिल किस कंपनी का है, यह तो डायरेक्टर साहब ही जानें।

सवाल यह है कि इन गरीबों की सुनवाई कौन करेगा? मैडम करती नहीं हैं। अब केजरीवाल जी, आप बता दो, क्या मैडम की जाँच होगी और गरीबों को न्याय मिलेगा?

अजीत कुमार पाण्‍डेय
पत्रकार
ajit.editor@gmail.com

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