कभी-कभी पत्रकारिता की डिग्री में आग लगाकर इसे जलते देखने की तमन्ना होती है

अपने हाथों मीडिया लिख रहा अपना मृत्युलेख….. देश के प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाने वाला पत्रकारिता आज खुद की साख पर सवाल खड़ा कर बैठा है. प्रलोभन और टीआरपी की भागदौड़ ने पत्रकारिता का उद्देश्य निरर्थक कर दिया है. आज पत्रकारिता का हाल कुछ यूँ हो गया है कि लोगों ने प्रजातंत्र के चौथा स्तंभ से कन्नी काटना शुरू कर दिया.

रिसर्च में करियर बनाने का अवसर, एम.एससी. (मीडिया रिसर्च) में पांच जून तक प्रवेश जारी

भोपाल| माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवम संचार विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा चलाये जा रहे एम.एससी. (मीडिया रिसर्च) कोर्स में प्रवेश जारी है| जो विद्यार्थी मीडिया, संचार, विज्ञापन, मार्केट और मार्केटिंग रिसर्च में करियर बनाना चाहते है, वे 5 जून, 2017 तक विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.mcu.ac.in या एमपीऑनलाइन के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं|

हिंदी विवि वर्धा में यौन दुर्व्यवहार के आरोपी के साथ मजबूती से खड़ा है प्रशासन, पीड़िता धरने पर बैठी

महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा में विगत एक माह पूर्व 13 मार्च होली के दौरान पीएचडी शोधार्थी संजीव कुमार झा के द्वारा एम. फिल. की शोधार्थी गीता (काल्पनिक नाम) के साथ सार्वजनिक स्थल पर यौन-दुर्वय्वहार किया गया. पीड़िता पिछले एक महीने से न्याय के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के पास शिकायत लेकर जाती रही है. इसकी शिकायत उसने महिला प्रकोष्ठ में भी की, लेकिन आरोपी पर कोई कार्यवाही नहीं की गई.

बीएचयू पीएचडी एंट्रेंस की टॉपर बनी आदिवासी लड़की

Tauseef Goyaa : देश में वैसे तो दलितों और आदिवासियों की स्थिति सामान्य नहीं है। जेएनयू जैसे संस्थान में अभी तक दूर दराज और वंचित तबके से आने वाले छात्रों के लिए डिप्राइवेशन प्वाइंट मिलते थे। लेकिन अब बंद कर दिए गए हैं। ऐसे में वंचित तबके से आने वाले छात्रों को शिक्षा के द्वार बंद करने की कोशिश की जा रही है। जो व्यक्ति अपने पेट की आग को ठंडा करने के लिए सारा दिन काम करता है और तब भी बमुश्किल ही सारे परिवार के लिए खाना जुटा पाता है उससे यह उम्मीद करना करना की वह पैसे के बल पर अपने बच्चे को स्कूल भेजेगा बेमानी ही है। इन सबके बीच जब कोई आदिवासी छात्र बीएचयू जैसे संस्थान से पीएचडी की प्रवेश परीक्षा निकालता है तो यह बड़ी बात होती है।

Loot in private schools

Hon’ble District Magistrate Madam,

With a lot of grief and pain I am writing to you that my two daughters are studying in Adharsheela Global School, Sector – 3, Vasundhara, Ghaziabad in class 6th & 7th respectively. The problem of school’s compulsion to buy BOOKS & STATIONERY” from school only, persists this year too.

एमपी में पत्रकारिता के छात्र हत्यारे नाथूराम गोडसे को महापुरुष के रूप में पढ़ रहे

Pankaj Chaturvedi : मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार में पत्रकारिता के विद्यार्थियों को पढ़ाई जाने वाली एक किताब में महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को महापुरुष बता कर पढ़ाया जा रहा है । देश के भावी पत्रकारों को पढ़ाई जाने वाली किताबें भी देश की बदली हुई हवा के मुताबिक ढाल कर बनाई जाने लगी है। जिसका ताजा उदाहरण माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की पत्रकारिता पुस्तक में देखा जा सकता है।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के मुताबिक भीख से चलते हैं मीडिया संस्थान!

रायपुर : काठाडीह स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि एक बार फिर अपनी हरकतों से सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बना है एक प्रश्नपत्र। MSC इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग के थर्ड सेमेस्टर के क्वेश्चन् पेपर के सवाल नम्बर 5 में विवि ने पूछा है कि मीडिया संस्थान के लिए धन की व्यवस्था कैसे होती है? और जवाब के विकल्प में भीख और दान जैसे शब्द शामिल हैं। आपको बता दें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पूर्व विभागाध्यक्ष नरेंद्र त्रिपाठी भी अपने चहेते छात्रों की फर्जी अटेंडेंस लगवाते कैमरे में कैद हुये थे जिसे न केवल खबर बनने से रोका गया बल्कि एक छात्र को गैर क़ानूनी तरीके से बिना कारण बताये मुख्य परीक्षा से वंचित भी कर दिया गया।

दीपावली सांग के लिए इस स्कूल प्रेयर से भला अच्छा क्या हो सकता है (सुनें)

Yashwant Singh : दिवाली सांग… मेरठ में मेरे एक मित्र हैं Vishal Jain जी. कई स्कूलों के संचालक हैं. खुद काफी इन्नोवेटिव हैं. नया नया खोजते रचते रहते हैं. इन्होंने अपने स्कूल प्रेयर के लिए अदभुत गीत तैयार कराया है. सुबह सुबह इनके स्कूलों में जो प्रार्थना बच्चे गाते हैं, उसे सुनकर खुद ब खुद बच्चों संग गाने का मन करने लगता है.

मौत के सौदागर बने कोटा के कोचिंग सेंटर संचालक…. इस साल 16 छात्रों ने आत्महत्या की

इसे शिक्षा का व्यवसायीकरण कहें। युवा पीढ़ी का भटकाव या परिजनों की निगरानी में न रहना या फिर भ्रष्ट होती जा रही व्यवस्था में निराशा का माहौल वजह जो भी हो दूरदराज शहरों में भविष्य बनाने जा रहे युवाओं में से काफी मौत को गले लगा रहे हैं। रात-दिन मेहनत कर पैसे जुटाने वाले परिजन सदमे में जा रहे हैं। स्थिति यह है कि एजुकेशन हब के नाम से प्रसिद्ध हो चुके राजस्थान के कोटा में इस साल 16 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है। ये बात और दर्दनाक है कि इनमें से अधिकतर बिहार के हैं। हाजीपुर के अंकित गुप्ता ने चंबल नदी में छलांग लगाकर इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि वह मेडिकल फील्ड में जाने के अपने माता-पिता के सपने को पूरा नहीं कर पा रहा था।

खबरों के काले धंधे पर वरिष्ठ पत्रकार सुभाष गुप्ता ने की पीएचडी : पेड न्यूज पर चिंता महज एक दिखावा है…

प्रो. सुभाष गुप्ता

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार सुभाष गुप्ता को मैनेज्ड/पेड न्यूज के प्रभावों पर शोध के लिए पी-एच. डी. की उपाधि प्रदान की गई है। श्री गुप्ता ने अपने शोध में पाया है कि देश में सबसे बड़े स्तर यानि राष्ट्रपति के चिंता जाहिर करने और संसद, सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष के नेताओं, प्रेस काउंसिल, निर्वाचन आयोग तक के इसके विरोध में बार-बार आवाज उठाने के बावजूद देश में पेड न्यूज के काले खेल को खुली छूट मिली हुई है। स्थितियां ये दर्शा रही हैं कि पेड न्यूज पर चिंता जाहिर करना, एक दिखावा बन कर रह गया है।

इस भ्रष्ट व्यवस्था में बच्चों की तथाकथित उच्च शिक्षा पर लाखों रुपये न फूंकें!

सामान्य शिक्षा दिलाइए और खर्चीली उच्च शिक्षा पर व्यय होने वाले धन को बच्चों के नाम फिक्स डिपॉजिट कर दीजिए… अभी कुछ दिन पहले एक बड़े अखबार में सर्वे आया था। अमेरिका के युवाओं की बाबत। सर्वे इस बात पर था कि अमेरिका में शैक्षिक ऋण और इस ऋण से हुई पढ़ाई के बाद रोजगार की क्या हालत है। अमेरिका जैसे अतिशय सम्पन्न देश में सर्वे में शामिल युवाओं में से एक चौथाई का मानना था कि वे इस ऋण के जंजाल से बाहर आने के लिए अपनी किडनी तक बेचने को तैयार हैं क्योंकि निरन्तर रोजगार का भरोसा अब नहीं रहा। इस सर्वे को पढ़ने के बाद तत्काल मुझे बहुत पहले खुशवंत सिंह साहब का लिखा एक लेख याद आया जिसमें उन्होंने लिखा था यूरोप और अमेरिका में कई बार पढ़ाई इतनी मंहगी हो जाती है कि कालांतर में सामान्य विद्यार्थी उतना भी नहीं कमा पाते जितना उनकी पढ़ाई पर खर्च हुआ।

एक मैग्जीन ऐसी भी… इंटरव्यू विशाल जैन (एडिटर इन चीफ)

Vishal Jain

Yashwant Singh : एक मेरे पुराने मित्र हैं. विशाल जैन. आजकल वे एजुकेशन और स्कूलिंग के फील्ड में कई नए प्रयोग कर रहे हैं. एक रोज उनसे मुलाकात हुई तो सामने टेबल पर रखी उनकी मैग्जीन पर भी नजर चली गई. इसके पन्ने पलटने लगा. लगा कि इसके बारे में सबको बताना चाहिए. क्या खूब हो कि आपका बच्चा स्कूल पढ़ने गया हो और एक दिन वह कमिश्नर का इंटरव्यू कर लाए और उसे एक मैग्जीन में छाप भी दिया जाए. विशाल अपने स्कूल के बच्चों से ऐसे कई क्रिएटिव काम कराते हैं.

फर्जी इंस्टीट्यूट ‘राधा गोविंद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के खिलाफ एफआईआर का आदेश

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से बड़ी खबर। न्यायलय ने दिया फर्जी इंस्टीट्यूट के खिलाफ एफआईआर का आदेश। एक छात्र पारस ने अपनी शिकायत जिले के पुलिस अधीक्षक से लेकर मुख्यमंत्री तक की लेकिन विडंबना देखिए कि उसकी किसी ने नहीं सुनी। उसकी शिकायत थी कि वह जिस इंस्टीट्यूट में पढ़ रहा था वह फर्जी है। उसके अनुसार उस जैसे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है। वह कहता रहा लेकिन सुनने वाला कौन था। आखिरकार उसने एक आरटीआई लगाई और फिर सच प्रामाणिक और लिखित तौर पर सामने आया। इसके बाद न्यायालय की शरण ली और जहां से इंस्टीट्यूट के खिलाफ मामला दर्ज करा सका।

दिल्ली सरकार के एक स्कूल में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला जा रहा!

केजरीवाल जी, आप बता दो, क्या मैडम की जांच होगी और गरीबों को न्याय मिलेगा?

राजधानी दिल्ली के विवेक विहार में राम मंदिर के आगे पार्क के पास एक दिल्ली सरकार का स्कूल है जहाँ भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला जा रहा है. गरीबों के बच्चों का एडमिशन मना कर दिया जाता है और पीछे से जिसका जुगाड़ पार्षद तक है उसी के बच्‍चे का एडमिशन होता है। इस बात का जीता जागता सबूत है कि एक दिन एक पत्रकार बंधु एडमिशन कराने के लिए प्रिंसिपल महोदया के पास गए तो उन्होंने साफ़ कह दिया कि सीटें तो फुल हैं लेकिन पार्षद कहेंगी तो एडमिशन होगा। 

दसवीं पास हैं तो तीन महीने में पत्रकार बनें!

जी हां. ये दावा है एक विज्ञापन का. विज्ञापन में बताया गया है कि उन्हें तीन महीने में क्या क्या सिखाया जाएगा ताकि पत्रकार बन सकें. साथ ही पांच सौ रुपये अलग से देने पर उन्हें क्या अलग ज्ञान दिया जाएगा. सोचिए. दसवीं पास अगर तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद पत्रकार बन गया तो वह क्या देश समाज को दिशा देगा और सच्चाई को क्या कितना समझ पाएगा. जिनको खुद अपने ज्ञान को अपडेट करने की जरूरत है, वही जब पत्रकार बनकर सही गलत का फैसला करेंगे तो जाहिर तौर पर उनका दकियानूसी माइंडसेट आम जन और समाज का बहुत नुकसान करेगा. दसवीं पास पत्रकार बनने का यह विज्ञापन आजकल सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है और लोग पत्रकारिता के गर्त में गिरने को लेकर चिंता जता रहे हैं.

Undergraduate journalism courses must be scrapped, says media professionals

New Delhi : Journalism and Mass Communication institutes in India have grown in number with close to 150 media and communication courses ranging from bachelors, masters, post graduate diploma to diploma and certificate programmes on offer. An assessment conducted by CMS Academy, New Delhi reveals that there are inconsistencies in these programmes that are being offered and there are lack of parameters under which one can evaluate the courses and the institutes for their quality. As a follow up of this study, a symposium on Vision for Media & Communication Education in India was organized on August 7th, 2015 at IIC.

छात्र के करियर से खिलवाड़ करने वाले राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी और आर्यभट्ट इंजीनियरिंग कॉलेज को हाईकोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया

राजस्थान हाइकोर्ट की जयपुर पीठ ने छात्र के भविष्य से खिलवाड़ करने पर राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी कोटा और आर्यभट्ट इंजीनियरिंग कॉलेज चाचियावास अजमेर को कारण बताओ नोटिस जारी किया। छात्र गिरीश मीणा के जीवन से कॉलेज और यूनिवर्सटी ने किया खिलवाड़। माननीय उच्च न्यायलय ने प्रथम दृष्टया कॉलेज व यूनिवर्सिटी की लापरवाही मानते हुए दोनों के खिलाफ नोटिस जारी कर कोर्ट 29 जुलाई 2015 को हाईकोर्ट जयपुर में तलब किया।

जब माननीय ही बांटे फर्जी डिग्री तो फिर रोकेगा कौन

बात सिर्फ दक्षिण कश्मीर के एक स्कूल शिक्षक मो. इमरान खान की नहीं है। जो गाय पर निबंध नहीं लिख पाए। इसे सरकारी स्कूलों पर तंज कहिए या व्यवस्था का दंश, हकीकत यही है कि हर जगह हर कहीं सरकारी स्कूल क्या हरेक विभाग में ऐसे नमूने देखने को मिल जाएंगे। अगर कायदे से जांच हुई तो देश भर में न जाने कितनें फर्जी नौकरशाहों पर गाज गिरेगी जो दुनिया में चौंकाने वाला बड़ा आंकड़ा होगा।  

यूपी में जंगलराज : केएनआईटी सुलतानपुर में क्यों है इस कदर भ्रष्टाचार!

कमला नेहरू प्रौद्यौगिकी संस्थान सुलतानपुर में भ्रष्टाचार की जडे़ं इतनी गहरी है जिसका पूरा अन्दाजा लगा पाना थोड़ा मुश्किल है। तकनीकी शिक्षा के लिए सरकारी गजट और शासन द्वारा बनाये गये नियम कानून के यहां कोई मायने नहीं हैं।  कई कहानियां हैं। एक-एक कर बताते हैं। यहां कार्यवाहक निदेशक के रूप में के.सी. वर्मा तैनात है। इनकी खुद की तैनाती एक बड़ी कहानी है, जिसे बाद में बताएंगे। पहले इनके अपने अपने चहेते सदा शिव मिश्र के बारे में जानिए। वर्मा जी ने अपने चहेते सदा शिव मिश्र को 2012 में दो बार पदोन्नति दी, शासनादेश एवं निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर। लाबिंग मजबूत करने के लिए राम चन्द्र तिवारी को निदेशक के वैयक्तिक सहायक के पद पर अनर्गल पदोन्नत करने के साथ ही अन्य लाभ देने का काम किया गया।