Jacinta Kerketta-
पूर्व आईएएस और एक्टिविस्ट एस.सेंथिल से पिछले दिनों मुलाकात हुई थी. धीरे-धीरे उन्हें और जानना हुआ. एक दिन वे अपना अनुभव साझा करते हुए कह रहे थे कि वे शुरुआत में इंजीनियर थे. लोग कहते थे कि उनका भविष्य बहुत उज्जवल है. वे जापान जाने वाले थे. ठीक जापान जाने से पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी. ऑफिस के लोग बहुत परेशान हुए. कहा कि उनका वेतन दुगुन्ना कर दिया जायेगा. पर उन्होंने कहा कि वे निर्णय ले चुके हैं. उनसे पूछा गया कि एक वजह वे बता दें कि आखिर वे क्यों नौकरी छोड़ना चाहते हैं? किसी से कोई गलती हुई है, कोई नाराजगी है? क्या है कारण?. उन्होंने एक ही वाक्य कहा ” मैं पूरा जीवन मशीनों के साथ नहीं जीना चाहता. मुझे मनुष्यों के बीच रहना है.” इसका जवाब किसी के पास नहीं था.

फिर उन्होंने शहर से बाहर युवाओं को पढ़ाने का काम किया. फिर सामाजिक काम करने वाली संस्थाओं के साथ भी जुड़े. किसी ने कहा कि सरकार तो सबसे बड़ी संस्था है जहां घुसकर वे लोगों के लिए अधिक काम कर सकेंगे. उन्होंने आईएएस की तैयारी की और 2009 बैच में कर्नाटक कैडर से देशभर में नौवें रैंक पर रहे. हमेशा अपने उसूलों पर काम किया. वे बच्चों और साधारण लोगों के बीच हमेशा लोकप्रिय रहे. वे कहते हैं कि उनके जीवन की कोई सबसे बड़ी उपलब्धि है तो यही कि लोग उन्हें अपना प्रशासनिक अधिकारी मानते थे. उनके ऑफिस का दरवाजा हमेशा साधारण लोगों के लिए खुला रहा.
फिर एक दिन जब उन्होंने देखा कि देश में स्थितियां बदल रही हैं. फासीवादी ताकतों के खिलाफ़ लड़ने, फिर से लोगों के बीच जाने, नए तरीके से काम करने, लोगों में नई चेतना जगाने की ज़रूरत है तब उन्होंने 2019 में CAA/NRC प्रोटेस्ट के दौरान आईएएस की नौकरी छोड़ दी. और वे लोगों के बीच चले आए. यूनिवर्सल मूल्यों पर उनका गहरा यकीन है. वे इन जीवन मूल्यों के साथ समाज के लिए प्रतिबद्ध हैं. इधर कर्नाटक इलेक्शन में वे कांग्रेस का वॉर रूम संभाल रहे हैं. उनके पास एक विजन है. स्पष्टता है. सहजता और विनम्रता है. निरंतर सीखने का धैर्य है. वे ज़मीन से जुड़े और संभावनाओं से भरे एक अद्भुत इंसान हैं.
वे कहते हैं कि वे कविता के आदमी नहीं थे. पर इधर कविताओं ने उन्हें नया नज़रिया दिया है और वे इसकी ताक़त को महसूस कर सकते हैं. वे मूलतः आदिवासी जीवन दर्शन के इंसान हैं. जीवन भर इसी जीवन दर्शन के साथ चलते रहे. आदिवासी दुनिया को समझते हुए अब वे असल अर्थ में अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं.


